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धर्म से ऊपर इंसानियत की मिसाल पाकिस्तान में मुस्लिम कलाकार ने बनाई गणेश मूर्ति
Ratna Netam
4 Sept 2026 2:53 PM IST

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पाकिस्तान : कराची शहर से धार्मिक सद्भाव और आपसी भाईचारे की एक अनोखी तस्वीर सामने आई है। यहां एक मुस्लिम कारीगर ने भगवान गणेश की मूर्ति तैयार की है, जिसे कराची में रहने वाला एक मराठी परिवार गणेश उत्सव के दौरान स्थापित कर विसर्जित करेगा। यह घटना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग इसे सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बता रहे हैं।
कराची जैसे बड़े शहर में जहां विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के लोग रहते हैं, वहां गणेश उत्सव मनाने की परंपरा भी कुछ परिवारों में वर्षों से चली आ रही है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए एक मराठी परिवार ने गणपति बप्पा की मूर्ति बनवाने का जिम्मा एक मुस्लिम कलाकार को दिया। कलाकार ने पूरी श्रद्धा और मेहनत से भगवान गणेश की सुंदर प्रतिमा तैयार की।
मुस्लिम कारीगर ने बनाई गणपति की प्रतिमा
जानकारी के मुताबिक, कराची में रहने वाले मुस्लिम मूर्तिकार ने गणपति की मूर्ति को बेहद बारीकी से तैयार किया। मूर्ति बनाने के दौरान उन्होंने डिजाइन, आकार और सजावट का विशेष ध्यान रखा। उनकी कला और मेहनत को देखकर परिवार भी काफी प्रभावित हुआ।
मूर्तिकार का कहना है कि कला किसी धर्म की सीमा में बंधी नहीं होती। एक कलाकार के लिए उसकी कला ही सबसे बड़ी पहचान होती है। उन्होंने भगवान गणेश की प्रतिमा को भी उसी लगन और सम्मान के साथ बनाया, जैसे वह किसी अन्य कलाकृति को बनाते हैं।
कराची में मराठी परिवार मनाएगा गणेश उत्सव
कराची में रहने वाला मराठी परिवार हर साल गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाता है। परिवार के लिए यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि अपनी संस्कृति और परंपरा को जीवित रखने का माध्यम भी है।
परिवार ने इस बार गणपति की प्रतिमा के लिए मुस्लिम कारीगर का चयन किया। उनका मानना है कि इससे समाज में आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश जाता है। गणपति स्थापना के बाद परिवार विधि-विधान से पूजा करेगा और उत्सव समाप्त होने पर मूर्ति का विसर्जन किया जाएगा।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
गणपति की मूर्ति बनाते मुस्लिम कारीगर का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कारीगर को भगवान गणेश की प्रतिमा को अंतिम रूप देते हुए देखा जा सकता है। लोग इस वीडियो को धार्मिक सौहार्द और इंसानियत की मिसाल बता रहे हैं।
कई यूजर्स ने लिखा कि कला और संस्कृति लोगों को जोड़ने का काम करती है। वहीं कुछ लोगों ने इसे भारत-पाकिस्तान के बीच आम लोगों के स्तर पर मौजूद साझा सांस्कृतिक जुड़ाव का उदाहरण बताया।
धर्म से ऊपर इंसानियत का संदेश
भारत और पाकिस्तान दोनों देशों में धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का लंबा इतिहास रहा है। कई मौकों पर ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, जहां अलग-अलग धर्मों के लोग एक-दूसरे के त्योहारों और परंपराओं का सम्मान करते दिखाई देते हैं।
गणपति की मूर्ति बनाने वाले मुस्लिम कलाकार की यह पहल भी इसी भावना को दर्शाती है। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से यह संदेश दिया कि त्योहार केवल एक समुदाय तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे लोगों को जोड़ने का अवसर भी देते हैं।
गणेश उत्सव का बढ़ता प्रभाव
गणेश चतुर्थी भारत के महाराष्ट्र समेत कई राज्यों का प्रमुख त्योहार है। अब विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय भी इसे बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं। पाकिस्तान में भी कुछ हिंदू परिवार इस त्योहार को अपनी परंपरा के अनुसार मनाते हैं।
कराची में रहने वाले मराठी परिवारों के लिए गणेश उत्सव अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़े रहने का माध्यम है। ऐसे में मुस्लिम कारीगर द्वारा बनाई गई गणपति प्रतिमा इस उत्सव को और खास बना रही है।
कला और संस्कृति की कोई सीमा नहीं
मूर्तिकला एक ऐसी कला है जो मेहनत, कल्पना और भावनाओं से जुड़ी होती है। कलाकार जब कोई प्रतिमा बनाता है तो उसका उद्देश्य अपनी कला को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करना होता है।
कराची के इस मुस्लिम कलाकार ने भी अपनी कला के जरिए धार्मिक सीमाओं से ऊपर उठकर एक सकारात्मक संदेश दिया है। उनकी बनाई गणपति प्रतिमा अब न केवल पूजा का हिस्सा बनेगी बल्कि आपसी सम्मान और भाईचारे की कहानी भी बताएगी।
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