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जोधपुर।भारत में बने स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस की क्षमता और तकनीक की एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हुई है। जापान के एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स (JASDF) के प्रमुख ने राजस्थान के जोधपुर में तेजस लड़ाकू विमान में उड़ान भरी और इसके प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने भारतीय वायुसेना के साथ बढ़ते रक्षा सहयोग के बीच तेजस को करीब से समझने में रुचि दिखाई।जोधपुर एयरबेस पर जापानी एयरफोर्स चीफ के लिए विशेष उड़ान का आयोजन किया गया। इस दौरान उन्होंने तेजस फाइटर जेट की क्षमताओं को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव किया। उड़ान के बाद उन्होंने विमान की तकनीक, नियंत्रण प्रणाली और प्रदर्शन को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
तेजस में उड़ान का अनुभव
जापानी वायुसेना प्रमुख ने तेजस में उड़ान भरने के बाद इसे एक शानदार अनुभव बताया। उन्होंने भारतीय वायुसेना की क्षमता और स्वदेशी रक्षा उत्पादन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।तेजस भारत का स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान है, जिसे एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने विकसित किया है। यह विमान भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल है और लगातार अपनी क्षमता साबित कर रहा है।
भारत-जापान रक्षा सहयोग को मजबूती
जापानी एयरफोर्स चीफ की तेजस उड़ान को भारत और जापान के बीच बढ़ते रक्षा संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर जोर देते रहे हैं।रक्षा क्षेत्र में भारत लगातार स्वदेशी तकनीक और निर्माण क्षमता को बढ़ावा दे रहा है। वहीं, जापान भी आधुनिक रक्षा तकनीक और रणनीतिक साझेदारी के क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग बढ़ा रहा है।
तेजस की खासियतें
तेजस एक आधुनिक मल्टी-रोल फाइटर विमान है, जिसे हवा से हवा और हवा से जमीन पर हमले जैसी विभिन्न भूमिकाओं के लिए तैयार किया गया है।इस विमान में आधुनिक एवियोनिक्स सिस्टम, डिजिटल फ्लाई-बाय-वायर तकनीक और बेहतर गतिशीलता जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। इसकी हल्की संरचना और तेज गति इसे अलग पहचान देती है।तेजस को भारतीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। यह विमान भारतीय वायुसेना की जरूरतों के अनुसार तैयार किया गया है और इसके कई उन्नत संस्करणों पर भी काम किया जा रहा है।
जोधपुर एयरबेस पर हुआ आयोजन
जोधपुर एयरबेस भारतीय वायुसेना के महत्वपूर्ण ठिकानों में से एक है। यहां से पश्चिमी सीमा की सुरक्षा और विभिन्न सैन्य अभियानों का संचालन किया जाता है।जापानी एयरफोर्स प्रमुख के दौरे के दौरान भारतीय वायुसेना के अधिकारियों ने उन्हें तेजस और अन्य रक्षा क्षमताओं के बारे में जानकारी दी। इस दौरान दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग और प्रशिक्षण से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
स्वदेशी रक्षा निर्माण को बढ़ावा
भारत पिछले कुछ वर्षों से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर दे रहा है। तेजस परियोजना को इसी दिशा में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जाता है।सरकार और रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि स्वदेशी लड़ाकू विमानों के निर्माण से भारत की सैन्य क्षमता बढ़ने के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में तकनीकी विकास को भी गति मिल रही है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती पहचान
तेजस को लेकर कई देशों ने रुचि दिखाई है। इसकी तकनीकी क्षमता और लागत प्रभावी होने के कारण अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार में भी इसकी चर्चा होती रही है।विशेषज्ञों के अनुसार, किसी विदेशी वायुसेना प्रमुख का तेजस में उड़ान भरना भारत के स्वदेशी विमान कार्यक्रम की वैश्विक पहचान को मजबूत करने वाला कदम माना जा सकता है।
भारत की बढ़ती हवाई ताकत
भारतीय वायुसेना लगातार अपने बेड़े को आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रही है। तेजस के अलावा भारत अन्य उन्नत लड़ाकू विमान और रक्षा प्रणालियों को विकसित करने पर भी काम कर रहा है।तेजस परियोजना को भारत की वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग क्षमता का उदाहरण माना जाता है। यह विमान देश की रक्षा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूती देता है।
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