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पाकिस्तान रक्षा समझौते पर अनिल चौहान की चेतावनी

Kavita2
6 Sept 2026 9:22 AM IST
पाकिस्तान रक्षा समझौते पर अनिल चौहान की चेतावनी
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पाकिस्तान : सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए महत्वपूर्ण संयुक्त रक्षा समझौते को लेकर भारत में सुरक्षा संबंधी चर्चाएं तेज हो गई हैं। पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने शनिवार को कहा कि इस तरह के समझौतों से पाकिस्तान में अति आत्मविश्वास पैदा हो सकता है, जिससे वह भविष्य में गलत आकलन कर सकता है।

नई दिल्ली स्थित तीन मूर्ति भवन परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम में ‘भारत की सुरक्षा के लिए खतरे और चुनौतियां’ विषय पर व्याख्यान देते हुए जनरल अनिल चौहान ने क्षेत्रीय सुरक्षा हालात पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आने वाले समय में भी भारत के लिए एक बड़ी सुरक्षा चिंता और खतरा बना रहेगा।

पाकिस्तान को लेकर सुरक्षा चिंता बरकरार

पूर्व CDS अनिल चौहान ने कहा कि भारत को अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखनी होगी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की रणनीतिक सोच और सुरक्षा नीतियों को देखते हुए वह लंबे समय तक भारत के लिए चुनौती बना रहेगा।

उन्होंने कहा कि किसी भी देश के साथ रक्षा समझौते से किसी राष्ट्र का आत्मविश्वास बढ़ सकता है, लेकिन कई बार यही आत्मविश्वास गलत निर्णय लेने का कारण भी बन जाता है। उन्होंने संकेत दिया कि पाकिस्तान को ऐसे समझौतों के आधार पर कोई गलत अनुमान नहीं लगाना चाहिए।

ऑपरेशन सिंदूर का किया जिक्र

जनरल अनिल चौहान ने अपने संबोधन में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कदमों और सिंधु जल संधि को स्थगित करने जैसे फैसलों के साथ कुछ व्यावहारिक उपायों से उम्मीद है कि पाकिस्तान के व्यवहार में बदलाव आएगा।

उन्होंने कहा कि भारत की कोशिश हमेशा यह रही है कि वह अपनी सुरक्षा को मजबूत रखते हुए क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखे। हालांकि, अगर कोई देश भारत की सुरक्षा के लिए चुनौती पैदा करता है तो उसके अनुसार कदम उठाने की जरूरत होती है।

रक्षा समझौते पर भारत की नजर

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए रक्षा सहयोग को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा हो रही है। इस समझौते को लेकर भारत सहित कई देशों की सुरक्षा एजेंसियां क्षेत्रीय प्रभावों का आकलन कर रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के देशों के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग आने वाले समय में क्षेत्रीय समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में भारत अपनी सुरक्षा रणनीति और सैन्य तैयारियों को लेकर सतर्क है।

भारत की सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा

कार्यक्रम के दौरान जनरल अनिल चौहान ने भारत के सामने मौजूद विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आज सुरक्षा का दायरा केवल सीमा तक सीमित नहीं है, बल्कि साइबर सुरक्षा, तकनीकी युद्ध, आतंकवाद और बदलते वैश्विक समीकरण भी महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा कि भारत को भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अपनी सैन्य क्षमता और रणनीतिक तैयारी को लगातार मजबूत करना होगा।

पड़ोसी देशों के व्यवहार पर नजर

पूर्व CDS ने कहा कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण संबंध चाहता है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत द्वारा उठाए गए कदमों से पाकिस्तान के रवैये में बदलाव आ सकता है।

उन्होंने कहा कि सुरक्षा के क्षेत्र में किसी भी देश को केवल वर्तमान स्थिति नहीं बल्कि भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखकर रणनीति तैयार करनी चाहिए।

बदलते वैश्विक समीकरण

दुनिया में बदलते राजनीतिक और सैन्य समीकरणों के बीच भारत अपनी भूमिका को मजबूत करने में जुटा है। रक्षा सहयोग, सैन्य आधुनिकीकरण और रणनीतिक साझेदारी भारत की सुरक्षा नीति के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

जनरल अनिल चौहान के बयान के बाद एक बार फिर पाकिस्तान और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा और अपनी सुरक्षा क्षमताओं को लगातार मजबूत करना होगा।

फिलहाल, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के रक्षा सहयोग पर भारत की सुरक्षा एजेंसियां नजर बनाए हुए हैं। आने वाले समय में इस समझौते के क्षेत्रीय प्रभावों पर भी ध्यान दिया जाएगा।

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