
वॉशिंगटन। अमेरिका के एक शॉपिंग मॉल में एक कियोस्क कर्मचारी पर कथित तौर पर धार्मिक पहचान के आधार पर हमला करने का मामला सामने आया है। कोर्ट के दस्तावेजों के अनुसार, आरोपी ने पीड़ित को मुस्लिम समझकर निशाना बनाया और उस पर चाकू से कई बार हमला किया। इस घटना के बाद अमेरिका में धार्मिक नफरत और हेट क्राइम को लेकर फिर बहस तेज हो गई है।
मामला अमेरिका के एक शॉपिंग मॉल का है, जहां पीड़ित युवक कियोस्क कर्मचारी के रूप में काम करता था। आरोप है कि 48 वर्षीय पीटर माइकल लार्सन ने पहले युवक से उसकी धार्मिक पहचान को लेकर सवाल किया। इसके बाद उसने कथित तौर पर चाकू से हमला कर दिया।
कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों के मुताबिक, आरोपी ने जांचकर्ताओं को बताया कि उसने पीड़ित को जानबूझकर निशाना बनाया, क्योंकि उसे लगा कि वह मुस्लिम है। आरोपी पर यह भी आरोप है कि उसने मुसलमानों को नुकसान पहुंचाने की मंशा जाहिर की थी।
पुलिस जांच में सामने आया कि हमले के दौरान आरोपी ने पीड़ित पर कई बार चाकू से वार किए। रिपोर्ट के अनुसार, युवक पर करीब 15 बार हमला किया गया। हमले के बाद मॉल में अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने घटना की सूचना सुरक्षा अधिकारियों और पुलिस को दी।
घायल युवक को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने उसका उपचार किया। फिलहाल उसकी हालत को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि हमला व्यक्तिगत विवाद का परिणाम था या फिर इसके पीछे धार्मिक नफरत की भावना थी। अधिकारियों ने आरोपी के बयान और अन्य सबूतों के आधार पर मामले को गंभीरता से लिया है।
अमेरिकी कानून में किसी व्यक्ति को उसकी धार्मिक पहचान, नस्ल या समुदाय के आधार पर निशाना बनाकर हमला करना हेट क्राइम की श्रेणी में आ सकता है। ऐसे मामलों में आरोपी के खिलाफ अतिरिक्त धाराएं लगाई जा सकती हैं।
इस घटना ने अमेरिका में धार्मिक भेदभाव और अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
भारतीय समुदाय के बीच भी इस घटना को लेकर चिंता जताई जा रही है। अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं और कई लोग विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हैं। समुदाय के लोगों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के साथ उसकी धार्मिक पहचान के आधार पर हिंसा नहीं होनी चाहिए।
फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां मामले के हर पहलू की जांच कर रही हैं। आरोपी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी है और आगे की कार्रवाई कोर्ट में पेश किए गए सबूतों के आधार पर होगी।





