विश्व

हिमालयी आपदा के बाद अब बैरियर झील बनी खतरा

Ratna Netam
28 Aug 2026 9:32 PM IST
हिमालयी आपदा के बाद अब बैरियर झील बनी खतरा
x
नेपाल : आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद अब एक और बड़े खतरे ने चिंता बढ़ा दी है। हिमालयी क्षेत्र में बनी एक **प्राकृतिक झील (Barrier Lake)** के फटने की आशंका ने नेपाल और चीन दोनों की चिंता बढ़ा दी है। चीन ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगर यह झील अचानक टूटती है तो निचले इलाकों में फिर से विनाशकारी बाढ़ आ सकती है।
भारी तबाही के बाद राहत और बचाव अभियान अभी जारी ही है, लेकिन अब प्रशासन के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लेशियर टूटने, चट्टानों के खिसकने और मलबे के जमा होने से बनी ऐसी झीलें कभी-कभी अचानक फट जाती हैं, जिससे कुछ ही मिनटों में बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर बह सकता है।
कैसे बना नया खतरा?
नेपाल-चीन सीमा के हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने और भारी मलबा नदी के रास्ते में जमा होने से पानी रुक गया। इस वजह से एक अस्थायी झील बन गई है। ऐसी झीलों को **ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF)** के खतरे से जोड़ा जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब ग्लेशियर या पहाड़ी मलबे से बनी प्राकृतिक दीवार कमजोर पड़ती है तो झील का पानी अचानक बाहर निकल सकता है। इससे नदी का बहाव कई गुना बढ़ जाता है और रास्ते में आने वाले गांव, सड़कें, पुल और अन्य ढांचे प्रभावित हो सकते हैं।
चीन ने क्यों जारी की चेतावनी?
चीन ने नेपाल सीमा के पास बनी झील की स्थिति को लेकर निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों ने आशंका जताई कि लगातार बारिश और पानी का दबाव बढ़ने से प्राकृतिक बांध कमजोर हो सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने अगले कुछ समय को बेहद संवेदनशील बताया है और इलाके में निगरानी, हवाई सर्वेक्षण और तकनीकी जांच शुरू की गई है।
अगर झील फटी तो क्या होगा?
अगर प्राकृतिक झील अचानक टूटती है तो इसका असर बेहद खतरनाक हो सकता है।
संभावित खतरे:
* अचानक तेज बाढ़ आ सकती है
* नदी किनारे बसे गांव प्रभावित हो सकते हैं
* सड़क और पुल बह सकते हैं
* राहत और बचाव अभियान प्रभावित हो सकते हैं
* बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजना पड़ सकता है
पहाड़ी इलाकों में ऐसी बाढ़ ज्यादा खतरनाक होती है क्योंकि पानी बहुत तेजी से नीचे की ओर आता है और लोगों को संभलने का कम समय मिलता है।
नेपाल पहले ही झेल चुका है भारी तबाही
नेपाल में हाल की बाढ़ ने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है। कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ है और बड़ी संख्या में लोग मारे गए या लापता हैं। अब नई झील के खतरे ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है।
राहत टीमें एक ओर जहां प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर नए खतरे पर भी नजर बनाए हुए हैं।
47 ग्लेशियर झीलों पर भी खतरा
वैज्ञानिकों के आकलन में नेपाल और आसपास के हिमालयी क्षेत्रों में कई ग्लेशियर झीलों को संभावित खतरे वाली श्रेणी में रखा गया है। इनमें कुछ झीलें नेपाल में और कुछ तिब्बत क्षेत्र में स्थित हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियरों के पिघलने और मौसम में बदलाव के कारण ऐसी घटनाओं की संभावना बढ़ रही है।
भारत पर भी पड़ सकता है असर
नेपाल से निकलने वाली कई नदियां भारत के मैदानी इलाकों में प्रवेश करती हैं। ऐसे में नेपाल में आने वाली बड़ी जल आपदा का असर सीमावर्ती भारतीय राज्यों पर भी पड़ सकता है।
इसी वजह से हिमालयी क्षेत्रों में होने वाली हर गतिविधि पर भारत भी नजर रखता है। समय रहते चेतावनी और तैयारी से नुकसान को कम किया जा सकता है।
क्या है ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड?
ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF ऐसी अचानक आने वाली बाढ़ होती है, जिसमें ग्लेशियर से बनी झील का पानी प्राकृतिक बांध टूटने के बाद तेजी से बाहर निकलता है।
इसके कारण हो सकते हैं:
* ग्लेशियर टूटना
* भारी बारिश
* भूस्खलन
* बर्फ और चट्टानों का झील में गिरना
* तापमान बढ़ने से बर्फ का तेजी से पिघलना
विशेषज्ञों ने क्यों जताई चिंता?
हिमालय दुनिया के सबसे संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में से एक है। यहां छोटे बदलाव भी बड़े हादसों का कारण बन सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से बचने के लिए:
* लगातार निगरानी जरूरी है
* सैटेलाइट से जांच करनी होगी
* समय पर चेतावनी प्रणाली मजबूत करनी होगी
* नदी किनारे बसे लोगों को जागरूक करना होगा
आगे क्या होगा?
फिलहाल नेपाल और चीन दोनों स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। वैज्ञानिक और बचाव एजेंसियां झील के जलस्तर, मौसम और पहाड़ी स्थिति की लगातार निगरानी कर रही हैं।
नेपाल पहले ही एक बड़ी आपदा से जूझ रहा है और ऐसे में नया खतरा प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। आने वाले घंटे और दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं।
Next Story