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जिंबाब्वे को करना होगा बड़ा उलटफेर
वड़ोदरा: स्मृति मंधाना की कप्तानी वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम रविवार, 25 अक्टूबर को जिंबाब्वे के खिलाफ दूसरे वनडे में सीरीज अपने नाम करने के इरादे से उतरेगी। तीन मैचों की सीरीज में भारत पहला मुकाबला जीतकर 1-0 से आगे है। दूसरे मैच में जीत मिलने पर मेजबान टीम 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर लेगी। वड़ोदरा के बीसीए स्टेडियम में मुकाबला भारतीय समयानुसार दोपहर दो बजे शुरू होना निर्धारित है। जिंबाब्वे के लिए सीरीज में बने रहने का यह महत्वपूर्ण अवसर होगा।
पहले वनडे में भारतीय टीम ने नौ विकेट से प्रभावशाली जीत दर्ज की थी। जिंबाब्वे की पारी 197 रन पर समाप्त हुई, जिसके जवाब में भारत ने 27.1 ओवर में एक विकेट खोकर 200 रन बनाए। प्रतिका रावल ने नाबाद शतक जमाया, जबकि शैफाली वर्मा ने तेज अर्धशतकीय पारी खेली। इस प्रदर्शन ने भारतीय बल्लेबाजी की मजबूती दिखाई। दूसरे मुकाबले से पहले मेजबान टीम के पास बढ़त के साथ अपनी योजनाओं को और बेहतर ढंग से लागू करने का मौका है।
प्रतिका रावल की बल्लेबाजी भारत के लिए सबसे बड़ी सकारात्मक बात रही। उन्होंने पहले मैच में 96 गेंदों पर नाबाद 100 रन बनाए और पारी को अंत तक संभाले रखा। कप्तान मंधाना के साथ उन्होंने पहले विकेट के लिए 94 रन जोड़े। मंधाना ने 34 गेंदों में 32 रन का योगदान दिया। इस साझेदारी ने लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत को मजबूत आधार दिया। प्रतिका ने विकेट गिरने के बाद भी अपनी एकाग्रता बनाए रखी और टीम की जीत सुनिश्चित करने तक क्रीज पर मौजूद रहीं।
तीसरे नंबर पर उतरीं शैफाली वर्मा ने जिंबाब्वे के गेंदबाजों को दबाव बनाने का अवसर नहीं दिया। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी से लक्ष्य तेजी से छोटा होता गया। दूसरे वनडे में भी भारत के लिए यह संयोजन उपयोगी हो सकता है। एक छोर पर पारी संभालने वाली बल्लेबाज और दूसरे छोर से तेजी से रन जुटाने की क्षमता विरोधी कप्तान के लिए क्षेत्ररक्षण सजाना कठिन बनाती है। हालांकि, नई पारी में भारतीय बल्लेबाजों को परिस्थितियों का आकलन करके ही शुरुआत करनी होगी।
पहले मैच में बड़ी जीत के बावजूद भारतीय टीम की फील्डिंग पूरी तरह संतोषजनक नहीं रही थी। जिंबाब्वे की पारी के शुरुआती हिस्से में कैच के मौके छूटे। दूसरे वनडे में टीम इस कमी को दूर करना चाहेगी। कमजोर प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ भी अतिरिक्त अवसर देना गेंदबाजों की मेहनत पर असर डाल सकता है। भारत के लिए चुनौती केवल परिणाम दोहराने की नहीं, बल्कि तीनों विभागों में अधिक सटीक प्रदर्शन करने की होगी। बेहतर कैचिंग से विपक्ष की साझेदारियों को शुरुआत में ही रोका जा सकता है। जिंबाब्वे की बल्लेबाजी के सामने सबसे बड़ा काम उपयोगी शुरुआत को लंबी साझेदारी में बदलना होगा। पहले मुकाबले में कुछ बल्लेबाजों ने धैर्य दिखाया, लेकिन टीम बीच के ओवरों में पर्याप्त मजबूती हासिल नहीं कर सकी। चिपो मुगेरी तिरिपानो और मोडेस्टर मुपाचिकवा मिले अवसरों का पूरा लाभ नहीं उठा सकीं। भारतीय गेंदबाजी के सामने लगातार विकेट बचाते हुए रन जुटाना जरूरी होगा। केवल एक बल्लेबाज की अच्छी पारी के सहारे मजबूत मेजबान टीम को चुनौती देना मुश्किल रहेगा।
युवा बल्लेबाज बिलवेड बीजा जिंबाब्वे की उम्मीदों में शामिल हैं। पहले वनडे में उनकी अर्धशतकीय पारी ने टीम को संभालने में मदद की थी। शार्न मायर्स से भी बेहतर योगदान की अपेक्षा रहेगी। मेहमान बल्लेबाजों को भारतीय आक्रमण के सामने रक्षात्मक खेल और रन बनाने के अवसरों के बीच संतुलन रखना होगा। लगातार खाली गेंदों का दबाव बड़े शॉट खेलने की मजबूरी पैदा कर सकता है। ऐसे में स्ट्राइक बदलना और कमजोर गेंदों का लाभ उठाना उनकी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।
गेंदबाजी में जिंबाब्वे को शुरुआती विकेटों की जरूरत होगी। पिछले मुकाबले में भारत ने केवल एक विकेट गंवाया, जिससे मेहमान टीम लक्ष्य की रक्षा करते समय दबाव नहीं बना सकी। दूसरे वनडे में भारतीय शीर्षक्रम को खुलकर खेलने से रोकना आवश्यक होगा। इसके लिए केवल अच्छी शुरुआती गेंदबाजी पर्याप्त नहीं होगी; बीच के ओवरों में भी अनुशासन बनाए रखना पड़ेगा। सीमित लक्ष्य होने पर कैच और रन रोकने के छोटे अवसर भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं। यह मुकाबले की स्थिति पर आधारित रणनीतिक आकलन है।
भारतीय टीम प्रबंधन के लिए सीरीज जीतने के साथ खिलाड़ियों की भूमिकाओं में निरंतरता बनाए रखना भी अहम होगा। पहले मुकाबले में सफल रहे बल्लेबाजी क्रम ने टीम को सहज जीत दिलाई थी। फिर भी दूसरे मैच की अंतिम एकादश टॉस के समय ही स्पष्ट होगी। किसी संभावित बदलाव को अभी निश्चित नहीं माना जा सकता। मेजबान टीम अपनी श्रेष्ठता बरकरार रखना चाहेगी, जबकि जिंबाब्वे को प्रतिस्पर्धी प्रदर्शन के लिए बल्लेबाजी, गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण में एक साथ सुधार करना होगा। दूसरे वनडे का परिणाम सीरीज की दिशा तय करेगा। भारत जीता तो अंतिम मुकाबले से पहले ट्रॉफी सुनिश्चित हो जाएगी। जिंबाब्वे की जीत सीरीज को बराबरी पर लाकर अंतिम मैच को निर्णायक बना देगी। पहले मैच के प्रदर्शन के आधार पर भारत का पलड़ा भारी है, लेकिन मैदान पर नई शुरुआत के साथ दोनों टीमों को अपनी योजनाएं लागू करनी होंगी।
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