- Home
- /
- प्रौद्योगिकी
- /
- वैश्विक मंच पर UPI:...
प्रौद्योगिकी
वैश्विक मंच पर UPI: अफ्रीकी देशों के भुगतान तंत्र को सुधारेगा भारत
Tara Tandi
10 Oct 2026 4:13 PM IST

x
मुंबई: एक नई रिपोर्ट के अनुसार, ज़िम्बाब्वे, भारत के नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (NPCI) की शाखा NPCI इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) के साथ बातचीत कर रहा है। यह बातचीत रियल-टाइम पेमेंट के लिए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) की टेक्नोलॉजी का लाइसेंस लेने और इसे एक साझा घरेलू पेमेंट सिस्टम के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए हो रही है।
'इंडिया नैरेटिव' की रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरह का घरेलू सिस्टम बैंकों, मोबाइल-मनी ऑपरेटरों और फिनटेक कंपनियों को एक ही पब्लिक प्लेटफॉर्म पर रियल-टाइम में पैसे ट्रांसफर करने की सुविधा देगा।
ज़िम्बाब्वे के रिज़र्व बैंक के गवर्नर जॉन मुशायावनहू ने कहा कि इस कदम से लागत कम हो सकती है, ट्रांसफर तेज़ हो सकते हैं और छोटे घरेलू लेन-देन के लिए कार्ड के अलावा अकाउंट-टू-अकाउंट पेमेंट का विकल्प मिल सकता है।
मुशायावनहू ने कहा कि इसके बाद सीमा-पार (cross-border) इस्तेमाल और रेमिटेंस (विदेश से पैसे भेजने) की सुविधा भी शुरू हो सकती है। NPCI इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) के साथ बातचीत 31 अक्टूबर तक पूरी हो सकती है। NIPL, भारत के नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन की विदेशी शाखा है, जिसने दूसरे देशों में UPI जैसा इंफ्रास्ट्रक्चर एक्सपोर्ट किया है।
ज़िम्बाब्वे में पहले से ही बड़ी संख्या में डिजिटल लेन-देन होते हैं, लेकिन वहां कम लागत वाला कोई साझा पेमेंट सिस्टम नहीं है। ज़िम्बाब्वे के राष्ट्रीय सिस्टम ने 2025 की चौथी तिमाही (Q4) में 23.8 करोड़ (238 मिलियन) इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन किए। इसमें मोबाइल मनी का हिस्सा लगभग 87 प्रतिशत था और एक्टिव मोबाइल-फाइनेंशियल-सर्विसेज यूज़र्स की संख्या लगभग 1.1 करोड़ (11 मिलियन) थी।
रिपोर्ट में बताया गया है, "विदेशों में रहने वाले लोगों से आने वाली रकम (डायस्पोरा इनफ्लो) 2024 में 2.15 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 2.45 अरब डॉलर हो गई, जो रोज़ाना लगभग 67 लाख (6.7 मिलियन) डॉलर है। 2025 की शुरुआत में आए कुल फंड में से ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका, दोनों का हिस्सा एक-चौथाई से थोड़ा ज़्यादा था। ये डॉलर परिवारों की आय और विदेशी मुद्रा का स्रोत हैं, जो माइनिंग (खनन) के बाद दूसरे नंबर पर हैं।"
रिपोर्ट में आगे कहा गया, "वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि 2025 में सब-सहारा अफ्रीका में 200 डॉलर भेजने की औसत लागत लगभग 8 प्रतिशत थी, जबकि वैश्विक औसत लगभग 6.5 प्रतिशत और सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल (SDG) का लक्ष्य 3 प्रतिशत है।"
रिपोर्ट के अनुसार, सदर्न अफ्रीकन डेवलपमेंट कम्युनिटी (SADC) रूट से पैसे भेजने की लागत और भी ज़्यादा है। इसमें यह भी कहा गया है कि बिचौलियों के कारण जो पैसा बीच में ही चला जाता है, वह असल में अफ्रीकी लोगों के भोजन और वर्किंग कैपिटल (कामकाज के लिए ज़रूरी पूंजी) का नुकसान है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2025 में दुनिया भर में होने वाले रियल-टाइम पेमेंट वॉल्यूम का लगभग 49 प्रतिशत और पिछले फाइनेंशियल ईयर में भारत के अपने डिजिटल पेमेंट का 84 प्रतिशत UPI के ज़रिए हुआ।
इसमें कहा गया है कि घाना, युगांडा, रवांडा और मोज़ाम्बिक ने पहले ही NPCI के साथ मिलकर काम करने में दिलचस्पी दिखाई है। साथ ही यह भी कहा गया कि जो देश इसमें सबसे पहले आगे आएंगे, वे ही ऐसे स्टैंडर्ड तय करेंगे जिन्हें बाकी देश अपनाएंगे।
Next Story





