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अमेरिका में 28 ग्रीन कार्ड धारकों पर चुनावी धोखाधड़ी का आरोप, दो भारतीय शामिल

nidhi
20 Oct 2026 6:37 AM IST
अमेरिका में 28 ग्रीन कार्ड धारकों पर चुनावी धोखाधड़ी का आरोप, दो भारतीय शामिल
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अमेरिकी चुनाव में अवैध मतदान के आरोप
वॉशिंगटन: अमेरिका के कैलिफोर्निया में चुनाव से जुड़े कथित अपराधों को लेकर 28 ग्रीन कार्ड धारकों के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं। इनमें दो भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। अमेरिकी न्याय विभाग ने सोमवार, 19 अक्टूबर को कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि संघीय अधिकारियों ने राज्य में 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपों में गलत जानकारी देकर मतदाता पंजीकरण कराना, अमेरिकी नागरिकता का झूठा दावा करना और पात्रता के बिना मतदान करना शामिल है। सभी आरोपियों को अभी अदालत में दोषी साबित किया जाना बाकी है।
दो भारतीय नागरिकों के नाम सामने आए
न्याय विभाग की ओर से जारी विवरण के अनुसार, आरोपियों में 30 वर्षीय अमनदीप कौर और 67 वर्षीय कमलेश नवनितलाल शाह शामिल हैं। अमनदीप कौर कैलिफोर्निया के रैंचो पालोस वर्डेस में रहती हैं, जबकि कमलेश शाह सैक्रामेंटो के निवासी हैं। दोनों के खिलाफ लगाए गए आरोप मतदाता पंजीकरण और नवंबर 2024 के अमेरिकी चुनाव में कथित मतदान से संबंधित हैं। अधिकारियों का आरोप है कि अमेरिकी नागरिक नहीं होने के बावजूद दोनों ने चुनाव प्रक्रिया में मतदाता के रूप में भाग लिया। हालांकि, इनके खिलाफ मामला दर्ज होने का अर्थ दोषसिद्धि नहीं है। आरोपों की सत्यता और संबंधित साक्ष्यों का परीक्षण न्यायिक प्रक्रिया में होगा।
अमनदीप कौर पर क्या आरोप हैं?
संघीय अधिकारियों के मुताबिक, अमनदीप कौर ने दिसंबर 2022 में कथित रूप से गलत तरीके से मतदाता पंजीकरण कराया था। इसके बाद उन्होंने नवंबर 2024 के अमेरिकी चुनाव में मतदान किया। न्याय विभाग ने बताया कि कौर अमेरिकी नागरिकता हासिल करने की प्रक्रिया में भी हैं। कौर का मामला कैलिफोर्निया के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट से जुड़ी कार्रवाई में शामिल है। विभाग के विवरण में इस क्षेत्र के आरोपियों के खिलाफ नागरिकता आवेदन में गलत बयान देने जैसे गंभीर आरोपों का भी उल्लेख है। प्रत्येक आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप उसके संबंधित मामले और दस्तावेजों पर आधारित हैं।
सैक्रामेंटो निवासी कमलेश नवनितलाल शाह के मामले में अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि उन्होंने नवंबर 2024 के आम चुनाव वाले दिन कथित रूप से गलत तरीके से मतदाता पंजीकरण कराया। आरोप है कि शाह ने उसी दिन मतदान भी किया। शाह के खिलाफ आरोप औपचारिक अभियोजन दस्तावेज के जरिए प्रस्तुत किए गए हैं। उपलब्ध सरकारी विवरण में उनके मामले को कैलिफोर्निया के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट के अंतर्गत रखा गया है। इस तरह दोनों भारतीय नागरिकों के मामले राज्य के अलग-अलग संघीय न्यायिक क्षेत्रों से जुड़े हैं।
‘ऑपरेशन प्रोटेक्ट द वोट’ के तहत कार्रवाई
यह अभियान ‘ऑपरेशन प्रोटेक्ट द वोट’ के तहत चलाया गया है। इसमें कैलिफोर्निया स्थित सभी चार संघीय अभियोजक कार्यालयों ने समन्वय किया। न्याय विभाग का कहना है कि अभियान का उद्देश्य चुनाव संबंधी धोखाधड़ी के मामलों की पहचान करना और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता की रक्षा करना है। यहां आरोपियों और गिरफ्तार लोगों की संख्या में अंतर समझना जरूरी है। विभाग ने कुल 28 लोगों के खिलाफ आरोपों की जानकारी दी है, जबकि सोमवार की कार्रवाई में 11 लोगों की गिरफ्तारी बताई गई है। इसलिए सभी 28 आरोपियों को उसी दिन गिरफ्तार किए जाने का दावा सही नहीं होगा।
ग्रीन कार्ड और मतदान की पात्रता अलग
न्याय विभाग के अनुसार, सभी 28 आरोपी अमेरिका के वैध स्थायी निवासी हैं। इस दर्जे को सामान्य तौर पर ग्रीन कार्ड धारक कहा जाता है। ऐसे में इन्हें केवल इस मामले के आधार पर अवैध प्रवासी बताना भी गलत होगा अमेरिका में वैध रूप से रहने की अनुमति और संघीय चुनाव में मतदान की पात्रता अलग विषय हैं। ग्रीन कार्ड अपने आप अमेरिकी नागरिकता नहीं देता। इस मामले में अभियोजन का आरोप यही है कि संबंधित लोगों ने नागरिकता की आवश्यक पात्रता के बिना पंजीकरण कराया या मतदान किया।
कार्रवाई के बीच राजनीतिक विवाद भी
इस कार्रवाई के साथ कैलिफोर्निया में मतदाता सूचियों को लेकर संघीय सरकार और राज्य प्रशासन के बीच विवाद भी जारी है। संघीय अधिकारियों ने चुनावी रिकॉर्ड और कथित गैरनागरिक मतदाताओं के मुद्दे पर राज्य के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
दूसरी ओर, कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने राज्य में व्यापक चुनावी धोखाधड़ी होने के दावे को खारिज किया है। उनका कहना है कि छिटपुट मामलों को पूरे चुनाव तंत्र में बड़े पैमाने की गड़बड़ी का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इस कारण व्यक्तिगत आपराधिक मामलों और व्यापक चुनावी धोखाधड़ी के दावों के बीच अंतर बना हुआ है। फिलहाल दोनों भारतीय नागरिकों समेत सभी आरोपियों के मामले न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। किसी आरोपी की जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण संबंधित साक्ष्यों और अदालत के फैसले से होगा। इन आरोपों के आधार पर चुनाव परिणाम प्रभावित होने या किसी बड़े संगठित षड्यंत्र का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
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