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New Year 2026: नए साल 2026 का आगाज हुआ, झूमते दिखे लोग, देखें VIDEO

jantaserishta.com
31 Dec 2025 4:44 PM IST
New Year 2026: नए साल 2026 का आगाज हुआ, झूमते दिखे लोग, देखें VIDEO
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2026 के स्वागत में झूमते दिखे लोग.

नई दिल्ली: न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में आतिशबाजी के साथ #NewYear2026 का स्वागत किया गया। दुनिया में नए साल की एंट्री हो गई है। दुनिया के सबसे पूर्वी छोर पर बसे द्वीप देश किरिबाती में रात के 12 बजते ही साल 2026 की शुरुआत हो गई है।

किरिबाती में भारत से 8:30 घंटे पहले नए साल की शुरुआत हो जाती है। ठीक एक घंटे बाद न्यूजीलैंड में भी नए साल ने दस्तक दे दी है। न्यूजीलैंड में भारत से 7:30 घंटे पहले, जबकि अमेरिका में 9:30 घंटे बाद नया साल आता है।
दुनियाभर में अलग-अलग टाइम जोन के कारण 29 देश ऐसे हैं जो भारत से पहले नए साल का स्वागत करते हैं। इनमें किरिबाती, समोआ, टोंगा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, पापुआ न्यू गिनी, म्यांमार, जापान, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, नेपाल शामिल हैं।
पड़ोसी देश हवाई से 24 घंटे का फासला
किरिबाती प्रशांत महासागर में बसा द्वीप है। यह हवाई के दक्षिण में और ऑस्ट्रेलिया के उत्तर-पूर्व में है। यह देश कई एटोल्स से मिलकर बना है। एटोल्स का मतलब होता है गोलाकार प्रवाल भित्तियां (कोरल रीफ)। किरिबाती पूर्व से पश्चिम तक करीब 4,000 किलोमीटर में फैला हुआ है।
किरिबाती को 1979 में ब्रिटेन से आजादी मिली थी। यहां की आबादी 1 लाख 16 हजार है। यहां रहने वाले ज्यादातर लोग ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से समुद्र स्तर बढ़ने के खतरे से जूझ रहे हैं।
किरिबाती के सबसे नजदीक बसा देश हवाई है। इसकी दूरी करीब 2,000 किमी है। यह दिल्ली से काबुल जितनी दूर है। दिलचस्प बात यह है कि हवाई के इतने नजदीक होने के बावजूद किरिबाती वहां से एक दिन पहले नया साल मनाता है।
किरिबाती इंटरनेशनल डेट लाइन के दाएं और हवाई बाएं हैं। किरिबाती का समय ग्रीनविच टाइम से 14 घंटे आगे है, जबकि हवाई का समय ग्रीनविच टाइम से 10 घंटे पीछे। यही वजह है कि किरिबाती में जब 31 दिसंबर की आधी रात होती है, तब हवाई में अभी भी 30 दिसंबर की सुबह होती है।
सबसे पहले जानिए कि यह टाइम जोन क्या है
टाइम जोन धरती को समय के हिसाब से बांटने का एक तरीका है। धरती हर 24 घंटे में 360 डिग्री घूमती है। यानी हर घंटे में 15 डिग्री, जिसे एक टाइम जोन की दूरी माना गया।
इससे पूरी दुनिया में 24 समान दूरी वाले टाइम बने। हर टाइम जोन 15 डिग्री देशांतर का होता है और एक-दूसरे से करीब एक घंटे का फर्क रखता है। इसी वजह से कहीं सुबह होती है तो कहीं रात, और कहीं नया साल पहले आता है तो कहीं बाद में। टाइम जोन ही तय करते हैं कि किस देश में तारीख कब बदलेगी।
टाइम जोन की जरूरत क्यों पड़ी?
घड़ी का आविष्कार 16वीं सदी में हुआ, लेकिन 18वीं सदी तक नया साल सूरज की पोजिशन के मुताबिक सेट किया जाता था। जब सूरज सिर पर होता था, तब समय 12 बजे माना जाता। शुरुआत में अलग-अलग देशों के अलग-अलग समय से कोई परेशानी नहीं थी, लेकिन बाद में रेल से लोग कुछ ही घंटे में एक देश से दूसरे देश पहुंचने लगे।
देशों के अलग-अलग टाइम से लोगों को ट्रेन के समय का हिसाब रखने में दिक्कतें आईं। इसे उदाहरण से समझिए- मान लीजिए 1840 के दशक में ब्रिटेन में अगर कोई व्यक्ति सुबह 8 बजे लंदन से निकला और पश्चिम में लगभग 190 किमी दूर ब्रिस्टल गया। उसकी यात्रा लगभग 5 घंटे की होती।
लंदन के समय के मुताबिक वह 1 बजे ब्रिस्टल पहुंचता, लेकिन ब्रिस्टल का लोकल टाइम लंदन से 10 मिनट पीछे था, इसलिए ब्रिस्टल की घड़ी में 12:50 ही बजते।

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