
x
ईरान से भिड़ना पड़ा महंगा
पेंटागन: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव और सैन्य टकरावों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्टों और विशेषज्ञों के आकलन में दावा किया गया है कि ईरान से जुड़े अभियानों और सैन्य गतिविधियों पर अमेरिका को भारी आर्थिक खर्च उठाना पड़ा है। कुछ आकलनों में इस खर्च को नेपाल की कुल अर्थव्यवस्था (GDP) के बराबर बताया गया है। ईरान और अमेरिका के बीच संबंध कई दशकों से तनावपूर्ण रहे हैं। परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव, प्रतिबंध और सैन्य गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच कई बार टकराव की स्थिति बनी है। इन परिस्थितियों में अमेरिका ने मध्य पूर्व क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखने के लिए बड़ी धनराशि खर्च की है।
मध्य पूर्व में सैन्य तैनाती पर बड़ा खर्च
अमेरिका लंबे समय से मध्य पूर्व में अपने सैन्य अड्डों, नौसैनिक तैनाती और सुरक्षा अभियानों पर खर्च करता रहा है। ईरान के प्रभाव को देखते हुए अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपनी सैन्य क्षमता को बनाए रखा। किसी भी देश की सैन्य तैनाती में सिर्फ हथियारों की लागत ही नहीं, बल्कि सैनिकों की तैनाती, रसद, उपकरणों का रखरखाव और खुफिया अभियानों पर भी बड़ा खर्च होता है।
ईरान के साथ तनाव का इतिहास
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की शुरुआत 1979 की ईरानी क्रांति के बाद से बढ़ी। इसके बाद दोनों देशों के संबंध लगातार उतार-चढ़ाव से गुजरते रहे। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका ने कई प्रतिबंध लगाए। वहीं, क्षेत्र में ईरान समर्थित संगठनों और अमेरिकी सहयोगियों के बीच संघर्षों ने भी तनाव बढ़ाया।
सैन्य अभियानों की आर्थिक कीमत
युद्ध या सैन्य अभियानों की लागत अक्सर कई वर्षों तक सामने आती है। इसमें प्रत्यक्ष सैन्य खर्च के साथ-साथ हथियारों की खरीद, सैनिकों की तैनाती और रणनीतिक गतिविधियों पर होने वाला खर्च शामिल होता है। अमेरिका का रक्षा बजट दुनिया के सबसे बड़े रक्षा बजटों में से एक है। मध्य पूर्व में उसकी नीतियों को लेकर देश के अंदर भी समय-समय पर खर्च और रणनीति पर बहस होती रही है।
नेपाल की GDP से तुलना क्यों?
किसी बड़े सैन्य खर्च को समझाने के लिए कई बार उसकी तुलना किसी छोटे देश की अर्थव्यवस्था से की जाती है। नेपाल की GDP की तुलना में बड़ी रकम का उल्लेख इसी संदर्भ में किया गया है, ताकि खर्च के पैमाने को आसानी से समझाया जा सके। किसी भी सैन्य अभियान की वास्तविक कुल लागत अलग-अलग स्रोतों और गणना के तरीकों के आधार पर बदल सकती है। इसमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष खर्च शामिल होने से आंकड़ों में अंतर देखा जाता है।
वैश्विक राजनीति पर असर
अमेरिका-ईरान तनाव का असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रहा है। इसका प्रभाव मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ता है विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य खर्च के साथ-साथ कूटनीतिक प्रयास भी दोनों देशों के संबंधों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Next Story





