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चीन पर आर्थिक निगरानी की तैयारी?
वाशिंगटन: चीन के खिलाफ आर्थिक खुफिया जानकारी जुटाने के लिए अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन की ओर से गुप्त कार्यक्रम तैयार किए जाने की खबर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था में अमेरिकी एजेंट कारोबारियों या निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की पहचान के साथ काम कर सकते हैं। उनकी भूमिका ऐसी होगी, जिसमें अमेरिकी सरकार से उनका संबंध सार्वजनिक तौर पर दिखाई नहीं देगा। हालांकि, पेंटागन ने ऐसी किसी पहल पर काम होने के दावे को खारिज किया है।
योजना से परिचित छह लोगों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, कथित कार्यक्रम अभी शुरुआती तैयारी के चरण में है और इसका संचालन शुरू नहीं हुआ है। इसका उद्देश्य चीन तथा अमेरिका के दूसरे प्रतिस्पर्धियों से संबंधित आर्थिक सूचनाएं जुटाना बताया गया है। इसलिए अमेरिकी एजेंटों के इस कार्यक्रम के तहत चीन में काम शुरू कर देने की बात उपलब्ध जानकारी से स्थापित नहीं होती।
रिपोर्ट में इस पहल की देखरेख टॉम राकुसन के पास होने का दावा किया गया है। वह अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए में लंबे समय तक सेवा दे चुके हैं और फिलहाल उप रक्षा मंत्री स्टीव फाइनबर्ग के वरिष्ठ सलाहकार बताए गए हैं। कथित तैयारी में सैन्य सेवाओं, रक्षा खुफिया व्यवस्था और पूर्व खुफिया अधिकारियों से जुड़े विशेषज्ञों की भागीदारी का भी उल्लेख है।
प्रस्तावित व्यवस्था को ‘नॉनऑफिशियल कवर ऑफिसर्स’ से जोड़ा गया है। सरल शब्दों में इसका अर्थ ऐसे खुफिया अधिकारियों से है, जो सार्वजनिक सरकारी पहचान के बजाय किसी अन्य पेशेवर पहचान के तहत काम करते हैं। रिपोर्ट में कार्यक्रम का संगठनात्मक ढांचा और कानूनी आधार स्पष्ट नहीं बताया गया है। यह भी तय नहीं है कि इसके लिए अलग इकाई बनेगी या मौजूदा क्षमताओं का विस्तार होगा। पेंटागन के उप प्रेस सचिव जैकब ब्लिस ने रिपोर्ट में किए गए दावों को गलत जानकारी पर आधारित बताया है। सीआईए ने टिप्पणी करने से इनकार किया, जबकि राकुसन की प्रतिक्रिया नहीं मिली। इन अलग-अलग प्रतिक्रियाओं के बीच कार्यक्रम को मंजूरी मिल जाने या उसके लागू होने का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। फिलहाल मामला सूत्रों के दावे और रक्षा विभाग के खंडन के बीच है।
रिपोर्ट में ऐसी व्यवस्था से जुड़े जोखिम भी सामने रखे गए हैं। गैरसरकारी पहचान के तहत काम करने वाले अधिकारियों को हिरासत में लिए जाने पर राजनयिक संरक्षण उपलब्ध नहीं होता। बायोमेट्रिक पहचान, डिजिटल रिकॉर्ड और पुराने पेशेवर विवरण किसी छिपी पहचान को बनाए रखने में चुनौती बन सकते हैं। इसके अलावा, रक्षा विभाग और सीआईए की भूमिकाओं तथा निगरानी व्यवस्था से जुड़े सवाल भी बताए गए हैं।
इस घटनाक्रम का व्यापक संदर्भ आर्थिक सुरक्षा है। आर्थिक खुफिया जानकारी का विषय केवल किसी कंपनी के कारोबार या बिक्री तक सीमित नहीं होता। तकनीकी क्षमता, महत्वपूर्ण संसाधनों की उपलब्धता और उत्पादन से जुड़ी निर्भरता भी रणनीतिक फैसलों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, सार्वजनिक आर्थिक आंकड़ों का अध्ययन और छिपी पहचान के जरिए गोपनीय जानकारी हासिल करना अलग गतिविधियां हैं। कथित कार्यक्रम पर चर्चा इसी दूसरे पहलू को लेकर है। कारोबारी पहचान के इस्तेमाल की खबर से यह निष्कर्ष भी नहीं निकलता कि सामान्य अमेरिकी कंपनियां या उनके कर्मचारी किसी खुफिया गतिविधि का हिस्सा हैं। रिपोर्ट एक विशिष्ट, प्रस्तावित सरकारी कार्यक्रम का दावा करती है। किसी वास्तविक कारोबारी, कंपनी या कर्मचारी की भूमिका के बारे में निष्कर्ष के लिए अलग प्रमाण चाहिए। उपलब्ध जानकारी में एजेंटों की निश्चित संख्या, संबंधित कंपनियों या तैनाती के स्थानों का पुष्ट विवरण सामने नहीं है।
ऐसी किसी व्यवस्था का आकलन करते समय उसके उद्देश्य और अधिकार क्षेत्र को समझना महत्वपूर्ण होगा। आर्थिक सूचना जुटाने का लक्ष्य क्या होगा, उससे संबंधित फैसले कौन करेगा और गतिविधियों की जवाबदेही किसके पास होगी—ये अलग सवाल हैं। कार्यक्रम की योजना बनाना, उसे कानूनी स्वीकृति मिलना और उसका परिचालन शुरू होना भी अलग चरण हैं। इन चरणों को एक मान लेने से खबर का अर्थ बदल सकता है। किसी एजेंसी का टिप्पणी न करना अपने आप में दावे की पुष्टि नहीं है। पेंटागन का स्पष्ट खंडन खबर का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उसे कथित योजना के विवरण के साथ पढ़ना जरूरी है। सूत्र आधारित जानकारी किसी संभावित पहल की ओर संकेत दे सकती है, लेकिन उससे उसके बजट, समयसीमा या अंतिम स्वरूप का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
यदि भविष्य में इस तरह की किसी पहल की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो उसका महत्व खुफिया गतिविधियों के साथ आर्थिक नीति के स्तर पर भी होगा। निजी क्षेत्र की पहचान से जुड़े किसी कार्यक्रम में सरकारी उद्देश्य, व्यावसायिक गतिविधि और संबंधित देशों के कानूनों के बीच संबंध स्पष्ट करना आवश्यक होगा। फिलहाल इन पहलुओं पर निश्चित जानकारी उपलब्ध नहीं है। अभी सामने आई खबर का केंद्रीय तथ्य यही है कि चीन के खिलाफ आर्थिक जानकारी जुटाने वाले गुप्त कार्यक्रम की तैयारी का दावा किया गया है और पेंटागन ने उसे नकारा है। एजेंटों की वास्तविक तैनाती अथवा अभियान शुरू होने की पुष्टि नहीं हुई है। आगे के आधिकारिक विवरण से ही इसकी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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