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गरीबों को कोविड-19 के दौरान बांटे गए खराब खाद्य पदार्थ, आडिट रिपोर्ट में इमरान सरकार की करतूत आई सामने

Sarita
1 Dec 2021 11:59 AM IST
गरीबों को कोविड-19 के दौरान बांटे गए खराब खाद्य पदार्थ, आडिट रिपोर्ट में इमरान सरकार की करतूत आई सामने
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फाइल फोटो 

पाकिस्‍तान की इमरान सरकार को लगातार चौतरफा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। पाकिस्‍तान की इमरान सरकार को लगातार चौतरफा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पहले ही कई मुद्दों पर विपक्ष सरकार पर हमलावर हो रहा है। वहीं अब सामने आई आडिट रिपोर्ट ने इमरान खान सरकार की मुश्किलों को और बढ़ाने के अलावा विपक्ष को भी बैठे बिठाए एक मुद्दा दे दिया है। दरअसल इस आडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी में देशवासियों को राहत योजनाओं में जबरदस्‍त वित्‍तीय अनियमितता बरते जाने का खुलासा हुआ है। इसमें कहा गया है कि इस दौरान जो खाना दिया गया और जो इस पर खर्च किया गया वो सही तरीके से नहीं किया गया। डान न्‍यूज पेपर की खबर के मुताबिक इस रिपोर्ट को पाकिस्‍तान सरकार के वित्‍त मंत्रालय ने जारी किया है।

इस रिपोर्ट में यहां तक बताया गया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान कहां-कहां गड़बड़ी हुई है। इसमें कहा गया है कि सरकार ने चीनी, गेंहू का आटा, तेल, घी, दाल और चावल को सब्‍सीडाइज रेट पर यूटिलिटी स्‍टोर को उपलब्‍ध करवाया था, जिसमें ये वित्‍तीय गड़बड़ी की रिपोर्ट सामने आई है। इतना ही नहीं इस रिपोर्ट में यहां तक कहा गया है कि इस दौरान स्‍टोर कारपोरेशन आफ पाकिस्‍तान (यूएसससी) की तरफ से जो खाने की चीजें गरीब लोगों को मुहैया करवाई गईं उनकी गुणवत्‍ता बेहद खराब थी और वो इंसानों के खाने लायक नहीं थीं।
गौरतलब है कि यूएससी देश में खाद्य पदार्थों की गुणवत्‍ता के लिए जिम्‍मेदार है। इसके जरिए ही गरीब लोगों को बाजार भाव से सस्‍ती दर पर खाद्य पदार्थ मुहैया करवाए जाते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी, घी और और आटे की खरीद में करीब 5.24 बिलियन रुपये से अधिक की वित्‍तीय अनियमितता बरती गई।
आपको बता दें कि इमरान सरकार ने वर्ष 2020 में ही कोविड-19 महामारी के दौरान बढ़ती महंगाई के मद्देनजर गरीबों के लिए सहायता पैकेज की घोषणा की थी। इसके लिए सरकार ने करीब 10 बिलियन रुपये यूएससी को रिलीज किए थे। ये राशि गरीबों को सस्‍ती दर पर अनाज उपलब्‍ध कराने के मकसद से जारी की गई थी। रिपोर्ट बताती है कि यूएससी ने इस योजना के तहत खाद्य पदार्थों की जो खरीद की उसकी गुणवत्‍ता को लेकर कोई विचार नहीं किया। इनकी गुणवत्‍ता बेहद खराब थी।
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