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नासा मिशन पर 19,633 करोड़ रुपये खर्ज कर रही है।
दो दिन से भी कम समय बचा है जब 18 फरवरी को अमेरिका द्वारा मंगलग्रह के लिए मिशन मार्स के तहत भेजा रोवर पर्सवरेंस वहीं उतरेगा। नासा मिशन पर 19,633 करोड़ रुपये खर्ज कर रही है।
लक्ष्य है मंगल ग्रह पर अतीत में रह रहे जीवन के निशान तलाशना, वहीं से सैंपल जमा करना और जांच के लिए पृथ्वी पर लाना। लेकिन इस सबसे से पहले कार के आकार के रोवर पर्सवरेंस को मंगल ग्रह की सतह पर उतारना बड़ी चुनौती है। वजह, मंगल पर 40 फीसद मिशन सफल रहे हैं।
अमेरिका ने यह मिशन 30 जुलाई 2020 को रवाना किया था। साढ़े छह महीने बाद इसका रोवर पर्सवरेंस मंगल के क्रेटर जोरीरो पर उतारा जाएगा। अगस्त 2012 में पिछले मिशन में क्यूरोसिटी रोवर को उतारने में अपनाई तकनीक स्काय क्रेन से ही इस बार भी काम लिया जा जा रहा है।
1025 किलो वजनी रोवर मंगल पर जीवन चिह्न तो तलाशेगा ही, अगर उन्हें खोज पाया तो उनका अधिकतम डाटा पृथ्वी पर भेजेगा। इसे वापस लाने के लिए नासा व यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी 2031 सें साझा मिशन भेजेंगे। इन सैंपल की जांच धरती पर गहन जांच हो सकती।
मंगल पर इंसानी कौशल का भव्य प्रदर्शन
मंगल पर रोवर के भीतर रखकर छोटा ड्रोन हेलिकॉप्टर इंजेन्युइटी भी भेजा गया है। इंजेन्युइटी वहीं उड़ानें भरेगा और हवाई सर्वे कर कई जानकारियां जुटाएगा। इंजेन्युइटी मानव तकनीक कौशल का पहला ऐसा उदाहरण होगा जो किसी और ग्रह पर उड़ान भरेगा।
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