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चीन में महामुलाकात की तैयारी?
बीजिंग: अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिल सकती है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक ही मंच पर नजर आ सकते हैं। चीन के शेनझेन शहर में 18 और 19 नवंबर 2026 को आयोजित होने वाले एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन के दौरान तीनों नेताओं की संभावित मुलाकात को लेकर बातचीत चल रही है। यदि यह बैठक होती है, तो वैश्विक राजनीति और कूटनीति के लिहाज से इसे एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जाएगा। हालांकि, तीनों नेताओं की संयुक्त बैठक का कार्यक्रम अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है।
चीन के विदेश मंत्रालय ने भी संभावित त्रिपक्षीय बैठक को लेकर बातचीत होने की पुष्टि की है। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने बताया कि चीन इस संबंध में संबंधित पक्षों के संपर्क में है। इसके बाद तीनों नेताओं की संभावित मुलाकात को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अमेरिकी, रूसी और चीनी अधिकारियों के बीच बैठक की रूपरेखा पर विचार-विमर्श की खबरें भी सामने आई हैं।
APEC शिखर सम्मेलन में एशिया-प्रशांत क्षेत्र की 21 अर्थव्यवस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश और विकास को बढ़ावा देना है। हालांकि, जिनपिंग, ट्रंप और पुतिन की संभावित बैठक आर्थिक मुद्दों से आगे बढ़कर वैश्विक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी केंद्रित हो सकती है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध इस संभावित मुलाकात का एक महत्वपूर्ण विषय बन सकता है। अमेरिका और रूस के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं। वहीं, चीन का रूस के साथ रणनीतिक सहयोग बना हुआ है। ऐसे में तीनों नेताओं का एक मंच पर आना अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही चीन और रूस के नेताओं के साथ संयुक्त बातचीत की संभावना के प्रति सकारात्मक रुख व्यक्त कर चुके हैं। उन्होंने परमाणु हथियार नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर तीनों देशों के बीच चर्चा में रुचि दिखाई थी। दूसरी ओर, रूस भी संभावित बैठक को लेकर कूटनीतिक स्तर पर बातचीत कर रहा है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने भी बताया था कि त्रिपक्षीय बैठक आयोजित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, बैठक का स्वरूप, एजेंडा और संभावित नतीजे अभी स्पष्ट नहीं हैं। रूस की ओर से इस मुलाकात को लेकर रुचि दिखाई गई है, लेकिन अंतिम फैसला संबंधित देशों की सहमति पर निर्भर करेगा।
अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक संबंध भी इस सम्मेलन के दौरान चर्चा का प्रमुख विषय रह सकते हैं। दोनों देशों के बीच शुल्क, कृषि उत्पादों की खरीद, दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति और तकनीकी व्यापार जैसे मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। ट्रंप और जिनपिंग की अलग से मुलाकात होने की भी संभावना है, जिसमें आर्थिक सहयोग और व्यापारिक समझौतों पर बातचीत हो सकती है। संभावित त्रिपक्षीय बैठक को लेकर सभी पक्षों के हित पूरी तरह समान नहीं हैं। रूस यूक्रेन युद्ध से संबंधित मुद्दों को प्रमुखता देना चाहता है, जबकि चीन की प्राथमिकताएं अलग हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बैठक होने की स्थिति में भी किसी बड़े समझौते पर पहुंचना आसान नहीं होगा।
जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक-वाल्टर स्टाइनमायर ने भी यूक्रेन युद्ध पर संभावित बातचीत को लेकर चीन के रुख का उल्लेख किया था। उनके अनुसार, जिनपिंग ने इस बात पर जोर दिया कि यूरोप से जुड़े संघर्ष के समाधान में यूरोपीय देशों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। इससे स्पष्ट होता है कि संभावित बैठक के एजेंडे पर सहमति बनाना एक चुनौती हो सकती है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर 18 और 19 नवंबर को शेनझेन में होने वाले APEC शिखर सम्मेलन पर टिकी है। यदि जिनपिंग, ट्रंप और पुतिन एक साथ बैठक करते हैं, तो यह तीनों देशों के संबंधों में एक उल्लेखनीय कूटनीतिक क्षण होगा। हालांकि, किसी ठोस समझौते या वैश्विक विवाद के समाधान की संभावना के बारे में अभी कुछ भी निश्चित कहना जल्दबाजी होगी।
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