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असीम मुनीर बने सबसे ताकतवर सैन्य अधिकारी पाकिस्तान में लागू हुआ नया सिस्टम

Ratna Netam
5 Sept 2026 7:20 PM IST
असीम मुनीर बने सबसे ताकतवर सैन्य अधिकारी पाकिस्तान में लागू हुआ नया सिस्टम
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इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने अपनी सैन्य कमान व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए ऐसा सिस्टम लागू किया है, जिसमें तीनों सेनाओं की कमान एक ही अधिकारी के हाथ में होगी। पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए एकीकृत कमान व्यवस्था बनाई गई है। इस बदलाव के बाद फील्ड मार्शल **असीम मुनीर** को देश की तीनों सेनाओं पर अभूतपूर्व अधिकार मिल गए हैं।
नई व्यवस्था के तहत असीम मुनीर अब पाकिस्तान के **चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF)** के पद पर भी रहेंगे। वह पहले से ही सेना प्रमुख के पद पर हैं। यानी अब उनके पास सेना प्रमुख और तीनों सेनाओं के संयुक्त कमांडर की दोहरी जिम्मेदारी होगी।
क्या है ‘एक कमांडर तीन सेनाएं’ वाला सिस्टम?
पाकिस्तान में अब तक सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच तालमेल के लिए चेयरमैन जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CJCSC) का पद था। यह पद तीनों सेनाओं के बीच समन्वय का काम करता था, लेकिन इसके पास सीधे ऑपरेशनल कमांड का अधिकार नहीं था।
नई व्यवस्था में चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) को तीनों सेनाओं की संयुक्त कमान का अधिकार दिया गया है। यानी सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़े बड़े रणनीतिक फैसलों में CDF की भूमिका सबसे अहम होगी।
असीम मुनीर के हाथों में क्यों बढ़ी ताकत?
फील्ड मार्शल असीम मुनीर अब पाकिस्तान की सैन्य संरचना में सबसे प्रभावशाली पद पर पहुंच गए हैं।
नई व्यवस्था के तहत उनके पास—
* थल सेना की कमान
* नौसेना और वायुसेना के संयुक्त अभियानों की निगरानी
* सैन्य रणनीति तैयार करने में बड़ी भूमिका
* रक्षा बलों के संचालन से जुड़े अहम फैसले
जैसी शक्तियां होंगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था में दशकों बाद सबसे बड़ा पुनर्गठन माना जा रहा है।
संसद ने पास किया नया कानून
पाकिस्तान की संसद ने **Defence Forces of Pakistan Act 2026** के जरिए सैन्य कमान में यह बदलाव किया है।
इस कानून के बाद चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज का पद बनाया गया और असीम मुनीर को इस पद पर नियुक्त किया गया। इससे पहले मौजूद जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी की भूमिका खत्म कर दी गई।
सरकार का तर्क है कि नई व्यवस्था से तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल होगा और युद्ध या आपात स्थिति में फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे।
आलोचकों ने उठाए सवाल
हालांकि इस बदलाव को लेकर पाकिस्तान में बहस भी शुरू हो गई है।
आलोचकों का कहना है कि इससे सैन्य शक्ति एक ही व्यक्ति के हाथों में ज्यादा केंद्रित हो सकती है। कुछ विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि नौसेना और वायुसेना की स्वतंत्र भूमिका कमजोर हो सकती है।
विपक्षी आवाजों का यह भी कहना है कि किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सैन्य और नागरिक संस्थाओं के बीच संतुलन बेहद जरूरी होता है।
पहले कैसा था सिस्टम?
पाकिस्तान में लंबे समय से तीनों सेनाओं के अलग-अलग प्रमुख होते थे।
सेना प्रमुख को पाकिस्तान में पारंपरिक रूप से सबसे शक्तिशाली सैन्य पद माना जाता रहा है। हालांकि नौसेना और वायुसेना के अपने अलग प्रमुख होते थे।
CJCSC का काम तीनों सेनाओं के बीच समन्वय करना था, लेकिन उसके पास सीधे आदेश देने की शक्ति सीमित थी।
अब CDF व्यवस्था में यह शक्ति एक केंद्रीय पद में आ गई है।
परमाणु कमान पर भी नजर
पाकिस्तान परमाणु हथियार रखने वाला देश है। ऐसे में सैन्य कमान में होने वाले बदलाव का रणनीतिक महत्व भी काफी बड़ा माना जा रहा है।
नई व्यवस्था के बाद पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति, रणनीतिक योजना और सैन्य तैयारियों में CDF की भूमिका पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है।
हालांकि परमाणु कमान से जुड़े नियम और प्रक्रियाएं अलग संस्थागत ढांचे के तहत संचालित होती हैं।
भारत के लिए क्या मायने?
पाकिस्तान की सैन्य कमान में यह बदलाव भारत सहित पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से सुरक्षा और सीमा संबंधी तनाव रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान की सैन्य संरचना में किसी भी बड़े बदलाव पर क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ नजर रखते हैं।
एकीकृत कमान व्यवस्था से पाकिस्तान की सेना की निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
असीम मुनीर का बढ़ता प्रभाव
असीम मुनीर पाकिस्तान के सबसे प्रभावशाली सैन्य अधिकारियों में शामिल हो चुके हैं।
वह पहले पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के प्रमुख भी रह चुके हैं और बाद में सेना प्रमुख बने।
अब CDF पद मिलने के बाद उनका प्रभाव पाकिस्तान की पूरी सैन्य व्यवस्था में और बढ़ गया है।
पाकिस्तान की राजनीति पर भी असर
पाकिस्तान में सेना की भूमिका हमेशा से राजनीति में चर्चा का विषय रही है।
देश के इतिहास में कई बार सैन्य हस्तक्षेप देखने को मिला है। ऐसे में सेना प्रमुख को और अधिक अधिकार मिलने को लेकर राजनीतिक विश्लेषक अलग-अलग राय रखते हैं।
कुछ इसे आधुनिक सैन्य प्रबंधन की जरूरत बताते हैं, जबकि कुछ इसे शक्ति के केंद्रीकरण के रूप में देखते हैं।
आगे क्या होगा?
नई कमान व्यवस्था लागू होने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती होगी कि सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच संतुलन कैसे बनाया जाता है।
अगर नई व्यवस्था बेहतर तालमेल और तेज फैसलों में मदद करती है तो पाकिस्तान इसे सैन्य सुधार के रूप में पेश करेगा।
लेकिन अगर इससे संस्थागत टकराव या शक्ति संतुलन की समस्या पैदा होती है तो इसकी आलोचना और बढ़ सकती है।
फिलहाल इतना तय है कि असीम मुनीर को मिली यह नई जिम्मेदारी पाकिस्तान के सैन्य इतिहास के सबसे बड़े बदलावों में से एक है। एक अधिकारी के हाथ में तीनों सेनाओं की कमान आने से देश की सुरक्षा नीति और सैन्य रणनीति पर इसका दूरगामी असर पड़ सकता है।
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