प्रौद्योगिकी

करीब 51 प्रतिशत भारतीय कंपनियों के लिए साइबर अटैक सबसे बड़ा खतरा: रिपोर्ट

jantaserishta.com
8 Feb 2026 3:04 PM IST
करीब 51 प्रतिशत भारतीय कंपनियों के लिए साइबर अटैक सबसे बड़ा खतरा: रिपोर्ट
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नई दिल्ली: करीब 51 प्रतिशत भारतीय कंपनियां मानती हैं कि साइबर सुरक्षा में सेंध (साइबर अटैक) उनकी कंपनी के प्रदर्शन के लिए सबसे बड़ा खतरा है। रविवार को जारी एफआईसीसीआई और ईवाई की 'रिस्क सर्वे' रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
इस रिपोर्ट के मुताबिक, 49 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि ग्राहकों की बदलती जरूरतें और उम्मीदें बड़ा जोखिम हैं, जबकि 48 प्रतिशत कंपनियों ने वैश्विक राजनीतिक घटनाओं (जैसे युद्ध या अंतरराष्ट्रीय तनाव) को बड़ा खतरा बताया।
यह रिपोर्ट अलग-अलग सेक्टर के वरिष्ठ अधिकारियों की राय पर आधारित है। इसमें मूल्य निर्धारण, सप्लाई चेन, कर्मचारियों की रणनीति और तकनीकी निवेश को प्रभावित करने वाले कारकों पर प्रकाश डाला गया है, जिससे पता चलता है कि अब कंपनियों के लिए रिस्क मैनेजमेंट बहुत जरूरी हो गया है।
एफआईसीसीआई के कॉरपोरेट सिक्योरिटी और आपदा जोखिम कमेटी के चेयरमैन राजीव शर्मा ने कहा कि आज के अनिश्चित कारोबारी माहौल में जोखिम को पहले समझना, झेलना और उसके अनुसार खुद को बदलना लंबे समय तक आगे बढ़ने के लिए जरूरी है। अब कंपनियां जोखिम को कभी-कभार की समस्या नहीं मान रहीं, बल्कि इसे अपनी रणनीति और भविष्य की योजनाओं में शामिल कर रही हैं।
सर्वे में 61 प्रतिशत लोगों ने कहा कि तेज तकनीकी बदलाव और डिजिटल बदलाव उनकी प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर रहे हैं, जबकि इतने ही यानी 61 प्रतिशत लोगों का मानना है कि साइबर हमले और डेटा चोरी से कंपनियों को आर्थिक नुकसान और बदनामी दोनों हो सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 57 प्रतिशत कंपनियों को डेटा चोरी और कंपनी के अंदर से होने वाली धोखाधड़ी का डर है। 47 प्रतिशत कंपनियों ने माना कि बढ़ते और जटिल होते साइबर खतरों से निपटना उनके लिए मुश्किल हो रहा है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर भी दो तरह के खतरे सामने आ रहे हैं। सर्वे में 60 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अगर एआई जैसी नई तकनीकों को ठीक से नहीं अपनाया गया, तो कामकाज पर बुरा असर पड़ेगा। वहीं 54 प्रतिशत लोगों का मानना है कि एआई से जुड़े नैतिक और नियमों से जुड़े जोखिमों को सही तरीके से संभाला नहीं जा रहा है।
ईवाई इंडिया के रिस्क कंसल्टिंग लीडर सुधाकर राजेंद्रन ने कहा कि आज कंपनियां ऐसे दौर से गुजर रही हैं, जहां कई तरह के जोखिम एक साथ सामने आ रहे हैं, न कि अलग-अलग।
उन्होंने बताया कि महंगाई, साइबर खतरे, एआई के नियम, जलवायु से जुड़ा जोखिम और सरकारी नियम-ये सभी मिलकर कंपनियों की मजबूती और प्रदर्शन को प्रभावित कर रहे हैं। इसलिए अब कंपनी के बोर्ड को ज्यादा सतर्क रहने, बेहतर जानकारी पर ध्यान देने और जोखिम से निपटने की रणनीति को मुख्य योजना में शामिल करने की जरूरत है।
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