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Hyderabad | हैदराबाद : भारत की निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की कंपनी Skyroot Aerospace ने घोषणा की है कि देश के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट ‘विक्रम-1’ की पहली परीक्षण उड़ान के लिए समय तय कर लिया गया है। यह लॉन्च 12 जुलाई से 4 अगस्त के बीच कभी भी हो सकता है।
यह प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया जाएगा। हालांकि अंतिम तारीख का निर्णय प्रक्षेपण स्थल पर तैयारियों, मौसम की स्थिति, सुरक्षा मंजूरी और ‘रेंज क्लीयरेंस’ पर निर्भर करेगा।
भारत के निजी स्पेस सेक्टर में बड़ी उपलब्धि
‘विक्रम-1’ भारत का पहला निजी तौर पर विकसित कक्षीय (orbital) श्रेणी का रॉकेट माना जा रहा है। यह मिशन भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जो देश की स्पेस टेक्नोलॉजी को नई दिशा दे सकता है।
Skyroot Aerospace के सह-संस्थापक पवन कुमार चांदना ने बताया कि इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य रॉकेट के हर चरण के प्रदर्शन को समझना है। उन्होंने कहा कि लॉन्च से लेकर अंतरिक्ष में जाने तक के सभी डेटा को इकट्ठा किया जाएगा, जिसे केवल जमीन पर किए गए परीक्षणों से पूरी तरह समझना संभव नहीं है।
‘आगमन’ मिशन से जुटाया जाएगा अहम डेटा
इस परीक्षण अभियान का नाम ‘आगमन’ रखा गया है। इसके तहत रॉकेट की प्रणोदन प्रणाली, मार्गदर्शन, नेविगेशन, नियंत्रण और पूरे लॉन्च व्हीकल के प्रदर्शन से जुड़ा महत्वपूर्ण डेटा इकट्ठा किया जाएगा। यह जानकारी भविष्य के मिशनों को और अधिक सुरक्षित और सफल बनाने में मदद करेगी।
‘विक्रम-1’ की तकनीकी खासियत
‘विक्रम-1’ एक सात मंजिला ऊंचा, मल्टी-स्टेज कक्षीय प्रक्षेपण यान है। इसे पूरी तरह से कार्बन कंपोजिट (carbon composite) संरचना के साथ तैयार किया गया है, जिससे यह हल्का और मजबूत दोनों बनता है।
इस रॉकेट में घरेलू स्तर पर विकसित प्रणोदन प्रणालियों (propulsion systems) का इस्तेमाल किया गया है, जो भारत की आत्मनिर्भर अंतरिक्ष तकनीक की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
भारत की स्पेस रेस में नई उम्मीद
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर ‘विक्रम-1’ का परीक्षण सफल रहता है तो भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र वैश्विक स्तर पर और मजबूत स्थिति में आ जाएगा। इससे छोटे उपग्रह प्रक्षेपण (small satellite launch) के क्षेत्र में भारत की हिस्सेदारी और बढ़ सकती है।
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