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प्रौद्योगिकी
आईएमपीपीए ने सरकार को लिखा पत्र, एआई ट्रेनिंग के लिए प्रस्तावित 'हाइब्रिड कॉपीराइट लाइसेंस' का जताया विरोध
SHIDDHANT
6 Feb 2026 8:50 PM IST

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Delhi दिल्ली। इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईएमपीपीए) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियों द्वारा बिना अनुमति के फिल्म, म्यूजिक और अन्य क्रिएटिव कंटेंट को ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल करने के प्रस्तावित 'हाइब्रिड कॉपीराइट लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क' का विरोध किया है। आईएमपीपीए ने सरकार को पत्र लिखकर इस पर विचार करने को कहा है। एसोसिएशन ने साफ कहा कि वह किसी भी ऐसे नियम का समर्थन नहीं करेगा जो अधिकार धारकों के मौलिक अधिकारों को कमजोर करे या उन पर हावी हो। उन्होंने सरकार से अपील की है कि इस फ्रेमवर्क पर दोबारा विचार किया जाए, क्योंकि यह क्रिएटर्स के मौलिक अधिकारों को कमजोर कर सकता है। आईएमपीपीए ने 19 जनवरी को सौंपे पत्र का हवाला देते हुए कहा कि सदस्यों और प्रमुख अधिकार धारकों के साथ विस्तृत चर्चा के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि मौजूदा रूप में यह प्रस्ताव पूरी तरह अस्वीकार्य है।
एसोसिएशन का कहना है कि यह फ्रेमवर्क क्रिएटिव इंडस्ट्री की लंबे समय की स्थिरता और आर्थिक दृष्टि से गंभीर खतरा है। दुनिया भर में इस बात को माना जा रहा है कि क्रिएटिव कंटेंट टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए मुफ्त कंटेंट नहीं है। यह लेखकों, कलाकारों, निर्देशकों और प्रोड्यूसर्स की मेहनत, निवेश और कानूनी मालिकाना हक का नतीजा है। कई देशों में बिना अनुमति एआई ट्रेनिंग के खिलाफ मुकदमे चल रहे हैं और नीति-निर्माता पारदर्शिता, सहमति और उचित मुआवजे पर जोर दे रहे हैं। जहां टेक्स्ट और डेटा माइनिंग की छूट दी गई है, वहां भी वह बहुत सीमित है और मौजूदा लाइसेंसिंग बाजार को नुकसान नहीं पहुंचाती।
उन्होंने बताया, 'वैश्विक रुझान क्रिएटर्स को मजबूत सुरक्षा और बेहतर सौदेबाजी की ताकत देने की ओर है।'
एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि भारत में ऐसा फ्रेमवर्क लाना क्रिएटिव कम्युनिटी को नुकसान पहुंचा सकता है और लागू करना भी मुश्किल साबित हो सकता है। भारत में पहले से ही पायरेसी की बड़ी समस्या है, जिससे फिल्म इंडस्ट्री को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है और निवेशकों का भरोसा कम हो रहा है। कानूनी कार्रवाई धीमी और महंगी होने के कारण बिना अनुमति कॉपी करना आम है। ऐसे में एआई ट्रेनिंग के लिए एक ऐसा फॉर्मेट लाना, जिसमें कंटेंट पर नियंत्रण कम हो जाए, क्रिएटर्स के लिए सही नहीं होगा।
एसोसिएशन का कहना है कि एआई डेवलपर्स और अधिकार धारकों के बीच स्वैच्छिक और निष्पक्ष बातचीत तभी संभव है, जब कानूनी दंड का डर हो। जुर्माना और सख्ती लागू करने से कंपनियां लाइसेंस लेने और सहमति मांगने के लिए मजबूर होती हैं, लेकिन भारत में ऐसा मजबूत कानूनी ढांचा नहीं है।
आईएमपीपीए ने मांग की है कि क्रिएटर्स के अधिकारों को मजबूत रखते हुए स्वैच्छिक लाइसेंसिंग को बढ़ावा दिया जाए। इससे इनोवेशन भी बढ़ेगा और क्रिएटर्स पर बोझ नहीं पड़ेगा।
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