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ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। बारिश के मौसम में कार चलाते समय सुरक्षा सबसे ज्यादा जरूरी होती है। खराब सड़कें, पानी भरा रास्ता और फिसलन जैसी परिस्थितियां ड्राइविंग को चुनौतीपूर्ण बना देती हैं। ऐसे में कार के टायरों की सही देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है। टायरों की देखभाल में सबसे अहम भूमिका हवा के सही दबाव की होती है। लेकिन कई कार मालिकों के मन में यह सवाल रहता है कि टायर में सामान्य हवा भरवानी चाहिए या फिर नाइट्रोजन गैस का इस्तेमाल करना चाहिए।
बरसात के मौसम में नाइट्रोजन टायरों के लिए एक बेहतर विकल्प माना जा सकता है। यह टायर के अंदर हवा के दबाव को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करती है। हालांकि, सामान्य हवा भी सही तरीके से इस्तेमाल करने पर सुरक्षित रहती है। दोनों विकल्पों के अपने फायदे और सीमाएं हैं।
नाइट्रोजन और सामान्य हवा में अंतर
आम तौर पर टायरों में भरी जाने वाली हवा में करीब 78 प्रतिशत नाइट्रोजन, 21 प्रतिशत ऑक्सीजन और थोड़ी मात्रा में अन्य गैसें व नमी होती है। वहीं, नाइट्रोजन गैस लगभग शुद्ध होती है और इसमें नमी की मात्रा काफी कम होती है। यही कारण है कि कई लोग खासतौर पर लंबे सफर या खराब मौसम में नाइट्रोजन का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं।
नाइट्रोजन गैस सामान्य हवा की तुलना में धीरे-धीरे बाहर निकलती है। इससे टायर का प्रेशर लंबे समय तक स्थिर बना रहता है। बारिश के मौसम में तापमान में बदलाव के कारण टायर प्रेशर में उतार-चढ़ाव आ सकता है, लेकिन नाइट्रोजन इस बदलाव को कुछ हद तक नियंत्रित करने में मदद करती है।
टायर प्रेशर रहता है स्थिर
बरसात के दौरान मौसम में लगातार बदलाव होता रहता है। कभी तेज गर्मी तो कभी बारिश के कारण तापमान में अंतर आता है। इसका असर टायर के अंदर मौजूद हवा के दबाव पर पड़ता है। कम हवा होने से टायर सड़क पर ज्यादा घिसता है और वाहन का नियंत्रण भी प्रभावित हो सकता है।
नाइट्रोजन गैस का फायदा यह है कि यह टायर के अंदर दबाव को लंबे समय तक स्थिर रखने में मदद करती है। इससे ड्राइविंग के दौरान कार का बैलेंस बेहतर रहता है और बार-बार हवा भरवाने की जरूरत कम पड़ती है।
टायर की उम्र बढ़ाने में मदद
सामान्य हवा में मौजूद नमी टायर और रिम के अंदर जंग लगने का कारण बन सकती है। खासकर ऐसे क्षेत्रों में जहां बारिश और नमी ज्यादा रहती है, वहां यह समस्या बढ़ सकती है। नाइट्रोजन गैस सूखी होती है, इसलिए टायर के अंदर नमी कम रहती है और रिम पर जंग लगने का खतरा घट सकता है।
इसके अलावा सही प्रेशर बना रहने से टायर असमान तरीके से घिसते नहीं हैं। इससे टायर की लाइफ बढ़ सकती है और लंबे समय में खर्च भी कम हो सकता है।
माइलेज पर भी पड़ता है असर
टायर में हवा कम होने से रोलिंग रेजिस्टेंस बढ़ जाता है। इसका मतलब है कि कार के इंजन को वाहन चलाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे ईंधन की खपत बढ़ सकती है। नाइट्रोजन के कारण टायर प्रेशर स्थिर रहने से रोलिंग रेजिस्टेंस कम रखने में मदद मिलती है और कार का माइलेज बेहतर हो सकता है।
हालांकि, सिर्फ नाइट्रोजन भरवाने से ही माइलेज में बहुत बड़ा बदलाव नहीं आता। इसके लिए टायर प्रेशर, ड्राइविंग स्टाइल और कार की नियमित सर्विस भी जरूरी होती है।
क्या हर कार में नाइट्रोजन जरूरी है?
विशेषज्ञों के अनुसार, हर कार में नाइट्रोजन भरवाना अनिवार्य नहीं है। अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से टायर प्रेशर चेक करता है और सही दबाव बनाए रखता है तो सामान्य हवा भी पर्याप्त है। लेकिन जो लोग लंबी दूरी की यात्रा करते हैं, हाईवे पर ज्यादा ड्राइव करते हैं या बारिश वाले क्षेत्रों में रहते हैं, उनके लिए नाइट्रोजन एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
बरसात के मौसम में चाहे नाइट्रोजन हो या सामान्य हवा, सबसे जरूरी बात है कि टायर का प्रेशर कंपनी द्वारा बताए गए स्तर पर रखा जाए। साथ ही टायर की स्थिति, ट्रेड और कट की समय-समय पर जांच करना भी जरूरी है। सही देखभाल से न सिर्फ टायर की उम्र बढ़ती है बल्कि सफर भी ज्यादा सुरक्षित होता है।





