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प्रौद्योगिकी
Mobile में ये 3 Apps बन सकते हैं खतरा, सुरक्षा के लिए करें तुरंत डिलीट
Harrison
23 Dec 2025 9:22 PM IST

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Technology ,टेक्नोलॉजी : भारत में स्मार्टफोन अब जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। बैंकिंग, ऑनलाइन शॉपिंग, ऑफिस के काम, और व्यक्तिगत बातचीत—सब कुछ मोबाइल पर निर्भर हो गया है। इसी बीच विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कुछ एप्लिकेशन (Apps) आपकी सुरक्षा और गोपनीयता के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। खासकर Screen-Sharing Apps और अन्य संदिग्ध एप्स का उपयोग आपके डेटा को खतरे में डाल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे ऐप्स स्मार्टफोन में मौजूद संवेदनशील जानकारी जैसे बैंकिंग डेटा, पासवर्ड, निजी तस्वीरें और अन्य व्यक्तिगत जानकारियों तक आसानी से पहुंच बना सकते हैं। स्क्रीन-शेयरिंग ऐप्स विशेष रूप से जोखिम भरे होते हैं क्योंकि ये उपयोगकर्ता की स्क्रीन को रियल-टाइम में दूसरे सर्वर या व्यक्ति के साथ साझा कर सकते हैं।
भारत में बढ़ती डिजिटल लेनदेन की वजह से साइबर अपराधियों के लिए मोबाइल डेटा चोरी करना आसान होता जा रहा है। इसके अलावा, कई ऐप्स को डाउनलोड करने वाले यूजर्स उनके प्राइवेसी पॉलिसी और अनुमति (Permissions) पर ध्यान नहीं देते। अनजाने में ये ऐप्स आपकी लोकेशन, कैमरा, माइक्रोफोन और संदेशों तक भी पहुंच हासिल कर सकते हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों ने तीन प्रकार के ऐप्स को सबसे ज्यादा खतरा मानते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी है:
Screen-Sharing Apps: ये ऐप्स आपकी स्क्रीन को रियल-टाइम में शेयर करते हैं और संवेदनशील जानकारी चोरी का मुख्य कारण बन सकते हैं।
Unknown VPN और Proxy Apps: ये ऐप्स इंटरनेट ट्रैफिक को रूट करते हैं और आपके डेटा को अनजाने सर्वर पर भेज सकते हैं।
Permission-heavy Utility Apps: कुछ यूटीलीटी और क्लीनर ऐप्स अधिक परमिशन मांगते हैं, जिससे आपके फोन के डेटा का दुरुपयोग हो सकता है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि अगर किसी ऐप की विश्वसनीयता पर संदेह हो, या वह अनावश्यक परमिशन मांग रहा हो, तो उसे तुरंत डिलीट कर देना चाहिए। इसके अलावा, केवल गूगल प्ले स्टोर और ऐप स्टोर जैसे आधिकारिक प्लेटफॉर्म से ही ऐप्स डाउनलोड करें। अपडेटेड एंटीवायरस और मोबाइल सिक्योरिटी ऐप्स का उपयोग भी सुरक्षा बढ़ाने में मदद करता है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि एक बार डेटा चोरी हो जाने पर इसका नकारात्मक प्रभाव लंबी अवधि तक रह सकता है। बैंकिंग डेटा या पासवर्ड चोरी होने पर आर्थिक नुकसान, पहचान की चोरी और निजी जानकारी का दुरुपयोग जैसी गंभीर समस्याएँ हो सकती हैं।
यूजर्स को अपने स्मार्टफोन पर एप्लिकेशन की परमिशन नियमित रूप से चेक करनी चाहिए। केवल उन ऐप्स को अनुमति दें जिन पर भरोसा हो। साथ ही, स्क्रीन-शेयरिंग और रिमोट एक्सेस ऐप्स का इस्तेमाल केवल तभी करें जब इसके लिए स्पष्ट और सुरक्षित कारण हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सुरक्षा में जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। मोबाइल यूजर्स को नियमित रूप से अपने फोन की सुरक्षा सेटिंग्स, ऐप परमिशन और अनजान लिंक पर ध्यान देना चाहिए। साइबर खतरे तेजी से बढ़ रहे हैं, इसलिए समय रहते सतर्क रहना बेहद जरूरी है।
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