इससे बड़ी विडंबना और क्या होगी कि आजादी के पचहत्तर साल बाद भी हमारे देश में भूख से दो-चार लोगों की त्रासदी पर अदालतों को निर्देश देना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है