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एंटी-सबमरीन क्षमता बढ़ाने के लिए नौसेना में शामिल हुआ ‘मंगरोल’

Admindelhi1
12 Oct 2026 2:58 PM IST
एंटी-सबमरीन क्षमता बढ़ाने के लिए नौसेना में शामिल हुआ ‘मंगरोल’
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भारतीय नौसेना को मिली समुद्री निगरानी की नई ताकत

नई दिल्ली (Naren Danu) : भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को मजबूती देने के लिए सोमवार को एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘मंगरोल’ को औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया गया। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में निर्मित यह इस श्रेणी का तीसरा पोत है। मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में आयोजित समारोह में इसे कमीशन किया गया।

पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में नौसेना और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड तथा स्वदेशी रक्षा उपकरण निर्माता कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरणों का इस्तेमाल

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, आईएनएस मंगरोल में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। यह पोत युद्धपोत निर्माण, आधुनिक हथियार प्रणालियों और सेंसर तकनीक के एकीकरण में देश की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। इसका निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों के अनुरूप किया गया है।


आधुनिक सोनार और टॉरपीडो से लैस

आईएनएस मंगरोल को विशेष रूप से तटीय क्षेत्रों और उथले समुद्री जल में पनडुब्बियों का पता लगाने तथा उनसे निपटने के लिए तैयार किया गया है। इसमें अभय हल-माउंटेड सोनार, हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर और मारीच एडवांस्ड टॉरपीडो डिकॉय सिस्टम जैसी आधुनिक प्रणालियां लगाई गई हैं।

तीन डीजल इंजनों और वाटर-जेट प्रणोदन प्रणाली से संचालित यह पोत उथले पानी में तेजी से दिशा बदलने और प्रभावी ढंग से अभियान चलाने में सक्षम है। इसकी मदद से समुद्र के भीतर निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियान और खदान युद्ध से संबंधित कार्य भी किए जा सकते हैं।

बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा में मिलेगी मदद

नौसेना में शामिल होने के बाद मंगरोल बंदरगाहों, समुद्री प्रवेश मार्गों और तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह पोत समुद्री गश्ती विमानों, हेलीकॉप्टरों और अन्य युद्धपोतों के साथ मिलकर पनडुब्बी रोधी अभियान भी संचालित कर सकता है।

गुजरात के जूनागढ़ जिले के तटीय शहर मंगरोल के नाम पर रखे गए इस पोत के जरिए नौसेना ने अपने पुराने युद्धपोत आईएनएस मंगरोल (एम-85) की विरासत को भी आगे बढ़ाया है। पूर्ववर्ती पोत ने 7 अप्रैल 2004 तक भारतीय नौसेना में सेवाएं दी थीं।

समुद्री क्षेत्र में पानी के नीचे बढ़ते खतरों और तटीय सुरक्षा की चुनौतियों के बीच आईएनएस मंगरोल का नौसेना में शामिल होना भारत की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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