विश्व

पाकिस्तान की जेलों में 73प्रतिशत कैदी विचाराधीन HRCP रिपोर्ट में खुलासा

Ratna Netam
7 Oct 2026 2:44 PM IST
पाकिस्तान की जेलों में 73प्रतिशत  कैदी विचाराधीन HRCP रिपोर्ट में खुलासा
x
इस्लामाबाद। पाकिस्तान की जेल व्यवस्था और आपराधिक न्याय प्रणाली को लेकर मानवाधिकार आयोग (HRCP) की एक नई रिपोर्ट में गंभीर स्थिति सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश की जेलों में बंद लगभग हर चार में से तीन कैदी ऐसे हैं, जिन्हें किसी अपराध में अभी दोषी नहीं ठहराया गया है। यानी वे विचाराधीन कैदी हैं और उनके मामलों में अदालतों का अंतिम फैसला आना बाकी है।HRCP की ओर से जारी पॉलिसी पेपर **‘बियॉन्ड द प्रिजन वॉल: रिड्यूसिंग ओवरक्राउडिंग इन पाकिस्तान्स प्रिजन्स’** में कहा गया है कि वर्ष 2024 में पाकिस्तान की जेलों में कुल कैदियों में से **73.41 प्रतिशत विचाराधीन कैदी** थे। यह स्थिति देश की आपराधिक न्याय व्यवस्था पर बढ़ते दबाव और मुकदमों के लंबे समय तक लंबित रहने की समस्या को दर्शाती है। HRCP ने जेलों में भीड़भाड़ को केवल जेल भवनों की कमी नहीं, बल्कि न्याय प्रणाली की गहरी खामियों का संकेत बताया है।रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017 में पाकिस्तान की जेलों में विचाराधीन कैदियों की हिस्सेदारी करीब 66 प्रतिशत थी। 2024 तक यह आंकड़ा बढ़कर 73.41 प्रतिशत हो गया। यानी सात वर्षों में बिना अंतिम दोषसिद्धि के जेल में बंद लोगों का अनुपात और बढ़ा है। HRCP के मुताबिक, यह स्थिति जमानत व्यवस्था, लंबी अदालती प्रक्रिया और मुकदमों के निपटारे में देरी जैसे मुद्दों की ओर इशारा करती है।
पाकिस्तान की जेलों में भीड़भाड़ भी रिपोर्ट का एक प्रमुख मुद्दा है। जुलाई और अगस्त 2024 के दौरान देश की जेलों में कैदियों की संख्या उनकी आधिकारिक स्वीकृत क्षमता के औसतन करीब **152 प्रतिशत** तक पहुंच गई थी। इसका मतलब यह है कि 100 कैदियों के लिए बनी जगह में औसतन 152 कैदी रखे जा रहे थे। HRCP ने कहा कि ऐसी स्थिति कैदियों के बुनियादी अधिकारों, स्वास्थ्य और सुरक्षा पर गंभीर असर डाल सकती है।रिपोर्ट में कहा गया है कि अत्यधिक भीड़ के कारण जेलों में साफ-सफाई, स्वास्थ्य सेवाओं और रहने की स्थितियों पर दबाव बढ़ता है। संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ सकता है और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी गंभीर हो सकती हैं। इसके अलावा जेलों में हिंसा और कैदियों के पुनर्वास के अवसरों में कमी जैसी समस्याएं भी पैदा होती हैं।
HRCP ने यह भी स्पष्ट किया है कि नई जेलें बनाना अकेले इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। आयोग का कहना है कि जेलों में भीड़ बढ़ने के वास्तविक कारण आपराधिक न्याय व्यवस्था के भीतर मौजूद हैं। इनमें जमानत मिलने में कठिनाई, मुकदमे से पहले लंबे समय तक हिरासत, अदालतों में मामलों का देर से निपटारा, प्रोबेशन और पैरोल जैसे विकल्पों का सीमित इस्तेमाल तथा छोटे अपराधों में भी कैद की सजा का ज्यादा उपयोग शामिल है।रिपोर्ट में जमानत व्यवस्था में सुधार पर खास जोर दिया गया है। HRCP के अनुसार, संविधान में निर्दोष माने जाने के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए जमानत को सामान्य नियम के रूप में देखा जाना चाहिए और हिरासत को अपवाद बनाना चाहिए। पुलिस और अभियोजन पक्ष पर यह साबित करने की जिम्मेदारी होनी चाहिए कि किसी व्यक्ति को मुकदमे से पहले हिरासत में रखना क्यों जरूरी है।
आयोग ने अदालतों से भी रिमांड की शक्तियों का सावधानीपूर्वक इस्तेमाल करने और हिरासत के कारणों को स्पष्ट रूप से दर्ज करने की मांग की है। रिपोर्ट का कहना है कि जिन मामलों में कानूनी समयसीमा के भीतर मुकदमा पूरा नहीं होता, वहां जमानत के प्रावधानों का प्रभावी इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इससे विचाराधीन कैदियों की संख्या कम करने में मदद मिल सकती है।HRCP ने स्वतंत्र अभियोजन व्यवस्था को मजबूत करने, छोटे मामलों को वैकल्पिक कानूनी प्रक्रिया के जरिए निपटाने और प्रोबेशन तथा पैरोल की व्यवस्था को अधिक सुलभ बनाने की भी सिफारिश की है। आयोग का कहना है कि हर मामले में जेल भेजने की बजाय ऐसे विकल्प विकसित किए जाने चाहिए, जिनसे कम गंभीर अपराधों में आरोपी व्यक्ति को समाज से पूरी तरह अलग किए बिना न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जा सके।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि पाकिस्तान की न्यायपालिका पहले से ही भारी लंबित मामलों के बोझ का सामना कर रही है। HRCP की 2024 की मानवाधिकार स्थिति संबंधी रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में करीब 24 लाख मामले लंबित थे। ऐसे में अदालतों पर बढ़ते बोझ का असर जेल व्यवस्था पर भी दिखाई देता है, क्योंकि बड़ी संख्या में विचाराधीन कैदी लंबे समय तक फैसले का इंतजार करते रहते हैं।HRCP का मानना है कि पाकिस्तान की जेलों में भीड़भाड़ कम करने के लिए व्यापक सुधार जरूरी हैं। आयोग ने ऐसी व्यवस्था की वकालत की है, जिसमें जेल भेजने के बजाय स्वतंत्रता, पुनर्वास और वैकल्पिक सजा के विकल्पों को प्राथमिकता मिले।
रिपोर्ट के आंकड़ों ने पाकिस्तान की आपराधिक न्याय व्यवस्था के सामने मौजूद एक बड़ी चुनौती को उजागर किया है। करीब 73.41 प्रतिशत कैदियों का विचाराधीन होना यह दिखाता है कि बड़ी संख्या में लोग अंतिम दोषसिद्धि से पहले ही लंबे समय तक जेल में हैं। HRCP ने चेतावनी दी है कि यदि जमानत, मुकदमों की गति, पैरोल और वैकल्पिक दंड व्यवस्था में सुधार नहीं किए गए तो केवल जेलों की क्षमता बढ़ाने से भीड़भाड़ की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकेगा।
Next Story