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काबुल/इस्लामाबाद: शनिवार देर रात से अफगानिस्तान की तालिबान सेना ने पाकिस्तान की दुरंड लाइन के सीमा पोस्टों पर जोरदार हमला कर भारी क्षति पहुँचाई। यह हमला पाकिस्तान द्वारा अफगान शहरों, विशेषकर काबुल, पर हवाई हमलों के बाद तालिबान की तीव्र प्रतिक्रिया माना जा रहा है। सीमावर्ती तनाव कुछ दिनों से उच्च स्तर पर था, जिसके कारण कई जगह झड़पें हुईं और सीमा का आवागमन बंद हो गया, जिससे अफगानिस्तान के लिए व्यापार और अन्य परिवहन प्रभावित हुए। इस हफ्ते पाकिस्तान द्वारा काबुल में किए गए हवाई हमलों के बाद यह झड़पें और भी गंभीर हो गईं।
यह हमले अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताक़ी के भारत दौरे के समय हुईं। मुत्ताक़ी और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच हुए द्विपक्षीय कूटनीतिक और व्यापारिक वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बताया गया, जिससे पाकिस्तान नाराज हुआ। भारत ने अफगानिस्तान की ओर से अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करने के लिए भी धन्यवाद किया, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। मुत्ताक़ी ने कहा कि आतंकवाद पाकिस्तान का आंतरिक मामला है, जिससे पाकिस्तान का गुस्सा और बढ़ गया।
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने चेतावनी दी कि पाकिस्तान अपने खिलाफ सक्रिय समूहों के खिलाफ अफगानिस्तान में कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखता है। काबुल ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि अफगान क्षेत्र किसी पड़ोसी देश के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होगा। हाल ही में काबुल में हवाई हमलों की पुष्टि पाकिस्तान ने नहीं की, लेकिन कहा कि ये “कानूनी आतंकवाद विरोधी कार्रवाई” का हिस्सा थे, जो टीटीपी (Tehreek-e-Taliban Pakistan) के ठिकानों को निशाना बनाती हैं। इन हमलों का मकसद टीटीपी के नेता नोऱ वली मेहसूद को खत्म करना बताया गया।
अफगानिस्तान की प्रतिक्रिया के कुछ ही घंटों बाद पूर्व अमेरिकी राजदूत ज़ाल्मय खलीलज़ाद ने सोशल मीडिया पर लिखा: “आज की तीव्र लड़ाई अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के हवाई हमलों के जवाब में शुरू की। इसका उद्देश्य प्रतिशोध और रोकथाम था।” उन्होंने आगे लिखा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान और अपने भीतर बलूच राष्ट्रवादी विद्रोही समूहों के खिलाफ आईएसआईएस का समर्थन किया। तालिबान और पाकिस्तान के बीच बढ़ता संघर्ष दोनों देशों के लिए खतरा बन गया है। पाकिस्तान पहले से ही बलूचिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में विद्रोह, खैबर पख़्तूनख्वा में झड़पें, इस्लामिक कट्टरपंथियों के पुनरुत्थान और आर्थिक संकट जैसी कई समस्याओं से जूझ रहा है।
सामरिक विशेषज्ञों का कहना है कि दुरंड लाइन पर यह हिंसक टकराव पाकिस्तान की आंतरिक अस्थिरता और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती पेश कर रहा है।
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