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अमेरिका के 22 राज्यों ने 1,00,000 डॉलर की H-1B फ़ीस का विरोध किया

Tara Tandi
26 Sept 2026 1:14 PM IST
अमेरिका के 22 राज्यों ने 1,00,000 डॉलर की H-1B फ़ीस का विरोध किया
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वॉशिंगटन: अमेरिका के 22 अटॉर्नी जनरल के एक ग्रुप ने ट्रंप प्रशासन के उस प्रस्ताव का विरोध किया है जिसमें कुछ H-1B वीज़ा याचिकाओं पर $100,000 से ज़्यादा फ़ीस लगाने की बात कही गई है। उनका तर्क है कि यह कदम गैर-कानूनी है और इससे टीचर, डॉक्टर और नर्सों की कमी और बढ़ जाएगी।
यह चुनौती उन भारतीय पेशेवरों और अमेरिकी कंपनियों के लिए अहम है जो बहुत ज़्यादा कुशल कर्मचारियों को काम पर रखने के लिए H-1B प्रोग्राम पर निर्भर हैं।
वर्जीनिया के अटॉर्नी जनरल जे जोन्स भी इस ग्रुप में शामिल हो गए हैं। उन्होंने US सिटिज़नशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज़ (USCIS) को एक औपचारिक पत्र लिखकर प्रस्तावित नियम को वापस लेने की मांग की है।
एजेंसी ने 25 अगस्त को प्रस्तावित नियम बनाने का नोटिस जारी किया था। इसके तहत उन एम्प्लॉयर्स की याचिकाओं पर $103,265 का चार्ज लगाया जाएगा जो सालाना H-1B वीज़ा कैप (सीमा) से छूट प्राप्त नहीं हैं।
अटॉर्नी जनरलों ने प्रस्तावित चार्ज को टैक्स बताया। उन्होंने तर्क दिया कि कांग्रेस की मंज़ूरी के बिना एग्जीक्यूटिव ब्रांच ऐसा टैक्स नहीं लगा सकती।
ग्रुप ने यह भी कहा कि यह नियम इमिग्रेशन एंड नेशनैलिटी एक्ट के तहत USCIS के अधिकार क्षेत्र से बाहर है और एडमिनिस्ट्रेटिव प्रोसीजर एक्ट का उल्लंघन करता है।
अटॉर्नी जनरलों के अनुसार, प्रशासन उस बोझ को सही ठहराने में नाकाम रहा है जो प्रस्तावित चार्ज से राज्यों पर पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि USCIS ने कम नुकसान वाले विकल्पों पर ठीक से विचार नहीं किया।
ग्रुप ने 30 दिन की पब्लिक कमेंट अवधि पर भी आपत्ति जताई और इसे बहुत कम और अपर्याप्त रूप से उचित ठहराया गया बताया।
अटॉर्नी जनरलों ने कहा कि प्रस्तावित चार्ज से राज्य और स्थानीय संस्थानों के लिए कुशल विदेशी पेशेवरों को काम पर रखना और मुश्किल हो सकता है। उन्होंने प्राइमरी और सेकेंडरी एजुकेशन, हेल्थकेयर और अन्य ज़रूरी सेवाओं में कमी का हवाला दिया।
जोन्स ने कहा, "इस कैटेगरी के लोग सिर्फ़ कागज़ों पर लिखे नाम नहीं हैं - वे हमारे टीचर, डॉक्टर, नर्स, देखभाल करने वाले और बहुत कुछ हैं। वे हमारे पड़ोसी, दोस्त और परिवार के सदस्य हैं।"
उन्होंने कहा, "उन्होंने यहां आने और 'अमेरिकन ड्रीम' का हिस्सा बनने के लिए हर फ़ॉर्म भरा है और सरकार की हर मांग को पूरा किया है।"
जोन्स ने प्रशासन पर समुदायों और सार्वजनिक सेवाओं पर पड़ने वाले असर पर ठीक से विचार किए बिना अपने एग्जीक्यूटिव अधिकार का दायरा बढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "डोनाल्ड ट्रंप एग्जीक्यूटिव पावर (कार्यकारी शक्ति) की सीमाओं को आगे बढ़ाकर रास्ते बंद करने की कोशिश कर रहे हैं, और उन्हें इस बात की कोई परवाह नहीं है कि इस प्रस्तावित नियम से वर्जीनिया के लोगों पर कितना बोझ पड़ेगा।"
"यहां वर्जीनिया में, हम अपने समुदायों के लिए लड़ते हैं, और मेरा ऑफिस यह पक्का करने के लिए हर कानूनी तरीके का इस्तेमाल करेगा कि यह प्रस्ताव आगे न बढ़े।"
गठबंधन ने कहा कि पिछली सरकार ने भी ऐसा ही शुल्क लगाने की कोशिश की थी जिसे रद्द कर दिया गया था। उनका तर्क है कि नया प्रस्ताव फिर से कांग्रेस से मंज़ूरी लेने के बजाय प्रशासनिक कार्रवाई के ज़रिए टैक्स लगाने की कोशिश कर रहा है।
वर्जीनिया के अलावा, इस गठबंधन में कैलिफ़ोर्निया, मैसाचुसेट्स, एरिज़ोना, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, हवाई, इलिनोइस, मेन, मैरीलैंड, मिशिगन और मिनेसोटा के अटॉर्नी जनरल शामिल हैं।
इसमें नेवाडा, न्यू जर्सी, न्यू मैक्सिको, न्यूयॉर्क, नॉर्थ कैरोलिना, ओरेगन, वाशिंगटन, विस्कॉन्सिन और डिस्ट्रिक्ट ऑफ़ कोलंबिया भी शामिल हैं।
H-1B प्रोग्राम अमेरिकी नियोक्ताओं को ऐसे खास कामों के लिए विदेशी कर्मचारियों को काम पर रखने की इजाज़त देता है, जिनके लिए आम तौर पर खास जानकारी और कम से कम बैचलर डिग्री या उसके बराबर की योग्यता की ज़रूरत होती है। टेक्नोलॉजी कंपनियां इसके सबसे बड़े यूज़र्स में से हैं, लेकिन अस्पताल, स्कूल, यूनिवर्सिटी और रिसर्च संस्थान भी H-1B प्रोफेशनल्स को काम पर रखते हैं।
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