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Pakistan पाकिस्तान: अफगानिस्तान नीति, जो लंबे समय से भारत के खिलाफ “रणनीतिक गहराई” हासिल करने की सोच पर आधारित थी, अब उलटी पड़ती दिखाई दे रही है। एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के बढ़ते हमलों, अफगान शरणार्थियों के बड़े पैमाने पर पलायन और बढ़ती अंतरराष्ट्रीय आलोचना के कारण यह नीति अब खुले संघर्ष में बदलती जा रही है।
‘वन वर्ल्ड आउटलुक’ की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने तालिबान को समर्थन देकर काबुल में अपने अनुकूल सरकार बनने की उम्मीद की थी, लेकिन यह दांव अब उसके लिए उलटा पड़ गया है। तालिबान की संप्रभुता के दावे और टीटीपी के साथ उसके संबंधों ने दोनों देशों के रिश्तों को और तनावपूर्ण बना दिया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने तालिबान के नेताओं को शरण दी और एक दोस्ताना काबुल सरकार के सहारे आतंकियों को नियंत्रित करने और भारत के प्रभाव को संतुलित करने की उम्मीद की थी। हालांकि 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद स्थिति बदल गई और अफगानिस्तान में मौजूद ठिकानों से टीटीपी के हमले बढ़ने लगे।
2025 तक खैबर पख्तूनख्वा में टीटीपी के हमलों में कई लोग मारे गए और 2026 की शुरुआत में ही नौ जिलों में 37 हमले दर्ज किए गए। रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान ने इन हमलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की, जिससे पाकिस्तान ने दबाव बनाने के लिए सीमा बंद करने जैसे कदम उठाए, जिससे अफगान व्यापार पर असर पड़ा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 22 फरवरी को पाकिस्तान ने नंगरहार और पक्तिका में टीटीपी और आईएसकेपी के सात ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिनमें 80 आतंकियों के मारे जाने का दावा किया गया। हालांकि इन हमलों में 18 नागरिकों, जिनमें बच्चे भी शामिल थे, की मौत से अफगानिस्तान में भारी गुस्सा भड़क गया।
इसके जवाब में 26 फरवरी को अफगानिस्तान ने ड्रोन हमले और सीमा पर झड़पें शुरू कीं। काबुल के अनुसार इन कार्रवाइयों में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और कई चौकियों पर कब्जा कर लिया गया।
इसके बाद पाकिस्तान ने ‘ऑपरेशन ग़ज़ब-लिल-हक़’ शुरू किया, जिसके तहत काबुल, कंधार और पक्तिया में 46 हवाई हमले किए गए और घुदवाना क्षेत्र में लगभग 32 वर्ग किलोमीटर इलाके पर नियंत्रण का दावा किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इसे “खुला युद्ध” करार दिया, जबकि मार्च तक झड़पें जारी रहीं और ड्रोन गिराए जाने तथा करीब 150 तालिबान लड़ाकों के मारे जाने की खबरें सामने आईं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान द्वारा 2023 से शुरू किया गया अफगान शरणार्थियों का निष्कासन अभियान संकट को और बढ़ा रहा है। अब तक 15 लाख से अधिक अफगान शरणार्थियों को देश से निकाला जा चुका
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