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अफगान मेडिकल छात्रों की बढ़ी मुश्किलें पाकिस्तान में पढ़ाई पर लगा नया ब्रेक
Ratna Netam
8 Sept 2026 9:41 PM IST

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इस्लामाबाद। पाकिस्तान सरकार ने विदेशी मेडिकल छात्रों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। शहबाज शरीफ सरकार ने पड़ोसी देश के उन मेडिकल छात्रों से कहा है कि वे पाकिस्तान छोड़कर अपने देश लौट जाएं और अपनी पढ़ाई वहीं जारी रखें। सरकार के इस फैसले के बाद बड़ी संख्या में छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
पाकिस्तान में मेडिकल शिक्षा हासिल कर रहे विदेशी छात्रों के लिए यह फैसला बड़ा झटका माना जा रहा है। कई छात्र वर्षों से पाकिस्तान के मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं और अब उन्हें अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए नए विकल्प तलाशने पड़ सकते हैं।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
पाकिस्तान सरकार का कहना है कि यह कदम सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ क्षेत्रों में विदेशी नागरिकों की मौजूदगी और दस्तावेजों से जुड़े मामलों की समीक्षा की जा रही है।
सरकार ने मेडिकल छात्रों समेत अन्य विदेशी नागरिकों की स्थिति की जांच शुरू की है। जिन छात्रों के दस्तावेज या रहने की अनुमति से जुड़े मामले सामने आए हैं, उन्हें वापस लौटने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
छात्रों के सामने खड़ी हुई मुश्किल
पाकिस्तान में पढ़ाई कर रहे मेडिकल छात्रों का कहना है कि अचानक लिए गए इस फैसले से उनकी शिक्षा प्रभावित हो सकती है।
कई छात्रों ने मेडिकल की पढ़ाई में लाखों रुपये खर्च किए हैं। कुछ छात्र अंतिम वर्ष में हैं, जबकि कुछ की इंटर्नशिप या प्रैक्टिकल ट्रेनिंग चल रही है।
छात्रों की चिंता है कि अगर उन्हें वापस जाना पड़ा तो उनकी पढ़ाई पूरी होने में देरी हो सकती है और करियर पर असर पड़ सकता है।
मेडिकल शिक्षा के लिए जाते हैं विदेशी छात्र
पाकिस्तान के कई मेडिकल कॉलेजों में विदेशी छात्र पढ़ाई करते हैं। इनमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश और अन्य देशों के छात्र भी शामिल हैं।
कम खर्च और मेडिकल सीटों की उपलब्धता के कारण कई छात्र पाकिस्तान का रुख करते हैं। मेडिकल शिक्षा पूरी करने के बाद वे अपने-अपने देशों में जाकर प्रैक्टिस करते हैं।
शहबाज सरकार का सख्त रुख
पाकिस्तान सरकार पिछले कुछ समय से विदेशी नागरिकों को लेकर सख्त नीतियां अपना रही है। अवैध प्रवास और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को देखते हुए सरकार ने कई कदम उठाए हैं।
इसी कड़ी में विदेशी छात्रों और अन्य नागरिकों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है। सरकार का कहना है कि नियमों का पालन करना सभी के लिए जरूरी है।
छात्रों ने मांगी राहत
फैसले के बाद प्रभावित छात्रों ने सरकार से राहत की मांग की है। उनका कहना है कि पढ़ाई के बीच में देश छोड़ने का आदेश उनके भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
छात्रों की मांग है कि जिनके दस्तावेज सही हैं और जो नियमों के अनुसार पढ़ाई कर रहे हैं, उन्हें अपनी शिक्षा पूरी करने का मौका दिया जाए।
कॉलेज प्रशासन की भी बढ़ी चिंता
मेडिकल कॉलेजों के प्रशासन के सामने भी नई चुनौती खड़ी हो गई है। विदेशी छात्रों की संख्या कम होने से कई संस्थानों की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
कॉलेज प्रबंधन सरकार के फैसले को देखते हुए आगे की रणनीति तैयार कर रहे हैं।
सुरक्षा और शिक्षा के बीच संतुलन की चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी देश के लिए सुरक्षा जरूरी है, लेकिन छात्रों की शिक्षा और भविष्य को भी ध्यान में रखना चाहिए।
अचानक लिए गए फैसलों से छात्रों को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की जरूरत है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल सरकार के निर्देश के बाद प्रभावित छात्रों की स्थिति पर नजर बनी हुई है। छात्र संगठनों और कॉलेज प्रशासन की ओर से भी मामले को लेकर बातचीत की जा रही है।
अब यह देखना होगा कि सरकार छात्रों को कोई राहत देती है या फिर उन्हें अपने देश लौटकर ही पढ़ाई जारी रखनी होगी।
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