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Dhaka ढाका। बांग्लादेश के राष्ट्रीय सहमति आयोग (एनसीसी) ने बुधवार को घोषणा की कि आयोग 10 अक्टूबर तक अंतरिम सरकार को अपनी अंतिम सिफारिशें सौंप देगा। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इन सिफारिशों का उद्देश्य राजनीतिक दलों को 16 अक्टूबर तक “जुलाई राष्ट्रीय चार्टर 2025” पर हस्ताक्षर करने में सक्षम बनाना है। यह प्रक्रिया देश में राजनीतिक स्थिरता और लोकतांत्रिक सुधारों को दिशा देने में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
एनसीसी के उपाध्यक्ष अली रियाज ने बुधवार दोपहर ढाका स्थित विदेश सेवा अकादमी में जुलाई चार्टर के कार्यान्वयन पर आयोजित आयोग की पांचवीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह जानकारी दी। बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट यूनाइटेड न्यूज ऑफ बांग्लादेश (यूएनबी) के अनुसार, रियाज ने कहा, “आयोग 10 अक्टूबर तक सरकार को अपनी अंतिम सिफारिशें सौंप देगा। 15 और 16 अक्टूबर को राजनीतिक दलों द्वारा जुलाई राष्ट्रीय चार्टर पर औपचारिक हस्ताक्षर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।”
उन्होंने आगे कहा कि राजनीतिक दलों द्वारा दर्ज किए गए “असहमति के नोट” पर भी विचार किया जाना आवश्यक है। रियाज ने कहा, “जुलाई राष्ट्रीय चार्टर में जिन बिंदुओं पर असहमति जताई गई है, उन पर ध्यानपूर्वक विचार किया जाएगा। हमें नहीं लगता कि सभी असहमति वाले मुद्दों को एक समान तरीके से देखा जा सकता है, क्योंकि हर दल ने अपने दृष्टिकोण से ऐसे नोट प्रस्तुत किए हैं। ये केवल राजनीतिक हितों का नहीं, बल्कि व्यापक जनभावनाओं का भी प्रतिनिधित्व करते हैं।”
एनसीसी उपाध्यक्ष ने आगे कहा कि जब देश में जनमत संग्रह के माध्यम से इस चार्टर पर सहमति प्राप्त की जाएगी, तब यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि जनता को सभी मतभेदों की जानकारी स्पष्ट रूप से हो। उन्होंने कहा, “जब लोग अपनी सहमति दें, तो उन्हें यह पता होना चाहिए कि किन मुद्दों पर विभिन्न राजनीतिक दलों की आपत्तियां हैं। बैठक में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी), जमात-ए-इस्लामी, नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) सहित करीब 30 राजनीतिक दलों ने हिस्सा लिया। इन दलों ने जुलाई राष्ट्रीय चार्टर के कार्यान्वयन की प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देने के लिए विस्तृत चर्चा की।
इससे पहले जुलाई महीने में देश में चल रही राजनीतिक अनिश्चितता और अस्थिरता के बीच 30 राजनीतिक दलों और एनसीसी के बीच चर्चा का दूसरा चरण शुरू हुआ था। उस दौरान कई दलों, विशेष रूप से जमात, एनसीपी और इस्लामी आंदोलन ने जुलाई राष्ट्रीय चार्टर के मसौदे पर आपत्ति जताई थी। इन दलों ने विशेष रूप से उस प्रावधान का विरोध किया था, जिसके तहत राष्ट्रीय चुनावों के बाद बनने वाली सरकार को दो वर्षों के भीतर सुधार प्रस्तावों को लागू करना होगा। साथ ही उन्होंने यह मांग भी रखी कि जुलाई चार्टर को केवल एक राजनीतिक संधि न बनाकर कानूनी ढांचे में शामिल किया जाए, ताकि इसके कार्यान्वयन की सुनिश्चितता हो सके।
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