प्रौद्योगिकी

E85 फ्यूल की एंट्री, भारत में अभी सिर्फ 3 वाहन तैयार

Payal
9 Jun 2026 7:43 PM IST
E85 फ्यूल की एंट्री, भारत में अभी सिर्फ 3 वाहन तैयार
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E85 फ्यूल कदम रख चुका है।

technological प्रौद्योगिकीय : भारत सरकार देश में बढ़ते पेट्रोल खर्च और प्रदूषण को कम करने के लिए वैकल्पिक ईंधनों को तेजी से बढ़ावा दे रही है। इसी दिशा में अब भारतीय ऑटोमोबाइल मार्केट में **E85 फ्यूल** की एंट्री हो चुकी है। यह ईंधन 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल के मिश्रण से तैयार किया जाता है, जिसे पेट्रोल का सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प माना जा रहा है।

हालांकि, इस नए ईंधन के आने के बावजूद एक बड़ी चुनौती सामने आई है। फिलहाल भारत में बहुत कम वाहन ऐसे हैं जो इस हाई-एथेनॉल मिक्स फ्यूल पर बिना किसी समस्या के चल सकते हैं। मौजूदा समय में बाजार में केवल **तीन वाहन** ही ऐसे हैं जो E85 फ्यूल को पूरी तरह सपोर्ट करते हैं। इनमें एक कार और दो मोटरसाइकिल शामिल हैं।

सरकारी और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि एथेनॉल आधारित ईंधन भविष्य में भारत की ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे न केवल आयातित पेट्रोल पर निर्भरता कम होगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी गिरावट आएगी।

E85 फ्यूल का सबसे बड़ा फायदा इसकी कम लागत है, जिससे वाहन चलाने की लागत पेट्रोल की तुलना में काफी कम हो सकती है। लेकिन इसके साथ ही मौजूदा पेट्रोल इंजन वाली अधिकांश गाड़ियां इस फ्यूल को सपोर्ट नहीं करतीं, जिससे ग्राहकों के लिए सीमित विकल्प रह जाते हैं।

फिलहाल जिन वाहनों को E85 के अनुकूल बनाया गया है, वे खास तौर पर फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी पर आधारित हैं। ये वाहन अलग-अलग ईंधन मिश्रण पर चलने की क्षमता रखते हैं और इंजन को नुकसान पहुंचाए बिना बेहतर परफॉर्मेंस देते हैं।

ऑटो सेक्टर के विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे E85 और अन्य एथेनॉल मिश्रित ईंधनों का उपयोग बढ़ेगा, वैसे-वैसे कंपनियां अधिक फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल लॉन्च कर सकती हैं। इससे आने वाले समय में ग्राहकों के पास अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे।

हालांकि, अभी के लिए सबसे बड़ी चुनौती जागरूकता और इंफ्रास्ट्रक्चर की है। देश में E85 फ्यूल की उपलब्धता सीमित है और केवल चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर ही यह ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा है।

कुल मिलाकर, E85 फ्यूल की शुरुआत भारत में हरित ईंधन की दिशा में एक बड़ा कदम है, लेकिन फिलहाल सीमित वाहनों के कारण इसका उपयोग अभी शुरुआती चरण में ही है। आने वाले समय में अगर ऑटो कंपनियां फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को तेजी से अपनाती हैं, तो यह ईंधन भारत के ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव ला सकता है।

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