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America : 4 देशों के प्रवासियों को झटका, जानें मामला

Uma Verma
23 March 2025 8:22 AM IST
America : 4 देशों के प्रवासियों को झटका, जानें मामला
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वर्ल्ड | अमेरिका में क्यूबा, हैती, निकारागुआ और वेनेजुएला से आए प्रवासियों के लिए बड़ा झटका लगा है। बाइडेन प्रशासन ने इन देशों के लगभग 5 लाख प्रवासियों का कानूनी दर्जा समाप्त करने का फैसला लिया है। इस फैसले से हजारों लोगों के रोजगार, निवास और भविष्य पर संकट गहरा सकता है।

क्या है मामला?

अमेरिका में इन देशों के प्रवासियों को टेम्पररी प्रोटेक्टेड स्टेटस (TPS) या ह्यूमैनिटेरियन पैरोल के तहत कानूनी दर्जा दिया गया था। इसका मतलब था कि वे अमेरिका में रह सकते थे, काम कर सकते थे और निर्वासन से सुरक्षित थे। लेकिन अब इस नीति को खत्म करने की तैयारी हो रही है, जिससे हजारों प्रवासियों को अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है

किन लोगों पर पड़ेगा असर?

  • क्यूबा, हैती, निकारागुआ और वेनेजुएला के प्रवासी, जो ह्यूमैनिटेरियन पैरोल के तहत अमेरिका में रह रहे थे।

  • उन लोगों पर भी खतरा जो नए शरण आवेदनों की प्रक्रिया में थे।

  • इस फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित वे लोग होंगे जो अमेरिका में स्थायी रोजगार और परिवार बसा चुके हैं

सरकार का पक्ष

बाइडेन प्रशासन का कहना है कि यह फैसला अवैध प्रवास को रोकने और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लिया गया है। सरकार का तर्क है कि TPS और पैरोल प्रोग्राम का गलत इस्तेमाल किया जा रहा था, जिससे प्रवासियों की संख्या लगातार बढ़ रही थी

प्रवासियों की मुश्किलें

  • कानूनी दर्जा रद्द होने से हजारों लोगों को अमेरिका छोड़ने पर मजबूर होना पड़ सकता है

  • रोजगार और शिक्षा पर असर, क्योंकि इन प्रवासियों के वर्क परमिट रद्द हो सकते हैं।

  • निर्वासन के खतरे से मानवाधिकार समूहों में नाराजगी

विरोध और आगे की स्थिति

प्रवासियों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों ने इस फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि यह नीति न केवल अमानवीय है बल्कि हजारों परिवारों को बेघर कर सकती है

  • कानूनी लड़ाई: कई संगठन इस फैसले को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।

  • राजनीतिक विवाद: इस मुद्दे पर डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन नेताओं में टकराव बढ़ सकता है।

क्या होगा आगे?

अमेरिकी प्रशासन आने वाले हफ्तों में इस फैसले को लागू करने की योजना बना रहा है। हालांकि, बढ़ते विरोध और संभावित कानूनी चुनौतियों के चलते इस पर कुछ बदलाव भी हो सकते हैं। लेकिन फिलहाल, हजारों प्रवासियों के लिए यह फैसला चिंता और अनिश्चितता भरा है


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