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तख्तापलट के बाद नॉर्थ ईस्ट में हालत गंभीर... भारत की सीमा में हजारों लोग घुसे, सुरक्षा अधिकारियों की बढ़ी चिंता

Kunti
10 Jun 2021 6:08 PM GMT
तख्तापलट के बाद नॉर्थ ईस्ट में हालत गंभीर... भारत की सीमा में हजारों लोग घुसे, सुरक्षा अधिकारियों की बढ़ी चिंता
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म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बाद भागे हजारों लोग भारत में दूर-दराज के पूर्वी राज्यों में घुस गए हैं।

नई दिल्ली, म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बाद भागे हजारों लोग भारत में दूर-दराज के पूर्वी राज्यों में घुस गए हैं। जिससे वहां के अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है। क्योंकि भविष्य ये क्षेत्र लोकतंत्र का समर्थन कर रहे लोगों के लिए स्टैगिंग पोस्ट बन सकती है। भारतीय के तीन राज्य- मिजोरम, मणिपुर और नागालैंड मौजूदा वक्त में म्यांमार के करीब 16 हजार लोगों को आश्रय दे रहे हैं। साथ ही आशंका है की, आने वाले वक्त में ये संख्या और बढ़ सकती है। मिजोरम में म्यांमार से आए सबसे ज्यादा लोगों ने शरण मांगी है।

म्यांमार सरकार के एक सलाहकार ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि, हम पूरे मामले की बहुत बारीकी से निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि म्यांमार के कुछ प्रदर्शनकारी पहले भारत में स्थानीय लोगों के समर्थन से सीमा पार से आ गए थे। लेकिन बाद में वो वापस चले गए। नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू की के नेतृत्व वाली सरकार को बेदखल कर फरवरी में हुए सैन्य तख्तापलट के बाद से म्यांमार में अबतक करीब 850 लोग मारे गए हैं।
म्यांमार से लगी भारत की 1600 किलोमीटर लंबी सीमा में भी लंबे समय से देश के शासन का विरोध करने वाले समूह रह रहे हैं। भारतीय सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि वे सीमा के दोनों ओर काम करते हैं और दक्षिण-पूर्व एशिया से लाए गए नशीले पदार्थों से फायदा कमाते हैं।
पूर्वोत्तर राज्यों में इनका आना एक वास्तविक चिंता का विषय
नई दिल्ली में एक वरिष्ठ सरकारी सूत्र ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, 'यह एक वास्तविक चिंता का विषय है कि अगर विद्रोही सीमा पार कर रहे हैं, ये नगा और मणिपुर के विद्रोहियों को ऑक्सीजन देगा।' मिजोरम में, करीब 15 हजार लोग शरण मांग रहे हैं। राज्य के अधिकारियों ने भारत के विदेश मंत्रालय को आठ शरणार्थी शिविर स्थापित करने में मदद के लिए एक पत्र भी लिखा है।
मानवाधिकार कार्यकर्ता बबलू लोइटोंगबाम ने कहा कि, पड़ोसी राज्य मणिपुर में, म्यांमार से आए करीब एक हजार लोगों ने मानसूनी बारिश शुरू होने के बावजूद जंगल के क्षेत्रों में अस्थायी शिविरों में शरण ली हुई है। जिसके चलते सीमावर्ती इलाकों में खाद्य संकट पैदा हो गया है।
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