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अफगान पत्रकार खालिद कादरी को एक साल जेल की सजा सुनाई, IFJ ने की सजा की कड़ी निंदा
Rounak Dey
13 May 2022 6:20 PM IST

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प्रतिबंध और आर्थिक पतन के कारण मीडिया आउटलेट बड़े पैमाने पर बंद हो गए।
तालिबान के सत्ता में आते ही अफगानिस्तान के हालात बेहद खराब है। तालिबान शासन में वहां के पत्रकारों की बुरी हालत है। इंटरनेशनल फेडरेशन आफ जर्नलिस्ट्स (IFJ) ने हेरात के एक अफगान पत्रकार की मनमानी सजा की निंदा की है और तालिबान से पत्रकारों के उत्पीड़न को बंद करने का आग्रह किया है। तालिबान शासन की आलोचना करने वाले अफगान पत्रकार खालिद कादरी पर मुकदमा चलाया गया और उन्हें एक साल जेल की सजा सुनाई गई है।
कवि और स्वतंत्र प्रसारक रेडियो नवरुज के रिपोर्टर कादरी 17 मार्च को हेरात में गिरफ्तारी के बाद से हिरासत में हैं और अप्रैल के मध्य में उन पर मुकदमा चलाया गया था। उन्हें मुकदमे की तारीख से 10 दिन बाद सैन्य अदालत के फैसले के बारे में सूचित किया गया था।
तालिबान इंटेलिजेंस सर्विस इस्तिखबारत ने पत्रकार पर 'विदेशी मीडिया के लिए जासूसी' करने और इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक पर पोस्ट किए गए प्रचार के माध्यम से तालिबान शासन की आलोचना करने का आरोप लगाया है।
कादरी ने अदालत से कहा कि मुझे अपनी गलतियों का एहसास हुआ और मैंने अपने फेसबुक पेज से पोस्ट हटा दिए हैं। उसके पास बचाव पक्ष का वकील नहीं था और उसे फैसले के खिलाफ अपील न करने के लिए सहमत होना पड़ा।
आइएफजे के अनुसार अगस्त 2021 में तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर नियंत्रण करने के बाद से सैन्य अदालत द्वारा मुकदमा चलाने का यह पहला मामला है।
कादरी की जेल की सजा पत्रकारों से संबंधित मानवाधिकारों के उल्लंघन और अफगानिस्तान में मीडिया की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध का ताजा उदाहरण है। अप्रैल 2022 में एक टीवी के प्रस्तोता मोहेब जलीली और राह-ए-फरदा के लिए एक रिपोर्टर रेजा शाहिर को तालिबान इंटेलिजेंस सर्विस द्वारा गिरफ्तार किया गया और प्रताड़ित किया गया था।
तालिबान के अधिग्रहण के बाद से करीब हजार पत्रकारों धमकियों के साथ देश छोड़ा
हालिया दक्षिण एशिया प्रेस स्वतंत्रता रिपोर्ट में IFJ ने मई 2021 से अप्रैल 2022 तक अफगानिस्तान में 12 हत्याओं और 30 गिरफ्तारियों सहित 75 मीडिया अधिकारों के उल्लंघन का दस्तावेजीकरण किया है। तालिबान के अधिग्रहण के बाद से अनुमानित 1000 पत्रकार धमकियों के साथ देश छोड़कर भाग गए हैं। वहीं, प्रतिबंध और आर्थिक पतन के कारण मीडिया आउटलेट बड़े पैमाने पर बंद हो गए।
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