प्रौद्योगिकी

1 नवंबर से कॉल आने पर दिखेगा नाम और नंबर, 4G-5G यूजर्स के लिए नया नियम

jantaserishta.com
15 Oct 2026 1:52 PM IST
1 नवंबर से कॉल आने पर दिखेगा नाम और नंबर, 4G-5G यूजर्स के लिए नया नियम
x
फर्जी कॉल्स की पहचान होगी.
नई दिल्ली: दूरसंचार विभाग ने टेलीकॉम कंपनियों को 1 नवंबर 2026 से 4G और 5G नेटवर्क पर कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन (CNAP) सेवा शुरू करने का निर्देश दिया है। इस सुविधा के तहत कॉल आने पर नंबर के साथ कॉल करने वाले का नाम भी स्क्रीन पर दिखाई देगा। नाम टेलीकॉम कंपनी के रिकॉर्ड से लिया जाएगा, जबकि सेव किए गए नंबर के लिए फोन में मौजूद कॉन्टैक्ट का नाम दिख सकता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य कॉल करने वाले की पहचान आसान बनाना और फर्जी कॉल तथा साइबर धोखाधड़ी जैसी समस्याओं से निपटने में मदद करना है।
1 नवंबर से कॉलिंग के तरीके में होगा बदलाव
मोबाइल फोन पर आने वाली कॉल की पहचान करना जल्द ही आसान हो सकता है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने टेलीकॉम ऑपरेटर्स को 1 नवंबर 2026 से कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन यानी CNAP सेवा शुरू करने का निर्देश दिया है। इसके तहत 4G और 5G मोबाइल नेटवर्क पर आने वाली कॉल के दौरान फोन की स्क्रीन पर कॉल करने वाले का नंबर और नाम दोनों दिखाई देंगे।
इस सुविधा के लिए यूजर्स को अलग से कोई सेवा चालू कराने की जरूरत नहीं होगी। यह व्यवस्था डिफॉल्ट रूप से लागू की जाएगी। इससे अनजान नंबर से कॉल आने पर भी कॉल करने वाले की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
फोन पर किस नाम से दिखाई देगा कॉल करने वाला?
CNAP सेवा में कॉल करने वाले का नाम टेलीकॉम कंपनी के रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी के आधार पर दिखाया जाएगा। अगर किसी व्यक्ति का नंबर पहले से आपके फोन की कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव है, तो स्क्रीन पर आपके फोन में सेव किया गया नाम दिखाई दे सकता है।
वहीं, यदि नंबर सेव नहीं है, तो टेलीकॉम ऑपरेटर के रिकॉर्ड में दर्ज नाम दिखाया जाएगा। यह नाम आमतौर पर सिम लेते समय दी गई जानकारी से जुड़ा होगा। इसका मतलब है कि अनजान नंबर से कॉल आने पर भी यूजर को कॉल करने वाले की पहचान से जुड़ी जानकारी मिल सकती है। हालांकि, नाम दिखाई देने का मतलब यह नहीं होगा कि कॉल अपने आप सुरक्षित या भरोसेमंद साबित हो गई है।
विदेश से आने वाली कॉल के मामले में स्क्रीन पर कॉल करने वाले व्यक्ति का नाम दिखने के बजाय ‘इंटरनेशनल कॉल’ लिखा दिखाई देने की जानकारी दी गई है। प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए CNAP में कुछ विशेष प्रावधान भी हैं। जिन यूजर्स ने अपना नंबर या पहचान छिपाने के लिए CLIR सेवा ली है, उनकी पहचान कॉल रिसीव करने वाले की स्क्रीन पर नहीं दिखाई जाएगी।
CNAP सिस्टम को चलाने के लिए टेलीकॉम कंपनियों को अपने ग्राहकों के मोबाइल नंबर और नाम को जोड़ने वाला डेटाबेस तैयार करना होगा। कॉल आने पर इसी जानकारी के आधार पर नाम स्क्रीन पर दिखाया जाएगा। हालांकि, इस सिस्टम में जानकारी कितनी देर तक रखी जाएगी और उसे किस तरह सुरक्षित किया जाएगा, इससे जुड़े दावों को सेवा के आधिकारिक नियमों के संदर्भ में समझना जरूरी है।
CNAP सुविधा में कारोबारियों और बल्क कनेक्शन इस्तेमाल करने वाली कंपनियों के लिए भी व्यवस्था बताई गई है। ऐसे यूजर्स अपने व्यक्तिगत नाम के बजाय रजिस्टर्ड बिजनेस नेम या ट्रेडमार्क दिखाने का विकल्प चुन सकेंगे। इसके लिए उन्हें टेलीकॉम ऑपरेटर को जरूरी दस्तावेज देने होंगे। नाम की पुष्टि ट्रेडमार्क रजिस्ट्री या GST पोर्टल पर दर्ज जानकारी के आधार पर की जा सकती है। इस सुविधा से कारोबार से जुड़े कॉल की पहचान करना आसान हो सकता है। हालांकि, ब्रांड नेम दिखाने के लिए संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन जरूरी होगा।
2G, 3G और लैंडलाइन यूजर्स पर क्या होगा असर?
फिलहाल CNAP सेवा को 4G और 5G या उनसे नई पीढ़ी के मोबाइल नेटवर्क पर अनिवार्य रूप से लागू करने की बात कही गई है। 2G और 3G नेटवर्क के साथ-साथ लैंडलाइन सेवाओं में इसका विस्तार करने को लेकर अलग से विचार किया जाएगा। इसलिए सभी मोबाइल और लैंडलाइन यूजर्स के लिए एक ही तारीख से यह सुविधा उपलब्ध होने की बात नहीं कही जा सकती। इसका दायरा नेटवर्क और लागू किए जाने वाले नियमों पर निर्भर करेगा।
CNAP लाने की तैयारी कब शुरू हुई थी?
कॉल करने वाले का नाम दिखाने की इस व्यवस्था की सिफारिश भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने फरवरी 2024 में की थी। इसके बाद इसके परीक्षण किए जाने की जानकारी दी गई है।
अक्टूबर 2025 में TRAI और दूरसंचार विभाग के बीच इसे केवल मांग करने वाले ग्राहकों को उपलब्ध कराने के बजाय डिफॉल्ट रूप से लागू करने पर सहमति बनने की बात सामने आई थी।
अब 1 नवंबर 2026 से सेवा शुरू करने के निर्देश के साथ इसे लागू करने की तैयारी की जा रही है।
आम लोगों को क्या फायदा हो सकता है?
CNAP का मुख्य उद्देश्य फोन करने वाले की पहचान से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराना है। इससे अनजान नंबरों से आने वाली कॉल की पहचान करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, फर्जी पहचान के जरिए कॉल करने वालों का पता लगाने और धोखाधड़ी पर लगाम लगाने में भी यह सुविधा उपयोगी साबित हो सकती है।
इसके संभावित फायदे हैं:
- अनजान नंबर से कॉल आने पर नाम की जानकारी मिल सकती है।
- स्पैम और धोखाधड़ी वाली कॉल पहचानने में मदद मिल सकती है।
- कॉल करने वाले की पहचान के लिए थर्ड-पार्टी ऐप पर निर्भरता कम हो सकती है।
- कारोबारियों के लिए सत्यापित बिजनेस नेम दिखाने का विकल्प मिल सकता है।
हालांकि, केवल नाम और नंबर दिखने से हर तरह की धोखाधड़ी रुकने की गारंटी नहीं है। यूजर्स को संदिग्ध कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी, बैंक विवरणया OTP साझा करने से बचना चाहिए।
मोबाइल यूजर्स अभी से किन बातों का ध्यान रखें?
अगर आपकी सिम किसी परिजन के नाम पर है या उसमें पुरानी जानकारी दर्ज है, तो टेलीकॉम ऑपरेटर से संपर्क करके अपने कनेक्शन की जानकारी जांच सकते हैं। कॉल के दौरान दिखाई देने वाला नाम ऑपरेटर के रिकॉर्ड पर निर्भर कर सकता है।
वहीं, कारोबारियों को अपने बिजनेस कनेक्शन के लिए रजिस्टर्ड नाम और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी पहले से तैयार रखनी चाहिए। इससे ब्रांड नेम दिखाने की सुविधा का लाभलेने में मदद मिल सकती है।
कुल मिलाकर, CNAP सेवा का मकसद कॉल करने वाले की पहचान से जुड़ी जानकारी सीधे फोन स्क्रीन पर उपलब्ध कराना है। इससे अनजान कॉल को समझना आसान हो सकता है, लेकिन किसी भी कॉल पर भरोसा करने से पहले सावधानी बरतना जरूरी रहेगा।
jantaserishta.com

jantaserishta.com

भारत के भले ही किसी कोने में आप रह रहे हों, जनता से रिश्ता वेबसाइट पर आपके राज्य की हर छोटी-बड़ी खबर मिलेगी। राजनीति, खेल, चुनाव, बिजनेस, सिनेमा, इस प्लैटफॉर्म पर बस एक क्लिक करते ही हमेशा पाएं ताजा खबरें। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल समेत देश के बाकी राज्यों और शहरों की कोई जानकारी हो, हम आपको देते हैं। सियासी रण हो या बजट का मौसम, कहां चल रहा क्या सियासी दांव-पेच, आपके गांव में किसकी सरकार, हर अपडेट यहां आपको मिलेंगे। तो फिर अपने राज्य की हर हलचल के लिए जुड़े रहिए जनता से रिश्ता के साथ।

    Next Story