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हमला करेगा अमेरिका
तेहरान/वॉशिंगटन: ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और पश्चिमी देशों की चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। ईरान के नतांज परमाणु परिसर के पास पहाड़ के भीतर बनाई जा रही बेहद सुरक्षित भूमिगत साइट ‘पिकैक्स माउंटेन’ पर 2026 में निर्माण गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। नई सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण में सुरंगों के प्रवेश मार्गों को मजबूत करने, सड़कों को पक्का करने और भूमिगत परिसर के अंदर संभावित निर्माण से जुड़े संकेत दिखाई दिए हैं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से इस साइट पर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी ने सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अमेरिका ईरान की परमाणु सुविधाओं पर एक और बड़ा हमला कर सकता है।
सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज यानी CSIS ने 9 सितंबर को जारी अपने नए विश्लेषण में बताया कि पिकैक्स माउंटेन पर 2026 के दौरान पिछले छह वर्षों की तुलना में सड़कों पर सबसे ज्यादा गतिविधि देखी गई है। विश्लेषण के लिए जुलाई और अगस्त 2026 की हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों के साथ कई वर्षों के रडार और ऑप्टिकल डेटा का इस्तेमाल किया गया।
नतांज से सिर्फ 2 किलोमीटर दूर रहस्यमयी साइट
पिकैक्स माउंटेन को फारसी में ‘कुह-ए कोलांग गज ला’ कहा जाता है। यह ईरान के प्रमुख नतांज यूरेनियम संवर्धन केंद्र से करीब दो किलोमीटर दक्षिण में स्थित एक विशाल भूमिगत सुरंग परिसर है। ईरान ने 2020 में नतांज के पास भूमिगत सेंट्रीफ्यूज असेंबली सुविधा बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद से इस पहाड़ी क्षेत्र में लगातार निर्माण गतिविधियां देखी जाती रही हैं। यह जगह इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका बड़ा हिस्सा पहाड़ और ग्रेनाइट की मोटी परत के नीचे है। इसकी सुरंगों और प्रवेश द्वारों को इस तरह मजबूत किया जा रहा है कि सामान्य हवाई हमले से अंदर मौजूद ढांचे को नुकसान पहुंचाना बेहद मुश्किल हो सकता है।
CSIS के मुताबिक सैटेलाइट तस्वीरों में दक्षिण और पूर्व की ओर स्थित सुरंगों के प्रवेश मार्ग जुलाई 2026 में सितंबर 2025 के मुकाबले ज्यादा मजबूत दिखाई दिए। सड़कों पर कंक्रीट बिछाने और निर्माण के दौरान निकले मलबे को हटाने के संकेत भी मिले हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह साइट खुदाई के चरण से आगे बढ़कर संभावित आंतरिक निर्माण के चरण में पहुंच रही हो सकती है।
क्या अंदर पहुंचाए गए सेंट्रीफ्यूज?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस भूमिगत परिसर के अंदर वास्तव में क्या है। रिपोर्ट के अनुसार इजरायली खुफिया जानकारी में दावा किया गया था कि ईरान ने पिछले साल यूरेनियम संवर्धन में इस्तेमाल होने वाले सेंट्रीफ्यूज और उनके हिस्से पिकैक्स माउंटेन में पहुंचाए थे। हालांकि CSIS ने स्पष्ट किया है कि उपलब्ध सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर इस दावे की पुष्टि या खंडन नहीं किया जा सकता। विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि निर्माण गतिविधियों और साइट पर दिख रहे पैटर्न को देखते हुए फिलहाल यह साबित नहीं होता कि वहां यूरेनियम संवर्धन शुरू हो चुका है।
अमेरिका की नजर क्यों टिकी है?
अमेरिका के लिए पिकैक्स माउंटेन की अहमियत इसकी गहराई और सुरक्षा है। अमेरिका और इजरायल इससे पहले ईरान की कई परमाणु सुविधाओं को निशाना बना चुके हैं। जून 2025 में ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ के दौरान ईरानी परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले किए गए थे। नतांज और इस्फहान सहित कई जगहों को नुकसान पहुंचा था। इसके बाद भी पिकैक्स माउंटेन पर निर्माण जारी रहा। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल में पिकैक्स माउंटेन पर संभावित कार्रवाई का संकेत दिया है। 4 सितंबर को ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस इलाके को जल्द निशाना बना सकता है। ऐसे बयान के बाद इस भूमिगत परिसर पर हो रही गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगरानी और तेज हो गई है।
सबसे ताकतवर बंकर बम के लिए भी चुनौती
पिकैक्स माउंटेन को निशाना बनाना आसान नहीं होगा। यह कोई सामान्य इमारत या सतह पर बना परमाणु संयंत्र नहीं है। पहाड़ और ग्रेनाइट के नीचे बने इसके सुरंग नेटवर्क को नष्ट करने के लिए बेहद सटीक खुफिया जानकारी और शक्तिशाली हथियारों की जरूरत होगी।
CSIS का आकलन है कि अमेरिका के सबसे भारी गैर-परमाणु हथियारों में शामिल GBU-57 Massive Ordnance Penetrator जैसे बंकर-बस्टर बम के लिए भी इस भूमिगत परिसर को पूरी तरह नष्ट करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। सैन्य हमला सुविधा को नुकसान पहुंचा सकता है या अस्थायी रूप से निष्क्रिय कर सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह खत्म करने की गारंटी नहीं होगी।
IAEA को भी नहीं मिला पूरा जवाब
मामले में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। एजेंसी ने पिकैक्स माउंटेन के बारे में ईरान से जानकारी और साइट तक पहुंच मांगी है। CSIS के अनुसार ईरान ने इन अनुरोधों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया है। इसके साथ ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ गया है। 9 सितंबर को IAEA बोर्ड ने ईरान के परमाणु दायित्वों और एजेंसी के साथ सहयोग से जुड़े विवाद को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद तक पहुंचाने के पक्ष में मतदान किया। पश्चिमी देश ईरान से अधिक पारदर्शिता चाहते हैं, जबकि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताता रहा है।
सैटेलाइट तस्वीरों में क्या-क्या बदला?
2020 से 2026 तक के डेटा के अध्ययन में निर्माण को मोटे तौर पर अलग-अलग चरणों में देखा गया है। शुरुआती वर्षों में बड़े पैमाने पर खुदाई और निर्माण हुआ। इसके बाद गतिविधियां कुछ समय अपेक्षाकृत स्थिर रहीं, लेकिन जनवरी 2026 से साइट पर फिर तेज बदलाव दिखाई देने लगे। सड़क नेटवर्क का ज्यादा इस्तेमाल, सुरंगों के प्रवेश मार्गों का सुदृढ़ीकरण, कंक्रीट की नई सतह और खुदाई से निकले मलबे को हटाया जाना प्रमुख संकेत हैं। अगस्त 2026 तक की तस्वीरों में ये बदलाव और स्पष्ट दिखाई दिए। दिलचस्प बात यह है कि विश्लेषकों को इसी अवधि में पुराने नतांज परिसर में वैसी गतिविधि नहीं दिखाई दी जैसी पिकैक्स माउंटेन में दर्ज की गई। इससे निगाहें इस नई भूमिगत सुविधा पर और ज्यादा टिक गई हैं।
क्या अमेरिका सच में फिर हमला करेगा?
इस सवाल का निश्चित जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है। ट्रंप की चेतावनी से सैन्य कार्रवाई की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन किसी संभावित हमले का समय या अंतिम निर्णय सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। अमेरिका के सामने दूसरी समस्या यह भी है कि बार-बार परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला ईरान के परमाणु कार्यक्रम का स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। यदि भूमिगत ठिकानों को नुकसान पहुंचाया भी जाता है तो ईरान दूसरी जगह गतिविधियां स्थानांतरित कर सकता है या क्षतिग्रस्त ढांचे को दोबारा तैयार कर सकता है। CSIS ने भी निष्कर्ष निकाला है कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से स्थायी रूप से रोकने के लिए सत्यापन योग्य कूटनीतिक समाधान ज्यादा टिकाऊ रास्ता होगा।
फिलहाल पिकैक्स माउंटेन पर बढ़ी निर्माण गतिविधियां, IAEA की सीमित पहुंच और अमेरिका की सैन्य चेतावनी—इन तीनों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को फिर दुनिया के सबसे संवेदनशील भू-राजनीतिक मुद्दों में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह इस बात पर निर्भर करेगा कि तेहरान अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण को लेकर क्या रुख अपनाता है और वॉशिंगटन अपनी चेतावनी को कूटनीतिक दबाव तक सीमित रखता है या सैन्य कार्रवाई की ओर बढ़ता है।
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