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AI से अरबों लोगों की मौत हो सकती है: बिल गेट्स

Tara Tandi
28 Sept 2026 11:47 AM IST
AI से अरबों लोगों की मौत हो सकती है: बिल गेट्स
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वॉशिंगटन: माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स ने चेतावनी दी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ऐसी घटनाओं की वजह बन सकता है जिनसे एक अरब लोगों की मौत हो सकती है। वॉशिंगटन में इस बात पर तीखी बहस चल रही है कि क्या सरकारों को एडवांस्ड AI को रेगुलेट करना चाहिए या ऐसे नियमों से बचना चाहिए जो चीन के साथ होड़ में अमेरिका को धीमा कर सकते हैं।
गेट्स ने NBC के प्रोग्राम "मीट द प्रेस" में कहा कि AI पहले की टेक्नोलॉजी से अलग है और आने वाले कुछ सालों में इंसानों से कहीं ज़्यादा इंटेलिजेंट हो सकता है।
गेट्स ने कहा, "यह सच में एक इवोल्यूशनरी (विकासवादी) घटना है। हमने एक इंटेलिजेंट प्रजाति बनाई है जो कई मामलों में हमसे पहले ही ज़्यादा स्मार्ट है, और आने वाले कुछ सालों में तेज़ी से बेहतर होते हुए हमसे बहुत ज़्यादा स्मार्ट हो जाएगी।"
जब उनसे पूछा गया कि क्या AI इंसानों का खात्मा कर सकता है, तो गेट्स ने कहा: "AI निश्चित रूप से इतना पावरफुल है कि ऐसी घटनाओं की वजह बन सकता है जिनसे एक अरब लोगों की मौत हो सकती है।"
उन्होंने आगे कहा, "बुरे इरादे वाले लोगों द्वारा लेटेस्ट AI टूल्स का इस्तेमाल करने जैसा पावरफुल हथियार पहले कभी नहीं देखा गया।"
गेट्स ने कहा कि सरकारों के पास बायोलॉजिकल हमलों, साइबर हमलों और टेक्नोलॉजी के दूसरे संभावित इस्तेमाल से जुड़े खतरनाक स्तरों को समझने के लिए ज़रूरी जानकारी या अनुभव की कमी है। उन्होंने कंपनियों द्वारा अपनी मर्ज़ी से सुरक्षा उपाय अपनाने पर भरोसा करने की बात को खारिज कर दिया।
गेट्स ने कहा, "कोई भी यह नहीं मानता कि सिर्फ़ खुद से नियम बनाना (सेल्फ-रेगुलेशन) काफी है।"
उन्होंने ऐसे कानून की मांग की जिसमें सुरक्षा उपाय और मॉनिटरिंग सिस्टम ज़रूरी हों। उन्होंने कहा कि ऐसी ज़रूरतों से इंडस्ट्री पर कुछ खर्च तो आएगा, लेकिन इससे इसके डेवलपमेंट की रफ़्तार बहुत ज़्यादा धीमी नहीं होगी।
गेट्स ने कहा, "हर AI में ये सुरक्षा उपाय और मॉनिटरिंग क्षमताएं होना ज़रूरी न करना पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना है।"
उनकी यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब कैलिफ़ोर्निया के डेमोक्रेट प्रतिनिधि रो खन्ना - जिनके इलाके में सिलिकॉन वैली का कुछ हिस्सा आता है - ने अमेरिका और चीन के बीच एक ऐसे समझौते की मांग की है जिसे वेरिफाई किया जा सके और जो खुद को स्वतंत्र रूप से बेहतर बनाने में सक्षम AI सिस्टम पर रोक लगाए।
खन्ना ने कहा कि सीनेटर बर्नी सैंडर्स और प्रतिनिधि ग्रेग कैसर के समर्थन वाला कानून तब तक खुद को बेहतर बनाने वाले AI (रिकर्सिव सेल्फ-इम्प्रूविंग AI) पर रोक लगाएगा जब तक कि सुरक्षा उपाय लागू नहीं हो जाते।
खन्ना ने NBC से कहा, "यह असल में ऐसा AI है जिसे अब इंसान ट्रेन नहीं कर रहे हैं। यह ऐसा AI है जो खुद को ट्रेन कर सकता है। और इसमें इंसानी कंट्रोल खोने का असली खतरा है।"
खन्ना ने कहा कि अमेरिका और चीन को टेक्नोलॉजिस्ट का एक वर्किंग ग्रुप बनाना चाहिए और आम प्रतिबंधों पर बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “खुद को बेहतर बनाने वाले AI (सेल्फ़-रिकर्सिव सेल्फ़-इम्प्रूविंग AI) पर रोक लगाना कोई विवादित बात नहीं होनी चाहिए। मेरा मानना ​​है कि अमेरिका एक ऐसी संधि में अगुवाई कर सकता है जिसे लागू किया जा सके और जिसकी जांच भी हो सके। इस संधि के तहत हम खुद को बेहतर बनाने वाले AI पर रोक लगा सकते हैं और इन अत्याधुनिक लैब पर कुछ निगरानी भी रख सकते हैं।”
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बैठक के बाद वॉशिंगटन और बीजिंग 'सुपरइंटेलिजेंस' पर बातचीत शुरू करने के लिए सहमत हुए हैं।
वाल्ट्ज ने CNN को बताया कि इन बातचीत में विशेषज्ञ एक साथ आएंगे और जैविक हथियारों के रिसर्च और परमाणु सिस्टम जैसे क्षेत्रों के लिए सुरक्षा नियमों (गार्डरेल्स) पर चर्चा करेंगे।
वाल्ट्ज ने कहा, “जब इन अत्याधुनिक मॉडल्स की बात आती है, तो अमेरिका और चीन बाकी दुनिया से काफी आगे हैं। मुझे लगता है कि दुनिया को इसे एक सकारात्मक बात के तौर पर देखना चाहिए।”
हालांकि, अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने ऐसे नियमों के खिलाफ चेतावनी दी जो अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को कमजोर कर सकते हैं। उन्होंने ABC को बताया कि मौजूदा आपराधिक और नागरिक कानून पहले से ही अधिकारियों को AI का इस्तेमाल करके अपराध करने वाले व्यक्तियों और कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने की इजाजत देते हैं।
ब्लैंच ने कहा, “इसका समाधान हमेशा और अधिक कानून बनाना नहीं होता है।”
उन्होंने कहा कि समस्याएं आने पर कंपनियां अपने सिस्टम को नियंत्रित या उनमें बदलाव कर सकती हैं। उन्होंने कहा, “इसका समाधान यह नहीं है कि अचानक ऐसे नियम बना दिए जाएं जिनसे हम इस क्षेत्र में दुनिया के लीडर होने के बजाय दूसरे या तीसरे स्थान पर आ जाएं।”
भारत सार्वजनिक सेवाओं, स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शिक्षा और डिजिटल कॉमर्स में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा रहा है। नई दिल्ली ने इस बात पर भी जोर दिया है कि AI गवर्नेंस को सुरक्षा, जवाबदेही और समान पहुंच को बढ़ावा देना चाहिए, साथ ही विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में इनोवेशन को रोकना नहीं चाहिए।
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