प्रौद्योगिकी

'सेकंड-लाइफ' बैटरी इस्तेमाल से मजबूत होगा भारत का इकोसिस्टम

Tara Tandi
26 Sept 2026 1:33 PM IST
सेकंड-लाइफ बैटरी इस्तेमाल से मजबूत होगा भारत का इकोसिस्टम
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नई दिल्ली: विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं का कहना है कि भारत को एक मज़बूत, आत्मनिर्भर और सर्कुलर बैटरी इकोसिस्टम बनाने के लिए मैन्युफैक्चरिंग, डिप्लॉयमेंट, सेकंड-लाइफ एप्लीकेशन और एंड-ऑफ-लाइफ मैनेजमेंट के क्षेत्रों में मिलकर काम करने की ज़रूरत है।
यहाँ आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन में 'द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट' (TERI) की महानिदेशक डॉ. विभा धवन ने कहा, "बातचीत को सिर्फ़ मोबिलिटी से आगे ले जाकर EV बैटरी के लिए सेकंड-लाइफ एप्लीकेशन की संभावनाओं पर भी विचार करना चाहिए। इससे गाड़ियों में शुरुआती इस्तेमाल के बाद भी इनकी वैल्यू और इस्तेमाल को अधिकतम करने में मदद मिल सकती है।"
TERI के इस सम्मेलन में नीति निर्माताओं, इंडस्ट्री लीडर्स, रिसर्चर्स और अन्य स्टेकहोल्डर्स को एक साथ लाया गया ताकि वे भारत के तेज़ी से विकसित हो रहे बैटरी इकोसिस्टम से जुड़े मौकों और चुनौतियों पर चर्चा कर सकें।
भारी उद्योग मंत्रालय के संयुक्त सचिव विजय मित्तल ने कहा कि मंत्रालय घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन को मज़बूत कर रहा है, साथ ही एक प्रतिस्पर्धी और सर्कुलर बैटरी इकोसिस्टम के लिए सेकंड-लाइफ एप्लीकेशन, ट्रेसेबिलिटी, स्टैंडर्ड्स और रीसाइक्लिंग को भी बढ़ावा दे रहा है।
MNRE के साइंटिस्ट E, कुलदीप राणा ने कहा, "सेकंड-लाइफ बैटरी में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के अलावा घरेलू उपकरणों, रूफटॉप सोलर PV सिस्टम और UPS सिस्टम जैसे क्षेत्रों में इस्तेमाल की काफ़ी संभावनाएँ हैं।"
सम्मेलन में बैटरी वैल्यू चेन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई—जिसमें घरेलू एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) मैन्युफैक्चरिंग को बड़े पैमाने पर बढ़ाने और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विकास से लेकर बैटरी के दोबारा इस्तेमाल (reuse), नए काम में इस्तेमाल (repurpose) और रीसाइक्लिंग की उभरती ज़रूरतें शामिल थीं।
TERI के सीनियर डायरेक्टर AK Saxena ने ज़ोर दिया कि मुख्य फोकस सिर्फ़ वॉल्यूम बढ़ाने के बजाय वैल्यू क्रिएशन को स्थानीय स्तर पर करने पर होना चाहिए। Saxena ने कहा कि बैटरी को शुरू से ही सर्कुलरिटी को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया जाना चाहिए, साथ ही उनकी बची हुई क्षमता और परफॉर्मेंस को ध्यान में रखते हुए सेकंड-लाइफ एप्लीकेशन में ज़्यादा भरोसा पैदा किया जाना चाहिए।
IESA के मैनेजिंग डायरेक्टर विनायक वालिम्बे ने देश में एक मज़बूत और प्रतिस्पर्धी बैटरी इकोसिस्टम बनाने के लिए घरेलू वैल्यू एडिशन को बढ़ाने की बात कही।
BSES राजधानी पावर लिमिटेड की सीनियर मैनेजर सुगंधिता वढेरा ने कहा, "पीक डिमांड को मैनेज करने और एक मज़बूत व रिस्पॉन्सिव पावर सिस्टम बनाने के लिए राज्य-स्तरीय क्षमता योजना, मज़बूत पेमेंट-सिक्योरिटी मैकेनिज़्म और डिस्ट्रीब्यूशन डाउनस्ट्रीम में लचीले रिसोर्स बहुत ज़रूरी होंगे।"
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