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नमाज पढ़ने की बात कहकर उठा को-पायलट, फिर कैप्टन पर हमला; स्मित मच्छर की आपबीती रोंगटे खड़े कर देगी

Shubhra Nandy
18 Oct 2026 8:13 AM IST
नमाज पढ़ने की बात कहकर उठा को-पायलट, फिर कैप्टन पर हमला; स्मित मच्छर की आपबीती रोंगटे खड़े कर देगी
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PM ने भी की बहादुरी की सराहना
दुबई : दुबई से इजरायल के तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में भारतीय पायलट के साथ हुई भयावह घटना ने विमान सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे विमान के कॉकपिट में ओमान के एक को-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर अचानक जानलेवा हमला कर दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद भारतीय पायलट ने हार नहीं मानी और विमान में मौजूद यात्रियों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह घटना 30 सितंबर 2026 को फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में हुई थी। विमान दुबई से तेल अवीव जा रहा था। घटना के बाद कैप्टन स्मित मच्छर ने साक्षात्कार में उस भयावह मंजर को याद किया, जब उन्हें लगा था कि शायद वह जीवित नहीं बच पाएंगे।
नमाज पढ़ने की बात कहकर पीछे खड़ा हुआ को-पायलट
कैप्टन स्मित मच्छर के अनुसार, उड़ान के दौरान शुरुआत में सब कुछ सामान्य था। विमान अपने निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ रहा था और कॉकपिट में कोई असामान्य गतिविधि नहीं थी। उड़ान के करीब दो घंटे बाद एक अतिरिक्त कैप्टन कॉकपिट में आए थे। इसी बीच ओमानी को-पायलट शौचालय से वापस लौटा और कुछ देर बातचीत करने के बाद उसने नमाज पढ़ने की इच्छा जताई। भारतीय कैप्टन को इस पर कोई संदेह नहीं हुआ। उनके अनुसार, विमान संचालन की अनुमति और निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रार्थना के लिए समय लेना कोई असामान्य बात नहीं थी। वह पहली बार उस को-पायलट के साथ उड़ान भर रहे थे। हालांकि, उन्हें अंदाजा नहीं था कि अगले कुछ मिनटों में उनकी जिंदगी खतरे में पड़ने वाली है।
अचानक सिर पर हुआ जोरदार हमला
कैप्टन मच्छर ने बताया कि वह अपनी सीट पर बैठकर विमान की स्क्रीन पर लैंडिंग का समय और ईंधन की मात्रा जांच रहे थे। इसी दौरान को-पायलट उनके पीछे मौजूद था। अचानक उनके सिर के पिछले हिस्से पर जोरदार प्रहार हुआ। पहला झटका लगते ही उन्हें लगा कि विमान की छत का कोई हिस्सा टूटकर उनके सिर पर गिर गया है। लेकिन कुछ ही क्षणों में दोबारा हमला हुआ। लगातार प्रहार होने पर उन्हें समझ आ गया कि विमान में तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि उनके पीछे खड़ा व्यक्ति ही उन पर हमला कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, हमलावर ने आपातकालीन कुल्हाड़ी का इस्तेमाल किया था। हमले में भारतीय कैप्टन के सिर और हाथों में गंभीर चोटें आईं।
सीट बेल्ट खोलकर बचने की कोशिश, बार-बार खो रहे थे होश
हमले के बाद कैप्टन मच्छर ने किसी तरह अपनी सीट बेल्ट खोली और खुद को बचाने की कोशिश की। लेकिन सिर पर गंभीर चोट लगने के कारण उन्हें ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था। उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलकर दूसरे कैप्टन को वापस बुलाने की कोशिश की। इसी बीच वह बेहोश हो गए। होश आने पर उन्होंने फिर उठने का प्रयास किया। उन्हें महसूस हुआ कि विमान तेजी से नीचे की ओर जा रहा है। इस दौरान वह कई बार होश खो बैठे। कैप्टन के अनुसार, उनकी यादों में घटना के कई हिस्से धुंधले हैं। उन्हें इतना याद है कि वह किसी तरह कॉकपिट के दरवाजे तक पहुंचे और सहायता के लिए रास्ता खोलने का प्रयास किया।
तेजी से नीचे गिरने लगा विमान
हमले के दौरान विमान की स्थिति बेहद खतरनाक हो गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, विमान लगभग 30 सेकंड में करीब 14 हजार फीट नीचे आ गया था। इससे विमान में सवार यात्रियों की जान पर गंभीर संकट पैदा हो गया। लेकिन घायल भारतीय कैप्टन की कोशिशों के कारण कॉकपिट का दरवाजा खुल सका। इसके बाद विमान में मौजूद अन्य लोगों और चालक दल के सदस्यों ने हमलावर को काबू में किया। अतिरिक्त पायलटों ने विमान को संभाला और उसे सऊदी अरब के तबूक हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतारा। इस घटना में विमान में सवार 174 यात्रियों की जान बच गई।
'तुम इस तरह नहीं मर सकते', खुद को दिया हौसला
अस्पताल में उपचार के दौरान कैप्टन मच्छर ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि हमले के दौरान एक समय उन्हें लगा था कि अब बचना मुश्किल है। लेकिन उन्होंने खुद से कहा कि वह इस तरह अपनी जिंदगी खत्म नहीं होने दे सकते। इसी सोच ने उन्हें गंभीर चोटों और असहनीय दर्द के बीच संघर्ष करने की ताकत दी।उन्होंने बताया कि वह केवल अपनी जान के लिए नहीं लड़ रहे थे, बल्कि उन्हें विमान में बैठे यात्रियों की सुरक्षा की भी चिंता थी।
सबसे पहले याद आया दो साल का बेटा
इस भयावह घटना का सबसे भावुक पहलू उस समय सामने आया, जब कैप्टन मच्छर से पूछा गया कि हमले के दौरान उन्हें सबसे पहले किसकी याद आई। उन्होंने बताया कि उस मुश्किल समय में उन्हें अपने दो साल के बेटे की याद आई थी। अपने बेटे और परिवार का जिक्र करते हुए वह भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उस समय जीवित रहने की इच्छा ही उन्हें लगातार संघर्ष करने की हिम्मत दे रही थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी की बहादुरी की सराहना
भारतीय पायलट के साहस की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अस्पताल में भर्ती कैप्टन स्मित मच्छर से वीडियो कॉल पर बातचीत की और उनके साहस की प्रशंसा की। प्रधानमंत्री ने कठिन परिस्थितियों में सूझबूझ दिखाने और यात्रियों की जान बचाने के प्रयासों को सराहा। कैप्टन ने भी बताया कि किस तरह उन्होंने घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की थी।
को-पायलट के हमले की जांच जारी
घटना के बाद आरोपी ओमानी को-पायलट के खिलाफ जांच शुरू की गई। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हमले की योजना कैसे बनाई गई और विमान संचालन की सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय विमानन क्षेत्र में पायलटों की सुरक्षा, कॉकपिट में प्रवेश और क्रू सदस्यों की पृष्ठभूमि की जांच को लेकर नई बहस छेड़ दी है। भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी ने एक संभावित बड़ी विमान दुर्घटना को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उनका संघर्ष विमान में मौजूद लोगों की जान बचाने के लिए निर्णायक साबित हुआ।
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