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Car Mileage Tips: क्या डैशबोर्ड की स्क्रीन दिखाती है धोखा? जानिए अपनी गाड़ी का असली माइलेज नापने का 100% सटीक तरीका

ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। आज के दौर में जहां पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहां हर वाहन मालिक के लिए अपनी कार का माइलेज सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है। कार खरीदते समय या उसे रोज़ाना चलाते वक्त हर किसी की कोशिश यही रहती है कि गाड़ी कम से कम ईंधन में ज्यादा से ज्यादा दूरी तय करे। यही वजह है कि कार कंपनियां भी अपनी गाड़ियों में एडवांस फीचर्स और डिजिटल क्लस्टर देती हैं, जहाँ स्क्रीन पर पल-पल का माइलेज दिखाई देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी कार के डैशबोर्ड पर दिखने वाला माइलेज हमेशा 100 फीसदी सच नहीं होता? कई बार स्क्रीन पर दिखने वाले आंकड़े आपको भ्रम में रख सकते हैं और आपकी जेब पर भारी पड़ सकते हैं। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि आखिर कार का बिल्कुल सही और वास्तविक माइलेज कैसे चेक किया जाए।
इस बात को समझने के लिए सबसे पहले हमें कार के डिजिटल मीटर की तकनीक को समझना होगा। आधुनिक कारों के डैशबोर्ड पर जो माइलेज दिखाई देता है, उसे प्रदर्शित करने का काम गाड़ी में लगा ईसीयू यानी इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट (ECU) करता है। बहुत से लोग यह सोचते हैं कि कार की स्क्रीन सीधे पेट्रोल या डीजल की खपत को नापकर माइलेज दिखा रही है, लेकिन असल में ऐसा नहीं होता। ईसीयू इंजन की कार्यप्रणाली, गाड़ी की रफ्तार, गियर की स्थिति और तय की गई दूरी जैसी कई चीज़ों का बारीकी से विश्लेषण करता है और एक गणितीय अनुमान लगाता है। चूंकि यह सिर्फ एक सॉफ्टवेयर आधारित अनुमान होता है, इसलिए इसमें कुछ फ़ीसदी का अंतर आना स्वाभाविक है। कई बार यह स्क्रीन पर दिखने वाले माइलेज और असल माइलेज में 1 से 3 किलोमीटर प्रति लीटर तक का अंतर पैदा कर देता है।
अगर आप अपनी कार का बिल्कुल सटीक और असली माइलेज जानना चाहते हैं, तो ऑटो एक्सपर्ट्स 'फुल-टू-फुल टैंक' (Full-to-Full Tank) विधि को सबसे भरोसेमंद मानते हैं। यह एक बेहद पुरानी और आजमाई हुई व्यावहारिक तकनीक है, जिसमें किसी भी प्रकार के सॉफ्टवेयर के धोखे की गुंजाइश नहीं होती। इस तरीके से माइलेज चेक करने के लिए सबसे पहले आपको किसी अच्छे पेट्रोल पंप पर जाकर अपनी कार की फ्यूल टंकी को पूरी तरह से फुल करवाना होगा। ईंधन भरवाते समय ध्यान रखें कि पेट्रोल पंप की नोजल जब 'ऑटो-कट' हो जाए, तो वहीं रुक जाएं। टंकी फुल होने के तुरंत बाद आपको अपनी कार के डैशबोर्ड पर जाकर ओडोमीटर (Odometer) की कुल रीडिंग को कहीं डायरी या मोबाइल में नोट कर लेना है। यदि आपकी कार में 'ट्रिप मीटर' की सुविधा है, तो आप 'Trip A' या 'Trip B' को रीसेट करके शून्य (0) पर भी सेट कर सकते हैं।
इसके बाद आपको अपनी कार को सामान्य रूप से चलाना है। सटीक नतीजों के लिए कोशिश करें कि कार को कम से कम 150 से 200 किलोमीटर तक चलाया जाए। इस दौरान आप गाड़ी को शहर के ट्रैफिक और हाईवे दोनों तरह की सड़कों पर चला सकते हैं, ताकि आपको एक मिक्स्ड और रियल-वर्ल्ड माइलेज का पता चल सके। जब कार पर्याप्त दूरी तय कर ले, तो आपको दोबारा उसी पेट्रोल पंप पर जाना चाहिए और ईंधन की टंकी को फिर से उसी 'ऑटो-कट' लेवल तक फुल करवाना चाहिए। इस दूसरी बार की रीफिलिंग में आपकी गाड़ी में जितना लीटर पेट्रोल या डीजल आया है, उस मात्रा (लीटर) को ध्यान से नोट कर लें। साथ ही, अब गाड़ी ने कुल जितने किलोमीटर की दूरी तय कर ली है, उस अंतिम रीडिंग को भी लिख लें।
अब असली माइलेज निकालने के लिए आपको एक छोटा सा गणित लगाना होगा। आपने पहली बार टंकी फुल कराने के बाद से लेकर दूसरी बार फुल कराने के बीच जितने कुल किलोमीटर गाड़ी चलाई है, उस दूरी को दूसरे रीफिल में आए कुल ईंधन (लीटर) से भाग (Divide) दे दें। उदाहरण के लिए, यदि आपकी कार ने इस दौरान कुल 300 किलोमीटर की दूरी तय की और दूसरी बार में टंकी में 15 लीटर ईंधन आया, तो 300 को 15 से भाग देने पर उत्तर 20 आएगा। इसका सीधा मतलब है कि आपकी कार का वास्तविक माइलेज 20 किलोमीटर प्रति लीटर है। इस तरीके से निकाला गया माइलेज पूरी तरह से सटीक होता है और इससे आप अपनी कार के इंजन की सेहत का भी सही अंदाजा लगा सकते हैं। यदि यह आंकड़ा कंपनी के दावे से बहुत कम है, तो आपको गाड़ी की सर्विसिंग कराने की जरूरत हो सकती है।





