प्रौद्योगिकी

IBM ने दुनिया की पहली सब-1 नैनोमीटर चिप टेक्नोलॉजी पेश की

Tara Tandi
25 Jun 2026 6:10 PM IST
IBM ने दुनिया की पहली सब-1 नैनोमीटर चिप टेक्नोलॉजी पेश की
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नई दिल्ली: अमेरिका की टेक्नोलॉजी कंपनी IBM ने गुरुवार को दुनिया की पहली सब-1 नैनोमीटर (nm) चिप टेक्नोलॉजी पेश की। सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी कामयाबी है, क्योंकि पारंपरिक चिप स्केलिंग अब अपनी फिजिकल लिमिट तक पहुँच रही है।
कंपनी के मुताबिक, यह नई चिप 0.7 nm या 7-एंगस्ट्रॉम प्रोसेस नोड पर बनी है और इसमें 'नैनोस्टैक' नाम का एक नया थ्री-डायमेंशनल ट्रांजिस्टर आर्किटेक्चर इस्तेमाल किया गया है।
कंपनी ने कहा कि यह चिप एटॉमिक-स्केल डाइमेंशन पर परफॉर्मेंस और एनर्जी एफिशिएंसी में लगातार सुधार करने में मदद करती है।
इसमें लगभग 100 अरब ट्रांजिस्टर एक ऐसी डिवाइस पर लगाए गए हैं जिसका साइज़ लगभग नाखून जितना है। यह 2021 में पेश की गई 2 nm चिप टेक्नोलॉजी की तुलना में ट्रांजिस्टर डेंसिटी को लगभग दोगुना कर देता है।
कंपनी ने कहा कि नई टेक्नोलॉजी से 2 nm नोड चिप्स की तुलना में 50 प्रतिशत तक बेहतर परफॉर्मेंस या 70 प्रतिशत ज़्यादा एनर्जी एफिशिएंसी मिलने की उम्मीद है।
इस तरक्की से जेनरेटिव AI, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और अगली पीढ़ी के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जैसे मुश्किल कामों में मदद मिलने की उम्मीद है।
IBM रिसर्च के डायरेक्टर और IBM फेलो, जे गैम्बेटा ने कहा, "IBM की चिप से जुड़ी यह नई कामयाबी कंप्यूटिंग के क्षेत्र में एक अहम मोड़ है, जो टेक्नोलॉजी को नैनोमीटर युग से आगे बढ़ाकर एटम के स्तर तक ले जाती है।"
कंपनी ने बताया कि इसका नैनोस्टैक आर्किटेक्चर ट्रांजिस्टरों को वर्टिकली (ऊपर-नीचे) और स्टैगर (अलग-अलग स्तरों पर) करके रखता है। इससे एक चिप पर ज़्यादा कंपोनेंट लगाए जा सकते हैं और साथ ही अलग-अलग मटीरियल को परफॉर्मेंस और पावर एफिशिएंसी के लिए अलग-अलग तरीके से ऑप्टिमाइज़ किया जा सकता है।
इस बीच, IBM के रिसर्चर्स ने दिखाया कि यह आर्किटेक्चर SRAM स्केलिंग में काफी सुधार कर सकता है। इससे चिप डिज़ाइनर्स को ऐसे ज़्यादा कुशल प्रोसेसर बनाने में मदद मिलेगी जो हाई-बैंडविड्थ AI वर्कलोड को संभाल सकें।
कंपनी को उम्मीद है कि इस टेक्नोलॉजी का कमर्शियल इस्तेमाल अगले पाँच सालों में शुरू हो जाएगा।
इसके अलावा, यह रिसर्च अल्बानी, न्यूयॉर्क में IBM की सेमीकंडक्टर रिसर्च फैसिलिटी में ASML, Lam Research, Tokyo Electron और SCREEN Semiconductor Solutions जैसे इंडस्ट्री पार्टनर्स के साथ मिलकर की गई थी।
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