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प्रौद्योगिकी
सख्त नियम: बिना एक्टिव SIM अब नहीं चलेंगे व्हाट्सएप और मैसेजिंग ऐप्स
Tara Tandi
23 Oct 2026 10:58 AM IST

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नई दिल्ली: अगर आप व्हाट्सएप या टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन आपके फोन में वह सिम कार्ड नहीं है जिससे आपने अकाउंट रजिस्टर किया था, तो आपको नए नियमों के बारे में पता होना चाहिए। ये नियम 1 जनवरी 2027 से लागू हो सकते हैं।
दूरसंचार विभाग (DoT) ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए 31 दिसंबर 2026 तक 'सिम-बाइंडिंग' (SIM-binding) की शर्तें लागू करने की समय-सीमा तय की है। इसका मकसद साइबर फ्रॉड और भारतीय मोबाइल नंबरों के गलत इस्तेमाल पर लगाम लगाना है।
अगले साल से, अगर आपके मैसेजिंग अकाउंट से जुड़ा सिम कार्ड निकाल दिया जाता है, डीएक्टिवेट हो जाता है या बदल दिया जाता है, तो आप अपने अकाउंट का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।
नए नियमों के तहत, जो मैसेजिंग ऐप रजिस्ट्रेशन के लिए भारतीय मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें यह वेरिफाई करना होगा कि रजिस्टर किया गया नंबर उसी डिवाइस में मौजूद किसी एक्टिव सिम कार्ड या ई-सिम (eSIM) से जुड़ा है।
सीधे शब्दों में कहें तो, अगर आप उस सिम कार्ड को निकाल देते हैं जिसका इस्तेमाल अकाउंट बनाने के लिए किया गया था, तो आप लंबे समय तक उस अकाउंट का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।
अगर रजिस्टर किया गया सिम कार्ड निकाल दिया जाता है, बदल दिया जाता है या इनएक्टिव हो जाता है, तो ऐप तब तक काम करना बंद कर सकता है, जब तक कि उसी नंबर को किसी वैध सिम या ई-सिम प्रोफाइल के जरिए फिर से एक्टिवेट न कर दिया जाए।
सरकार का यह फैसला साइबर अपराध, फिशिंग और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे घोटालों से निपटने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है।
दूरसंचार विभाग (DoT) के अनुसार, फ्रॉड करने वाले गिरोह भारतीय मोबाइल नंबरों का गलत इस्तेमाल करते हैं। वे सिम कार्ड खरीदते हैं, उनसे मैसेजिंग अकाउंट रजिस्टर करते हैं और फिर भारत के बाहर से उन अकाउंट्स को चलाते हैं।
अधिकारियों का मानना है कि अकाउंट और एक्टिव सिम कार्ड के बीच कड़ा जुड़ाव होने से, भारतीय नंबरों का इस्तेमाल करके सीमा पार से होने वाले फ्रॉड को रोकना आसान हो जाएगा।
सरकार ने नियमों को सख्त करने के पीछे एक और बड़ा कारण यह बताया है कि हाल के वर्षों में भारतीय उपभोक्ताओं को साइबर फ्रॉड की वजह से भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म इन नए नियमों के दायरे में आ सकते हैं, क्योंकि ये यूजर की पहचान और रजिस्ट्रेशन के लिए फोन नंबरों पर निर्भर करते हैं।
हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक स्नैपचैट (Snapchat) पर 'सिम-बाइंडिंग' के ये नियम लागू होने की संभावना नहीं है।
सिग्नल (Signal) की स्थिति अभी साफ नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जब इस मामले की समीक्षा की जा रही थी, तब इस प्लेटफॉर्म ने सरकार के संदेशों का कोई जवाब नहीं दिया था। अब तक मिली जानकारी से ऐसा नहीं लगता कि 1 जनवरी 2027 से कुछ खास आईफोन या एंड्रॉइड मॉडल पर व्हाट्सएप काम करना बंद कर देगा। प्रस्तावित पाबंदियां सिम वेरिफिकेशन और अकाउंट ऑथेंटिकेशन से जुड़ी हैं, न कि डिवाइस के ब्रांड या ऑपरेटिंग सिस्टम से।
इन बदलावों का सबसे ज्यादा असर उन उपयोगकर्ताओं पर पड़ सकता है जो अपना रजिस्टर्ड सिम कार्ड किसी दूसरे फोन में रखते हैं जबकि व्हाट्सएप किसी और डिवाइस पर इस्तेमाल करते हैं; या वे लोग जो अकाउंट सेटअप पूरा करने के बाद सिम निकाल लेते हैं; और वे लोग जो मुख्य रूप से वाई-फाई पर निर्भर रहते हैं और सेलुलर सेवाओं का बहुत कम इस्तेमाल करते हैं।
डुअल-सिम डिवाइस वाले उपयोगकर्ताओं को यह भी सुनिश्चित करना पड़ सकता है कि उनके मैसेजिंग अकाउंट से जुड़ा नंबर एक्टिव रहे और प्लेटफॉर्म की शर्तों को पूरा करता हो।
माना जा रहा है कि ये नियम फिजिकल सिम कार्ड और ई-सिम प्रोफाइल, दोनों पर लागू होंगे। जब तक रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर डिवाइस पर किसी एक्टिव ई-सिम से जुड़ा है, तब तक उपयोगकर्ताओं को केवल इसलिए कोई समस्या नहीं आनी चाहिए कि वे फिजिकल सिम कार्ड का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।
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