प्रौद्योगिकी

Apple अब भारत में बना रहा 25% iPhone, चीन के बाद सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब

Tara Tandi
11 March 2026 7:15 PM IST
Apple अब भारत में बना रहा 25% iPhone, चीन के बाद सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब
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Technology टेक्नोलॉजी: Apple ने बीते साल भारत में iPhone का प्रोडक्शन करीबन 53% बढ़ाया था और अब अपने कुल उत्पादन के 25 प्रतिशत आईफोन्स भारत में ही बन रहे हैं। अमेरिकी कंपनी ने चीन पर लगने वाले टैरिफ से बचने के लिए यह कदम उठाया है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने 2025 में भारत में करीबन 5.5 करोड़ आईफोन असेंबल किए, जो एक साल पहले के 3.5 करोड़ आईफोन से बहुत ज्यादा है। फिलहाल ये डाटा सार्वजनिक नहीं हैं, इसलिए सोर्स ने नाम न छापने की शर्त पर जानकारी दी। Apple ग्लोबल स्तर पर हर साल करीबन 2.2 करोड़ से 2.3 करोड़ आईफोन बनाती है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन पर निर्भरता कम करने की स्ट्रैटजी के तहत Apple ने भारत में iPhone प्रोडक्शन को काफी हद तक बढ़ाया है। दुनिया भर में बनने वाले करीबन 25% आईफोन अब भारत में बन रहे हैं जो कि Apple की ग्लोबल सप्लाई चेन में एक बड़ा बदलाव है। 2025 में Apple ने भारत में लगभग 5.5 करोड़ आईफोन असेंबल किए, जो 2024 में करीबन 3.6 करोड़ यूनिट के मुकाबले में लगभग 53 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। यह ग्रोथ दर्शाती है कि भारत कितनी तेजी से एप्पल के लिए एक बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बन रहा है।
Apple ग्लोबल स्तर पर हर साल 20-23 करोड़ आईफोन का प्रोडक्शन करता है, जिसका मतलब है कि भारत अब कुल प्रोडक्शन का करीबन एक चौथाई हिस्सा तैयार कर रहा है। यह विस्तार Apple के सप्लाई चेन में बदलाव करने और टैरिफ के साथ-साथ चीन पर निर्भरता को कम करने के लिए किया जा रहा है। भारत में iPhone प्रोडक्शन में बढ़ोतरी में सरकार की प्रोडक्शन लिंक इंसेंटिव (PLI) स्कीम का भी सपोर्ट मिला है। इससे कंपनियों को स्थानीय स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक्स का प्रोडक्शन करने और एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन मिलता है। भारत में फॉक्सकॉन, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और पेगाट्रॉन जैसे एप्पल के मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर भारत में आईफोन के प्रोडक्शन में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इनकी बड़े प्लांट तमिलनाडु और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स हब में स्थित हैं। यह बदलाव एप्पल की सप्लाई चेन में एक अहम बदलाव का संकेत है। इससे भारत चीन के बाहर कंपनी के सबसे बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब में से एक के तौर पर उभर रहा है।
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