- Home
- /
- प्रौद्योगिकी
- /
- व्यापारियों और वित्त...
प्रौद्योगिकी
व्यापारियों और वित्त मंत्री में सहमति: टला 'नो यूपीआई डे' का विरोध प्रदर्शन
Tara Tandi
30 Sept 2026 6:10 PM IST

x
नई दिल्ली: देश की राजधानी में बुधवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बैठक के बाद, व्यापारियों के प्रमुख संगठनों ने 2 अक्टूबर को "नो UPI डे" के तौर पर मनाने का अपना फ़ैसला वापस ले लिया है।
अलग-अलग राज्यों के लगभग 20 व्यापार प्रतिनिधियों के एक दल ने बुधवार को वित्त मंत्री से मुलाक़ात की। उन्होंने 2,000 रुपये से ज़्यादा के मर्चेंट UPI ट्रांज़ैक्शन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत फ़ीस को लेकर अपनी चिंता ज़ाहिर की।
व्यापारियों का कहना था कि इस कदम से छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसायों पर बोझ बढ़ सकता है और व्यापारियों के बीच डिजिटल पेमेंट अपनाने की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।
इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चांदनी चौक से सांसद और 'कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स' (CAIT) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने किया।
प्रतिनिधियों ने प्रस्तावित शुल्क के बारे में स्पष्ट जानकारी मांगी और सरकार से आग्रह किया कि वह व्यापारी समुदाय की चिंताओं पर ध्यान दे।
इससे पहले, 'ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स फ़ेडरेशन' और 'ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन' ने प्रस्तावित फ़ीस के विरोध में 2 अक्टूबर को "नो UPI डे" के तौर पर मनाने की घोषणा की थी।
हालांकि, वित्त मंत्री के साथ बातचीत के बाद इन संगठनों ने विरोध का अपना फ़ैसला वापस ले लिया।
बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए खंडेलवाल ने कहा कि यह फ़ैसला सकारात्मक बातचीत और इस आश्वासन के बाद लिया गया कि व्यापारियों द्वारा उठाई गई चिंताओं पर उचित विचार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस बातचीत से व्यापारी समुदाय का उत्साह बढ़ा है और वे इस मुद्दे पर सरकार के साथ बातचीत जारी रखेंगे।
विरोध वापस लेने के बावजूद, 2,000 रुपये से ज़्यादा के योग्य मर्चेंट UPI ट्रांज़ैक्शन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत फ़ीस 15 अक्टूबर से लागू होने वाली है।
व्यापारी संगठनों ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि नया शुल्क लागू होने से पहले उनकी चिंताओं का समाधान कर लिया जाएगा।
हालांकि, इस महीने की शुरुआत में 'नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया' (NPCI) ने मीडिया के कुछ हिस्सों में आई उन रिपोर्टों का खंडन किया था, जिनमें आरोप लगाया गया था कि UPI मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) पर GST से छोटे व्यापारियों पर बोझ पड़ेगा और डिजिटल पेमेंट महंगे हो जाएंगे। NPCI ने एक बयान में कहा, "यह गलत है। MDR सिर्फ़ 2,000 रुपये से ज़्यादा के P2M ट्रांज़ैक्शन पर लागू होता है। 2,000 रुपये तक के ट्रांज़ैक्शन पर MDR ज़ीरो रहता है और इसलिए GST का भी कोई असर नहीं पड़ता है।"
सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि UPI मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन वॉल्यूम में 2,000 रुपये तक के ट्रांज़ैक्शन का हिस्सा 96 प्रतिशत से ज़्यादा है।
नतीजतन, ज़्यादातर UPI पेमेंट पर MDR नहीं लगेगा और इसलिए MDR पर कोई GST भी नहीं लगेगा।
Next Story





