
Pakistan पाकिस्तान: अर्थव्यवस्था इस समय गहरे संकट से गुजर रही है। बढ़ती गरीबी, बेरोजगारी और धीमी आर्थिक वृद्धि के बीच सैन्य जनरलों की देश की नीतियों पर पकड़ और मजबूत होती जा रही है। संसाधनों का बड़ा हिस्सा रक्षा खर्च पर जा रहा है, जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े क्षेत्रों में कटौती की गई है। चालू वित्त वर्ष के बजट में पाकिस्तान सरकार ने रक्षा खर्च में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इसके विपरीत, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास योजनाओं में कुल 7 प्रतिशत की कमी की गई है। यह फैसला उस समय लिया गया है जब देश की अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के कर्ज पर निर्भर है। इसके बावजूद, सेना हथियारों और सैन्य उपकरणों पर खर्च से पीछे नहीं हट रही है। आईएमएफ से 7 बिलियन डॉलर के बेलआउट पैकेज के तहत पाकिस्तान को कड़े आर्थिक सुधार लागू करने थे। लेकिन वह तय पांच लक्ष्यों में से तीन को पूरा करने में नाकाम रहा। इससे भारत का यह दावा मजबूत हुआ है कि पाकिस्तान का कर्ज प्रबंधन और आईएमएफ की शर्तों का पालन करने का रिकॉर्ड बेहद कमजोर है।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में सेना का सीधा हस्तक्षेप सुधारों को बाधित कर रहा है। भले ही नागरिक सरकार सत्ता में है, लेकिन घरेलू राजनीति और अर्थव्यवस्था में सेना की भूमिका निर्णायक बनी हुई है। 2021 की संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट के अनुसार, सेना से जुड़े व्यवसाय पाकिस्तान के सबसे बड़े कारोबारी समूह हैं। हालात सुधरने के बजाय और खराब हुए हैं। अब सेना पाकिस्तान की विशेष निवेश सुविधा परिषद में भी प्रमुख भूमिका निभा रही है।देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है। 'पाकिस्तान ऑब्जर्वर' के अनुसार, गरीबी, बेरोजगारी, बढ़ती आबादी और असमानता एक गहरा संकट पैदा कर रहे हैं। आज पाकिस्तान की 44.7 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रही है।
वित्तीय स्थिति भी कमजोर हो गई है। पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2022-23 में प्रति व्यक्ति आय 11.38 प्रतिशत घट गई। यह 2022 में 1,766 डॉलर थी, जो 2023 में घटकर 1,568 डॉलर रह गई। इसी अवधि में पाकिस्तान की कुल अर्थव्यवस्था भी 33.4 अरब डॉलर सिकुड़ गई। 2022 में जीडीपी 375 अरब डॉलर थी, जो 2023 में घटकर 341.6 अरब डॉलर रह गई। पाकिस्तान की प्रति व्यक्ति आय कई वर्षों से स्थिर या घटती रही है, जो बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई को दर्शाती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा हालात में अगर नीतिगत सुधार नहीं किए गए तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लंबे समय तक अस्थिर रह सकती है। सेना की बढ़ती दखलंदाजी और संसाधनों का असंतुलित उपयोग देश को और गहरे संकट की ओर धकेल रहा है।





