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प्रौद्योगिकी
WhatsApp, Facebook और Messenger पर अब स्कैम नहीं होगा आसान! Meta लाई एडवांस AI टूल
Tara Tandi
14 March 2026 7:52 PM IST

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Technology टेक्नोलॉजी: स्कैमर्स के लिए Meta ने कमर पूरी तरह से कस ली है। कंपनी ने घोषणा की है कि Meta के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स को कंपनी ने स्कैम-प्रूफ बनाने की कवायद शुरू कर दी है। कंपनी ने कई ऐसे टूल लॉन्च किए हैं जो स्कैम का चुटकी में पता लगाएंगे। Meta ने ये एंटी-स्कैम टूल अपने पॉपुलर प्लेटफॉर्म जैसे WhatsApp, Facebook, Messenger आदि के लिए लॉन्च किए हैं। कंपनी ने कहा है कि वह इनके लिए एक खास AI सिस्टम का इस्तेमाल कर रही है जो बेहतर तरीके से स्कैम का पता लगाता है और प्लेटफॉर्म पर किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि को रोक सकता है।
Meta ने WhatsApp, Facebook, Messenger आदि के लिए ये एंटी-स्कैम टूल लॉन्च किए हैं। एक खास AI सिस्टम इन मैसेंजर प्लेटफॉर्म्स में इंटीग्रेट किया जा रहा है जो तुरंत स्कैम का पता लगा सकता है। कंपनी ने एक ब्लॉग पोस्ट में इसकी जानकारी दी है। कंपनी के अनुसार, हालिया बदलाव WhatsApp पर डिवाइस लिंकिंग चेतावनी देते हैं, Facebook पर संदिग्ध फ्रेंड रिक्वेस्ट के लिए अलर्ट देते हैं। साथ ही स्कैम नेटवर्क और धोखेबाज विज्ञापनों का पता लगाते हैं।
WhatsApp के लिए कंपनी ने सबसे बड़ा बदलाव लाने की बात कही है जहां पर अब यूजर्स को डिवाइस लिंकिंग के लिए चेतावनी मिलेगी जैसे ही कोई स्कैमर आपके डिवाइस को हैकर कंट्रोल्ड डिवाइस से कनेक्ट करने की कोशिश करेगा। इसी तरह फेसबुक पर किसी फेक अकाउंट या संदिग्ध अकाउंट से रिक्वेस्ट आने पर भी अलर्ट मिलेगा। यानी आपको किसी तरह की संदिग्ध गतिविधि में शामिल होने से पहले ही अलर्ट प्राप्त हो जाएगा।
Meta का यह प्रयास दिन प्रतिदिन एडवांस होते जा रही स्कैम कोशिशों पर लगाने के लिए है। स्कैमर अब पहले से कहीं ज्यादा परिष्कृत तरीके इस्तेमाल करने लगे हैं जिनका आपको पता भी नहीं लगेगा कि यह कोई फिशिंग अटैक हो सकता है। कंपनी ने कहा कि स्कैमर ने तरीकों को लगातार विकसित कर रहे हैं। यही कारण है कि कंपनी अपनी सुरक्षा व्यवस्था को किसी एक प्लेटफॉर्म तक सीमित रखने के बजाय विभिन्न ऐप्स में अपडेट कर रही है।
कंपनी ने कहा कि वह धोखाधड़ी को तेजी से पहचानने और रोकने के लिए AI का इस्तेमाल कर रही है। मेटा ने इसे एक अलग फीचर के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यापक सुरक्षा प्रणाली के हिस्से के रूप में प्रस्तुत किया है। इसमें ऑटोमेटेड डिटेक्शन, धोखाधड़ी वाले विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई और बाहरी एजेंसियों और संगठनों के साथ साझेदारी शामिल है। मेटा के अनुसार यह समस्या अभी बहुत बड़े पैमाने पर मौजूद है। कंपनी ने 2025 में अपनी नीतियों का उल्लंघन करने वाले 159 मिलियन से अधिक फर्जी विज्ञापनों को ग्लोबल लेवल पर हटाया था।
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