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BEIRUT बेरूत : बेरूत से मिली जानकारी के अनुसार सीरिया में एक कैंप से जुड़े ऑस्ट्रेलियाई महिलाओं और बच्चों का एक समूह अब भी देश में फंसा हुआ है। यह मामला ऐसे परिवारों से जुड़ा है जिनके बारे में कहा जाता है कि वे कथित रूप से Daesh (ISIS) ग्रुप से जुड़े मिलिटेंट्स से संबंधित हैं। सीरिया के अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने इन लोगों को वापस लेने से इनकार कर दिया है, जिसके चलते उनकी वापसी की प्रक्रिया अटक गई है।
जानकारी के अनुसार, पिछले सप्ताह चार परिवारों की कुल 13 महिलाएं और बच्चे उत्तरी-पूर्वी सीरिया के रोझ (Roj) कैंप से निकले थे। यह कैंप इराक सीमा के पास स्थित एक दूर-दराज का क्षेत्र है, जहां संदिग्ध लड़ाकों के परिजन रहते हैं। कैंप से निकलने के बाद ये सभी लोग दमिश्क के लिए रवाना हुए थे।
स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, योजना यह थी कि ये परिवार लगभग 72 घंटे तक दमिश्क में रहेंगे और फिर उन्हें ऑस्ट्रेलिया भेज दिया जाएगा। लेकिन यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
सीरिया के सूचना मंत्रालय ने एसोसिएटेड प्रेस को दिए एक बयान में बताया कि जब ये परिवार कैंप से निकले, तब विदेश मंत्रालय को यह जानकारी दी गई कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने उन्हें स्वीकार करने से मना कर दिया है। इसके बाद स्थिति और जटिल हो गई।
मंत्रालय के अनुसार, इन परिवारों को दमिश्क इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचने से पहले ही वापस रोक दिया गया और उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिली। इस वजह से सभी प्रभावित लोग अब सीरिया में ही फंसे हुए हैं।
सीरियाई अधिकारियों ने कहा कि इन परिवारों की स्थिति अब अनिश्चित बनी हुई है और इसका समाधान केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय के जरिए ही संभव है। उनका कहना है कि इस मामले में कई देशों की भूमिका अहम हो सकती है, खासकर उन देशों की जिनसे ये परिवार जुड़े हुए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, कैंप से निकलने के बाद इन परिवारों को अस्थायी रूप से सुरक्षित स्थान पर रखा गया था, लेकिन आगे की यात्रा रुक जाने के कारण वे अभी किसी निश्चित जगह पर नहीं पहुंच पाए हैं।
यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा, नागरिकता और मानवीय जिम्मेदारियों से जुड़े सवाल भी खड़े कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में देशों के बीच समन्वय न होने पर प्रभावित लोगों की स्थिति और जटिल हो जाती है।
सीरिया के अधिकारियों ने कहा है कि वे इस मुद्दे को हल करने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए संबंधित देशों की सहमति और सहयोग जरूरी है। फिलहाल इन परिवारों के भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर उन लोगों की स्थिति पर ध्यान केंद्रित किया है जो संघर्ष क्षेत्रों से जुड़े कैंपों में वर्षों से रह रहे हैं और अब अपने मूल देशों में लौटने की कोशिश कर रहे हैं।
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