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Dhaka ढाका। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के मामले बढ़ते जा रहे हैं। ताजा मामले में शनिवार को शरियतपुर जिले के दामुड्या उपजिला में कट्टरपंथियों की भीड़ ने एक और हिंदू व्यक्ति पर हमला किया। स्थानीय मीडिया ने जानकारी दी है कि इस घटना में अल्पसंख्यक हिंदू युवक की मौत हो गई। मृतक का नाम खोकन चंद्र दास है, जो दामुड्या के एक कारोबारी थे। इस हफ्ते की शुरुआत में कट्टरपंथियों की भीड़ ने खोकन पर पेट्रोल डालकर आग के हवाले कर दिया था। इस घटना में वह बुरी तरह घायल हो गए थे और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। यह घटना बुधवार देर रात दामुड्या के कनेश्वर यूनियन में केउरभंगा बाजार के पास हुई।
शनिवार सुबह ढाका के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। बांग्लादेश के बंगाली अखबार कालबेला ने दामुड्या पुलिस स्टेशन ऑफिसर-इन-चार्ज (ओसी) मोहम्मद रबीउल हक के हवाले से कहा, "हमें जानकारी मिली है कि केउरभंगा बाजार के एक बिजनेसमैन खोकन चंद्र दास की ढाका में इलाज के दौरान मौत हो गई है। हम ढाका के शाहबाग पुलिस स्टेशन के संपर्क में हैं। पोस्टमार्टम के बाद मृतक का शव परिवार वालों को सौंप दिया जाएगा, और पुलिस उस घटना में दर्ज केस में आरोपियों को गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है।"
इस मामले में बांग्लादेश के जाने-माने बंगाली अखबार 'प्रोथोम आलो' ने दामुड्या पुलिस स्टेशन के सूत्रों के हवाले से बताया कि खोकोन केउरभंगा बाजार में दवा और मोबाइल बैंकिंग का बिजनेस चलाता है। बुधवार रात को अपनी दुकान बंद करने के बाद खोकन दिन भर की कमाई लेकर सीएनजी से चलने वाले ऑटो रिक्शा से घर लौट रहे थे। तभी बदमाशों ने दामुड्या-शरियतपुर रोड पर केउरभंगा बाजार के पास उनकी गाड़ी रोकी और उनके ऊपर पहले हमला किया। हमले में खोकन घायल हो गए और फिर उनके सिर पर पेट्रोल डालकर उन्हें आग के हवाले कर दिया गया।
उनके भतीजे प्रांत दास के मुताबिक, खोकन का गुरुवार देर रात से ढाका के नेशनल बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी इंस्टिट्यूट में इलाज चल रहा था। सुबह उनकी हालत बिगड़ गई और इंटेंसिव केयर यूनिट में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। ढाका मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में बर्न यूनिट के प्रमुख बिधान सरकार ने प्रोथोम अलो से बताया कि खोकन का शुरू में ढाका मेडिकल कॉलेज में इलाज किया गया था। उनके शरीर का लगभग 30 फीसदी हिस्सा जल गया था।
बाद में उन्हें एडवांस मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए नेशनल बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी इंस्टिट्यूट में शिफ्ट किया गया, जहां इलाज के दौरान शनिवार सुबह उनकी मौत हो गई। खोकन की मौत के साथ ही यह एक हफ्ते में हिंदू अल्पसंख्यकों पर इस तरह की क्रूरता की दूसरी घटना है। इस हफ्ते की शुरुआत में, 40 साल के बजेंद्र बिस्वास को मैमनसिंह जिले के भालुका उपजिला में उनके ही एक साथी ने गोली मार दी थी। इससे पहले पिछले साल 24 दिसंबर 2025 को, बांग्लादेशी मीडिया ने अमृत मंडल नाम के एक और हिंदू युवक की हत्या की जानकारी दी थी। अमृत की उम्र 29 साल थी, और उन्हें बांग्लादेश में कालीमोहर यूनियन के हुसैनडांगा इलाके में भीड़ ने कथित तौर पर हत्या कर दी थी।
इससे पहले 18 दिसंबर को, मैमनसिंह में ही एक फैक्ट्री में काम करने वाले हिंदू युवक दीपू चंद्र दास को कट्टरपंथियों की भीड़ ने झूठे ईशनिंदा के आरोप में मॉब लिंचिंग कर दिया था। कट्टरपंथियों की इस बेरहमी से दीपू को मौत के घाट उतारा, जिसे सुनकर रूह कांप जाए। भीड़ ने दास को मार डाला और फिर उसकी बॉडी को आग लगाने से पहले एक पेड़ से लटका दिया था। यूनुस की अंतरिम सरकार के तहत बांग्लादेश में हिंदुओं समेत अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा बढ़ी है, जिससे दुनिया भर के लोगों और कई मानवाधिकार संगठनों में गुस्सा है।
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