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प्रौद्योगिकी
AI प्लेटफॉर्म भी अब सोशल मीडिया जैसी Data और विज्ञापन दौड़ में शामिल
Harrison
31 Jan 2026 9:27 PM IST

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Technology टेक्नोलॉजी: लगभग डेढ़ साल पहले तक उम्मीद थी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सोशल मीडिया से अलग राह अपनाएगा। यह माना जा रहा था कि AI प्लेटफॉर्म्स यूजर का ध्यान बेचने, डेटा खंगालने और विज्ञापन दिखाने के बजाय एक मददगार और सुरक्षित टेक्नोलॉजी बनेंगे। लेकिन हाल के घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि तस्वीर तेजी से बदल रही है। अब AI इंडस्ट्री वही मॉडल अपना रही है जिसने सोशल मीडिया को 'अटेंशन स्पैम' और विज्ञापन से भरा प्लेटफॉर्म बना दिया।
AI प्लेटफॉर्म्स के विज्ञापन मॉडल में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, जब OpenAI ने 2024 के अंत में ChatGPT सर्च लॉन्च किया और 2025 में ChatGPT एटलस ब्राउजर पेश किया, तो यह साफ हो गया कि AI कंपनियां अब यूजर बिहेवियर डेटा इकट्ठा करने और इसे मॉनेटाइज करने की दौड़ में शामिल हो गई हैं। AI कंपनियां अब यूजर की गतिविधियों और प्राथमिकताओं को ट्रैक करके उन्हें विज्ञापनों के लिए टारगेट कर रही हैं, ठीक उसी तरह जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म करते हैं।
इस बदलाव को लेकर कई टेक्सपर्ट्स ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर AI प्लेटफॉर्म्स भी सोशल मीडिया जैसी रणनीतियों को अपनाते हैं, तो यह यूजर्स की प्राइवेसी और डिजिटल सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। पहले AI को एक यूजर-फ्रेंडली और मददगार टेक्नोलॉजी के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब डेटा संग्रह और विज्ञापन पर फोकस इसे एक कॉमर्शियल टूल में बदल रहा है।
OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने पहले AI और विज्ञापन के मेल को ‘अस्थिर’ बताया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर AI प्लेटफॉर्म्स केवल विज्ञापन और डेटा मॉनेटाइजेशन पर ध्यान देंगे, तो यह टेक्नोलॉजी की मूल उद्देश्य—यानी यूजर की मदद और सूचना तक आसान पहुंच—को नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन हाल के कदमों से साफ है कि AI कंपनियां उसी मॉडल की ओर बढ़ रही हैं, जिससे यूजर का ध्यान कमाई का जरिया बनता जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ChatGPT एटलस और ChatGPT सर्च जैसी सेवाओं में यूजर डेटा का इस्तेमाल सिर्फ टेक्नोलॉजी को बेहतर बनाने के लिए नहीं, बल्कि विज्ञापन और मार्केटिंग के लिए भी किया जा रहा है। इससे AI प्लेटफॉर्म्स के मूल मिशन—शिक्षा, हेल्थ, रीसर्च और व्यक्तिगत मदद—पर भी असर पड़ सकता है। यूजर्स अब न केवल अपने सवालों के जवाब के लिए प्लेटफॉर्म पर निर्भर होंगे, बल्कि उनका डेटा भी एक तरह से ‘कमा-नीति’ का हिस्सा बन जाएगा।
AI इंडस्ट्री की इस दिशा से यह भी सवाल उठता है कि क्या यूजर्स को अब AI सेवाओं के लिए अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि यूजर्स को डेटा साझा करने और प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते समय अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स को समझना और नियंत्रित करना चाहिए। इसके अलावा, रेगुलेटरी निकाय भी इस पर निगरानी रख सकते हैं कि AI कंपनियां किस तरह से डेटा मॉनेटाइजेशन और विज्ञापन मॉडल लागू कर रही हैं।
कुल मिलाकर, AI प्लेटफॉर्म्स का मूल उद्देश्य—यूजर्स को मदद और सूचना देना—धीरे-धीरे व्यापारिक और विज्ञापन-केंद्रित मॉडल की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। यह कदम AI टेक्नोलॉजी की प्राइवेसी, उपयोगिता और भरोसे पर असर डाल सकता है।
निष्कर्ष:
AI अब सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं रह गया, बल्कि डेटा और विज्ञापन के खेल का हिस्सा बनता जा रहा है। अगर यह रुझान जारी रहा, तो सोशल मीडिया जैसी ‘अटेंशन इकॉनमी’ AI प्लेटफॉर्म्स में भी दिखाई देगी, जिससे यूजर प्राइवेसी और डिजिटल सेफ्टी को खतरा हो सकता है। यूजर्स और रेगुलेटर दोनों के लिए यह समय चेतावनी और सतर्कता का है।
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