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96 साल की महिला पर 11 हजार लोगों की हत्या का मुकदमा, जानें क्यों?

Neha Dani
30 Oct 2021 2:16 AM GMT
96 साल की महिला पर 11 हजार लोगों की हत्या का मुकदमा, जानें क्यों?
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यह जर्मनी की सीमा के बाहर स्थापित होने वाला पहला यातना शिविर था।

जर्मनी में 96 साल की एक महिला पर 11 हजार लोगों की हत्या का मुकदमा चल रहा है। आरोप है कि इर्मगार्ड फुरचनर नाम की यह महिला द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अडोल्फ हिटलर की नाजी सेना में शामिल थी। यह महिला उस समय नाजियों के एक यातना गृह में सचिव के रूप में काम करती थी। जहां इस महिला ने 11 हजार यहूदियों की हत्या में सक्रिय रूप से भूमिका निभाई थी। अभी इस महिला की सजा को लेकर कोई ऐलान नहीं हुआ है। जर्मनी की गोपनीयता कानून के तहत इस महिला की वास्तविक पहचान को छिपाकर इर्मगार्ड फुरचनर के नाम से संबोधित किया गया है।

95 साल की महिला को किशोर अदालत सुनाएगी सजा
अपराध के समय इस महिला की उम्र 21 साल के कम थी। इसलिए, जर्मनी के कानून के हिसाब से इस महिला को सजा के लिए किशोर अदालत में पेश किया जाएगा। जिसके बाद इसके वीभत्स जुर्म को लेकर सजा का ऐलान होगा। बता दें कि, जर्मनी में 21 साल के कम उम्र के नागरिकों को अपराध के लिए किशोर अदालत सजा सुनाती है।
स्तुथोफ कैंप के कमांडर की सचिव थी यह महिला
यह महिला जून 1943 से अप्रैल 1945 के बीच पोलैंड के शहर ग्दान्स्क से 20 मील की दूरी पर स्थित स्तुथोफ कैंप के कमांडर की सचिव के रूप में काम करती थी। अभियोजकों ने कहा कि महिला ने स्वीकार किया था कि उसके कैंप में बहुत से पत्राचार और कई फाइलें ऐसी थीं जिसमें उसे कैदियों की कुछ हत्याओं के बारे में बहुत कुछ पता था। हालांकि, उसने इस जानकारी से इनकार किया था कि उस समय हजारों लोगों को गैस चेंबर में मारा गया था।
पिछले साल भी 93 साल के एक व्यक्ति को सुनाई गई थी सजा
पिछले साल, 93 वर्षीय एक व्यक्ति को हैम्बर्ग के एक किशोर न्यायालय में 5,230 हत्याओं के लिए दोषी ठहराया गया था। वह भी स्तुथोफ कैंप में 17 साल की उम्र में गार्ड का काम करता था। माना जाता है कि 60,000 से अधिक लोग स्तुथोफ कैंप में नाजियों के हाथों मारे गए थे। यह जर्मनी की सीमा के बाहर स्थापित होने वाला पहला यातना शिविर था।

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