
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की नई टैरिफ नीति को लेकर विवाद बढ़ गया है। एक कोर्ट डॉक्यूमेंट के अनुसार, अमेरिका के 25 राज्यों के एक समूह ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। राज्यों का आरोप है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने 60 ट्रेडिंग पार्टनर देशों से आने वाले सामान पर बड़े पैमाने पर नए टैरिफ लगाकर अपने कानूनी अधिकारों का उल्लंघन किया है।
यह मामला US Court of International Trade में दायर किया गया है। शिकायत में हाल ही में लागू किए गए उन नए आयात शुल्कों को चुनौती दी गई है, जिनके तहत प्रभावित देशों से आने वाले अधिकांश सामान पर 10 प्रतिशत या 12.5 प्रतिशत तक का टैक्स लगाया गया है।
मुकदमा दायर करने वाले राज्यों का कहना है कि इन टैरिफ का असर अमेरिकी व्यापार व्यवस्था और उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। राज्यों के अनुसार, जिन देशों से आयात पर ये शुल्क लगाए गए हैं, वे अमेरिका के कुल आयात का लगभग 99.4 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। ऐसे में इसका प्रभाव व्यापक स्तर पर देखने को मिल सकता है।
कोर्ट में दायर याचिका में राज्यों ने तर्क दिया है कि राष्ट्रपति प्रशासन ने टैरिफ लगाने के लिए जिन शक्तियों का इस्तेमाल किया, वे कानूनी सीमाओं से बाहर हैं। राज्यों का कहना है कि व्यापार नीतियों में इतने बड़े बदलाव के लिए उचित कानूनी प्रक्रिया और कांग्रेस की भूमिका जरूरी है।
याचिका में अदालत से मांग की गई है कि नए टैरिफ को लागू होने से रोका जाए और उन्हें गैर-कानूनी घोषित किया जाए। इसके अलावा राज्यों ने पहले ही चुकाए गए अतिरिक्त टैक्स की राशि वापस करने का आदेश देने की भी मांग की है।
ट्रंप प्रशासन ने अपने कार्यकाल में व्यापार घाटे को कम करने और अमेरिकी उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई देशों पर टैरिफ लगाने की नीति अपनाई है। प्रशासन का तर्क रहा है कि विदेशी सामान पर शुल्क बढ़ाने से घरेलू उत्पादन को मजबूती मिलेगी और अमेरिकी कंपनियों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा।
हालांकि, आलोचकों का कहना है कि ऊंचे टैरिफ से आयातित वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका असर अमेरिकी उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर पड़ सकता है। इसी वजह से कई राज्य और व्यापारिक संगठन इन नीतियों को लेकर चिंता जता चुके हैं।
मुकदमा दायर करने वाले राज्यों का कहना है कि नए टैरिफ से राज्य सरकारों, स्थानीय अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। उनका दावा है कि व्यापार नीतियों में अचानक बदलाव से बाजार में अनिश्चितता पैदा होती है और इसका असर कई क्षेत्रों पर पड़ता है।
शिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यों का यह समूह अदालत से टैरिफ को रोकने और उन्हें रद्द करने की मांग कर रहा है। यदि अदालत राज्यों के पक्ष में फैसला देती है, तो इससे ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका की व्यापार नीति को लेकर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है। टैरिफ को लेकर अमेरिका और उसके कई व्यापारिक साझेदार देशों के बीच पहले भी मतभेद सामने आते रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार, टैरिफ संबंधी फैसले अक्सर व्यापक आर्थिक प्रभाव डालते हैं। एक ओर जहां सरकारें इन्हें घरेलू उद्योगों की सुरक्षा के लिए उपयोग करती हैं, वहीं दूसरी ओर इनसे व्यापारिक संबंधों और कीमतों पर असर पड़ सकता है।
अब इस मामले में अदालत की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। US Court of International Trade यह तय करेगा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए नए टैरिफ कानूनी अधिकारों के दायरे में आते हैं या नहीं।
फिलहाल, 25 राज्यों की ओर से दायर इस मुकदमे ने अमेरिका की व्यापार नीति को लेकर नई कानूनी और राजनीतिक बहस शुरू कर दी है। आने वाले समय में अदालत की सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि इन टैरिफ का भविष्य क्या होगा और क्या प्रशासन को अपनी नीति में बदलाव करना पड़ेगा।





