प्रौद्योगिकी

5G नेटवर्क में अब मिलेगी VIP स्पीड! Jio और Airtel ने शुरू किया नया सिस्टम, जानिए किसे होगा फायदा

jantaserishta.com
12 Oct 2026 4:40 PM IST
5G नेटवर्क में अब मिलेगी VIP स्पीड! Jio और Airtel ने शुरू किया नया सिस्टम, जानिए किसे होगा फायदा
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नई दिल्ली: Jio और Airtel ने 5G नेटवर्क स्लाइसिंग तकनीक का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इस तकनीक से जरूरत के हिसाब से नेटवर्क के अलग-अलग हिस्सों को विशेष सेवाओं के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। Jio ने बड़े धार्मिक आयोजनों में पुलिस व्यवस्था के लिए इस तकनीक का उपयोग किया है, जबकि Airtel ने पोस्टपेड ग्राहकों के लिए फास्ट लेन सुविधा शुरू की है। हालांकि, इस तकनीक के साथ नेट न्यूट्रैलिटी और अतिरिक्त शुल्क को लेकर सवाल उठ रहे हैं। TRAI अभी इससे जुड़े नियमों और सेवा की गुणवत्ता के मानक तैयार कर रहा है।
क्या है 5G स्लाइसिंग, क्यों हो रही है इसकी चर्चा?
मोबाइल इंटरनेट की दुनिया में 5G नेटवर्क स्लाइसिंग को एक नई तकनीक के रूप में देखा जा रहा है। इसकी मदद से एक ही नेटवर्क को अलग-अलग जरूरतों के मुताबिक बांटकर इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे किसी खास सेवा या काम के लिए नेटवर्क की क्षमता और प्राथमिकता तय करने में मदद मिलती है।
देश की दो बड़ी टेलीकॉम कंपनियां Jio और Airtel एक नई तकनीक का इस्तेमाल शुरू कर चुकी हैं। इस तकनीक को लेकर अब नियम बनाने की तैयारी भी तेज हो गई है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी TRAI क्वालिटी ऑफ सर्विस से जुड़े मानकों और नेट न्यूट्रैलिटी के नियमों पर काम कर रहा है। इन नियमों का उद्देश्य इंटरनेट सेवाओं की गुणवत्ता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। हालांकि, नए नियम कब लागू होंगे, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
इसका मतलब है कि तकनीक का इस्तेमाल शुरू होने के बावजूद इसे लेकर सभी नियम और शर्तें अभी स्पष्ट नहीं हैं। खास तौर पर यह सवाल बना हुआ है कि अलग-अलग तरह के नेटवर्क इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को किस आधार पर सुविधाएं दी जाएंगी।
बड़े आयोजनों में पुलिस की मदद कर रहा Jio का नेटवर्क
5G स्लाइसिंग का इस्तेमाल केवल मोबाइल इंटरनेट की स्पीड बढ़ाने तक सीमित नहीं है। बड़े आयोजनों में भीड़ के बीच नेटवर्क को जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल करना इसका एक अहम उद्देश्य हो सकता है।
Jio ने महाराष्ट्र के पंढरपुर में करीब 35 लाख लोगों की मौजूदगी वाले आयोजन और तिरुपति में लगभग 5 लाख श्रद्धालुओं की भीड़ के दौरान इस तकनीक का इस्तेमाल किया है। पंढरपुर में पुलिस व्यवस्था को बेहतर ढंग से चलाने के लिए विशेष मिशन-क्रिटिकल नेटवर्क स्लाइस बनाई गई थी। इसका उद्देश्य पुलिस के जरूरी संचार के लिए नेटवर्क को प्राथमिकता देना था।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, Jio भीड़भाड़ वाले इलाकों में रेडियो एक्सेस नेटवर्क यानी RAN पर विशेष ध्यान दे रहा है। यह नेटवर्क डेटा और ट्रैफिक की जरूरत के हिसाब से अपने काम करने के तरीके को अपने आप बदल सकता है।
RAN क्या है और मोबाइल नेटवर्क में इसका क्या काम है?
RAN मोबाइल नेटवर्क का वह हिस्सा है, जो आपके फोन को मोबाइल टावर के जरिए टेलीकॉम कंपनी के मुख्य नेटवर्क से जोड़ता है।
जब आप किसी को फोन करते हैं या इंटरनेट चलाते हैं, तो आपके मोबाइल से निकलने वाले सिग्नल पहले नजदीकी एंटीना या टावर तक पहुंचते हैं। इसके बाद ये सिग्नल कंपनी के कोर नेटवर्क तक जाते हैं, जहां से आगे की प्रक्रिया पूरी होती है।
5G स्लाइसिंग के जरिए नेटवर्क की उपलब्ध क्षमता को अलग-अलग जरूरतों के मुताबिक इस्तेमाल करने की व्यवस्था बनाई जा सकती है। उदाहरण के लिए, किसी बड़े आयोजन में पुलिस के संचार को प्राथमिकता देने की जरूरत हो सकती है, जबकि दूसरी परिस्थितियों में सामान्य इंटरनेट सेवाओं की मांग अधिक हो सकती है।
Airtel की फास्ट लेन सुविधा क्या है?
Airtel ने भी अपने कुछ पोस्टपेड ग्राहकों के लिए इस तरह की सुविधा शुरू की है। कंपनी इसे ‘फास्ट लेन’ नाम देती है। इस व्यवस्था में पोस्टपेड ग्राहकों के नेटवर्क इस्तेमाल को ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है।
फिलहाल कंपनी इस सुविधा के लिए अलग से कोई शुल्क नहीं ले रही है। हालांकि, आगे चलकर 5G स्लाइसिंग के नियम और अलग-अलग सेवाओं की कीमतें किस तरह तय होंगी, यह नियामकीय ढांचे पर निर्भर करेगा।
ऐसी तकनीक के जरिए टेलीकॉम कंपनियां ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से अलग-अलग तरह की सेवाएं देने की कोशिश कर सकती हैं। लेकिन इससे ग्राहकों को मिलने वाली सुविधाओं और उनके भुगतान के बीच क्या संबंध होगा, इस पर अभी और स्पष्टता की जरूरत है।
नेट न्यूट्रैलिटी पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
5G स्लाइसिंग के साथ नेट न्यूट्रैलिटी को लेकर बहस भी तेज हुई है। इस बहस का मुख्य सवाल यह है कि क्या ज्यादा पैसा देने वाले ग्राहकों को प्राथमिकता मिलने से बाकी यूजर्स के साथ भेदभाव हो सकता है।
ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम (BIF) का तर्क है कि इस तकनीक के जरिए कंटेंट के आधार पर अंतर किया जा सकता है, जो नेट न्यूट्रैलिटी के नियमों के खिलाफ हो सकता है।
दूसरी ओर, Ericsson की नीता गुप्ता के मुताबिक, सामान्य यूजर्स को इस तकनीक से सीधे तौर पर कोई बदलाव महसूस नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, जो ग्राहक अतिरिक्त भुगतान करके ज्यादा स्पीड चाहते हैं, उन्हें कंपनी अपने सिस्टम के जरिए ऐसी सुविधा दे सकती है, जबकि बाकी ग्राहकों को उनके मौजूदा प्लान के अनुसार स्पीड मिलती रहेगी।
असली असर नियम लागू होने के बाद ही पता चलेगा
5G स्लाइसिंग को लेकर अभी दो प्रमुख सवाल हैं—क्या इससे ग्राहकों को बेहतर नेटवर्क सुविधा मिलेगी और क्या भुगतान के आधार पर इंटरनेट इस्तेमाल में अंतर बढ़ेगा?
इसका वास्तविक असर तकनीक के व्यापक इस्तेमाल और लागू होने वाले नियमों के बाद ही साफ हो पाएगा। TRAI का क्वालिटी ऑफ सर्विस और नेट न्यूट्रैलिटी से जुड़ा ढांचा इस मामले में अहम भूमिकानिभाएगा।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि Jio और Airtel इस तकनीक का इस्तेमाल शुरू कर चुके हैं। इससे टेलीकॉम कंपनियों के लिए अलग-अलग जरूरतों के मुताबिक सेवाएं देने के नए रास्ते खुल सकते हैं। साथ ही, यह भी देखना होगा कि नई सुविधाओं के विस्तार के दौरान सामान्य ग्राहकों के हितों और इंटरनेट पर समान व्यवहार के सिद्धांतों को किस तरह सुरक्षित रखा जाता है।
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